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कोरोना का एक साल: जानें क्या कहते हैं वायरस से जंग जीतने वाले

Sat, 20 Mar 2021 03:01 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क,पांवटा साहिब (सिरमौर)
अमर उजाला नेटवर्क,पांवटा साहिब (सिरमौर) Published by: Krishan Singh Updated Sat, 20 Mar 2021 03:01 AM IST
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coronavirus one year: know what said those who won the war against virus
डीएसपी बीर बहादुर सिंह - फोटो : अमर उजाला

हिमाचल में कोरोना की दस्तक को पूरा एक साल हो गया है। लॉकडाउन में लोगों का साहस, धैर्य और कोरोना वॉरियर्स का सेवा भाव देखा। रोजगार छिना, पलायन देखा, घर में कैद होना पड़ा, उद्योग-धंधे बंद हो गए, पर्यटन ठप रहा, अपनों को खोया फिर भी कोरोना को हराने की जंग जारी रखी। प्रदेश में कोरोना के मामलों को शून्य तक पहुंचा ही दिया था। सब सामान्य होने लगा तो अब कोरोना की दूसरी लहर परीक्षा लेने को तैयार है।  प्रदेश के फ्रंटलाइन कोरोना वॉरियर्स डीएसपी बीर बहादुर सिंह अगस्त 2019 में कोरोना पॉजिटिव आए थे। 10 दिन तक कोविड गाइडलाइन का पालन करने के बाद वह कोरोना से जंग जीतने में कामयाब रहे।

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 डीएसपी का कहना है कि महामारी का पता चलने पर घबराएं नहीं। होम आइसोलेट-क्वारंटीन होकर उचित सावधानियां बरतते हुए कोराना को मात दी जा सकती है। रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर परिवार और बच्चों की महामारी से सुरक्षा को लेकर थोड़ा सा असहज जरूर हुए लेकिन उसके बाद कोरोना दिशा-निर्देश का पूरा पालन किया। खुद को 10 दिनों तक के लिए होम क्वारंटीन कर लिया। इस दौरान उचित डाइट, काढ़ा- गर्म पानी पीया, गर्म पानी का भाप भी लिया। रोज योग और नियमित व्यायाम किया। कोरोना के शरीर पर लक्षण नजर आ रहे हैं, तो खुद पहचाने और बेहतर ढंग से खुद ही ट्रीट करें। लैब से संक्रमित रिपोर्ट आने पर घबराएं नहीं। 
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क्या कहता है पहला संक्रमित 
कांगड़ा के लंज क्षेत्र के पहले संक्रमित युवक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जब उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव पाई गई थी, उसके बाद उसकी जिंदगी काफी मुश्किल हो गई थी। आसपास के लोगों ने काफी भेदभाव किया था। जिस कारण उनका एक वर्ष काफी खराब गया है। कोई भी उन्हें नौकरी नहीं दे रहा था। उन्होंने बताया कि इस दौैरान भारी मात्रा में लोग संक्रमित पाए जा रहे हैं और स्वस्थ होने के बाद भी अपनी आम जिंदगी जी रहे हैं, लेकिन जब वह पॉजिटिव हुए थे तो लोगों की धारणा उनके प्रति अगल हो गई थी। लोग उन्हें अलग नजरिये से देखते थे और भेदभाव करते थे। 
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नूरपुर के पंजाहड़ा, नर्सिंग कालेज और ग्यातौ मोनेस्ट्री ने डराए लोग
जिला कांगड़ा में कई बार कोरोना के एक साथ कई मामले आए। ब्लास्ट हुआ था, जिसके एक ही क्षेत्र के एक साख कई लोग संक्रमित पाए गए थे। अगस्त माह में नूरपुर के पंजाहड़ा गांव में शादी समारोह में शामिल होने के बाद 36 लोग संक्रमित पाए गए थे। क्षेत्र को कंटेनमेंट जोन बनाया गया था। फरवरी माह में पालमपुर के नर्सिंग कॉलेज में करीब 46 प्रशिक्षु नर्सें कोरोना से ग्रस्त पाई गईं। इसके अलावा लोसर त्योहार में शामिल होने के कारण धर्मशाला के सिद्धपुर स्थित ग्यातौ मोनेस्ट्री में करीब 170 बौद्ध भिक्षु संक्रमण का शिकार हुए थे।

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