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कोरोना ने तोड़ी मां शूलिनी मेले की 200 साल पुरानी परंपरा
Sat, 26 Jun 2021 05:45 PM IST
Krishan Singh
अमर उजाला नेटवर्क, सोलन
अमर उजाला नेटवर्क, सोलन
Published by: Krishan Singh
Updated Sat, 26 Jun 2021 05:45 PM IST
सार
मां शूलिनी का राजा ने इस बार भी स्वागत किया। राजस्थान के धारा नगरी से राजा दुर्गा सिंह ने मां शूलिनी को सोलन में स्थापित किया था। इसके बाद मां शूलिनी मेला बड़े धूमधाम से मनाया जाता रहा है।
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शूलिनी मेले
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हिमाचल प्रदेश के पिछले 200 वर्षों से चली आ रही शूलिनी मेले की समृद्ध परंपरा लगातार दूसरे साल कोरोना वायरस ने तोड़ दी है। मेले के दूसरे दिन मां शूलिनी के प्राचीन पीठ्म के बाहर लोगों को रोकने के लिए पुलिस का पहरा था। दो बहनों के एक साथ दर्शन करने पहुंचे श्रद्धालुओं को मंदिर के दरवाजे पर ही रोक दिया। लोगों को मंदिर के गेट से ही दर्शन कर लौटना पड़ा।
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मां शूलिनी का राजा ने इस बार भी स्वागत किया। राजस्थान के धारा नगरी से राजा दुर्गा सिंह ने मां शूलिनी को सोलन में स्थापित किया था। इसके बाद मां शूलिनी मेला बड़े धूमधाम से मनाया जाता रहा है। कोविड से पूर्व दो बहनों के मिलन पर ऐतिहासिक ठोडा नृत्य, विशाल दंगल, रात्रि संध्या सहित कई खेलें होती जाती थीं।
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शनिवार को भी मां शूलिनी प्राचीन पीठ्म मंदिर में पुलिस बल तैनात रहा। हालांकि, लोगों की आस्था को लेकर मंदिर के बाहर दानपात्र भी लगाया गया था। मंदिर के बाहर दर्शन करने वाले भक्तों को माता का प्रसाद भी बांटा गया। उधर मां शूलिनी के पुजारी पंडित रामस्वरूप शर्मा ने कहा कि कोरोना की वजह से मां शूलिनी मेला दूसरे साल भी सूक्ष्म रूप से मनाना पड़ा। मां शूलिनी को सोलन में स्थापित करने वाले राजस्थान में धारा नगरी के राजा दुर्गा सिंह के वंशज भी माता का स्वागत नहीं कर सके। दो बहनों की मिलने की खुशी में होने वाला ऐतिहासिक ठोडा नृत्य व दंगल भी नहीं हो पाया। रविवार को मां शूलिनी प्राचीन पीठ्म से करीब साढ़े चार बजे अपने स्थान की ओर रवाना होंगी।
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