फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Committee constituted to investigate the encroachments on forest land in Jubbal

NGT Order: जुब्बल में वन भूमि पर कब्जों की जांच के लिए कमेटी गठित, एनजीटी ने लिया कड़ा संज्ञान

Sun, 11 Sep 2022 11:36 AM IST
Krishan Singh पुष्पेन्द्र वर्मा, शिमला
पुष्पेन्द्र वर्मा, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Sun, 11 Sep 2022 11:36 AM IST
सार

जुब्बल निवासी कुलतार सिंह के लिखे पत्र पर एनजीटी ने कड़ा संज्ञान लिया है। याची ने पत्र में आरोप लगाया गया है कि जुब्बल क्षेत्र में वन भूमि पर कब्जे किए गए हैं।

विज्ञापन
Committee constituted to investigate the encroachments on forest land in Jubbal
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल - फोटो : PTI

विस्तार

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने शिमला जिले के जुब्बल में वन भूमि पर किए गए कब्जों पर कड़ा संज्ञान लिया है। न्यायिक सदस्य अरुण कुमार त्यागी और अफरोज अहमद ने इसकी जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। प्रदेश के प्रधान सचिव (वन), जिलाधीश शिमला और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन को कमेटी का सदस्य बनाया गया है। एनजीटी ने कमेटी को आदेश दिए कि वह इस मामले की जांच करे और अपनी अनुपालना रिपोर्ट ई-मेल के माध्यम से 23 सितंबर तक ट्रिब्यूनल को भेजे।

विज्ञापन


जुब्बल निवासी कुलतार सिंह के लिखे पत्र पर एनजीटी ने कड़ा संज्ञान लिया है। याची ने पत्र में आरोप लगाया गया है कि जुब्बल क्षेत्र में वन भूमि पर कब्जे किए गए हैं। हाईकोर्ट के आदेशों के तहत इन कब्जों को हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन बाद में इस मुहिम को बंद कर दिया गया। याचिकाकर्ता ने एनजीटी को बताया कि वन भूमि पर सदाबहार पेड़ लगाना चाहता हूं, लेकिन वन विभाग भूमि मुहैया नहीं करवा रहा। याचिकाकर्ता ने वन भूमि के संरक्षण के लिए जरूरी आदेश देने की गुहार लगाई है। एनजीटी ने पाया कि पत्र में लगाए आरोप गंभीर हैं। इसकी जांच और रोकथाम जरूरी है। एनजीटी ने कमेटी को आदेश दिए कि वह याचिकाकर्ता के आरोपों की जांच करे और इसकी रोकथाम के लिए कानूनी तौर पर आवश्यक कदम उठाएं। 
विज्ञापन


हाईकोर्ट में लंबित है मामला
सेब के पौधे लगाकर वन भूमि पर अतिक्रमण करने का मामला हाईकोर्ट में लंबित है। हाईकोर्ट ने पहले छह माह में कब्जे हटाने के आदेश दिए थे। इंडियन आर्मी कुफरी की ईको टास्क फोर्स को आदेश दिए थे कि तुरंत प्रभाव से कब्जे छुड़ाए। बाद में हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया था कि सेब के पौधों को काटना कब्जे छुड़ाने का सही उपाय नहीं है। इससे पर्यावरण पर बुरा असर पड़ेगा। राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया था कि वह छोटे किसानों को लाभ देने के लिए नीति तैयार कर रही है। इसके लिए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को छूट देते हुए स्पष्ट किया था कि कोर्ट ने अभी नीतियों की वैधता को सही नहीं ठहराया है। इस नीति पर यदि कोई आपत्ति जताता है तो अदालत इसे कानूनी तरीके से परख सकती है। 

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed