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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Colonel Ranveer Singh hoisted the tricolor on Himachal's highest and most difficult Rio Purgil peak

उपलब्धि: कर्नल रणवीर सिंह ने हिमाचल की सबसे ऊंची और मुश्किल रियो पुर्गिल चोटी पर फहराया तिरंगा

Fri, 26 May 2023 06:50 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, रिकांगपिओ (किन्नौर)
संवाद न्यूज एजेंसी, रिकांगपिओ (किन्नौर) Published by: Krishan Singh Updated Fri, 26 May 2023 06:50 PM IST
सार

कर्नल जम्वाल के नेतृत्व में 14 पर्वतारोहियों का दल दुर्गम रास्तों से होकर भारत की सबसे मुश्किल चोटियों में से एक के लिए रवाना हुआ था। 

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Colonel Ranveer Singh hoisted the tricolor on Himachal's highest and most difficult Rio Purgil peak
रियो पुर्गिल चोटी पर फहराया तिरंगा - फोटो : संवाद

विस्तार

राष्ट्रीय पर्वतारोहण और साहसिक खेल संस्थान (निमास) के अनुभवी पर्वतारोहियों ने कर्नल रणवीर सिंह जम्वाल की अगुवाई में हिमाचल प्रदेश की सबसे ऊंची और कठिनतम रियो पुर्गिल चोटी फतह की। कर्नल जम्वाल के नेतृत्व में 14 पर्वतारोहियों का दल दुर्गम रास्तों से होकर भारत की सबसे मुश्किल चोटियों में से एक के लिए रवाना हुआ था। अंत में पांच पर्वतारोही कर्नल रणवीर, हवलदार जयपाल सिंह एसएम, नायक देवेंद्र बीडीआर जीएम, दोरजे कंडु और टोसि रिमे ने रियो पुर्गिल पर्वत पर चढ़ाई की। अब उत्तराखंड के दुर्जेय पर्वत कामेट को अगला लक्ष्य बनाया है।

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पूह ब्लॉक के जिला परिषद सदस्य शांता कुमार नेगी ने कहा कि हर शिखर तिरंगा टीम 11 मई को किन्नौर जिले के नाको गांव पहुंची थी। हर शिखर तिरंगा निमास का एक अनोखा और साहसिक अभियान है, जिसका पहले कभी प्रयास नहीं किया गया है। इस कठिन प्रयास में अरुणाचल प्रदेश के दिरांग स्थित राष्ट्रीय पर्वतारोहण और साहसिक खेल संस्थान (निमास) के अनुभवी पर्वतारोहियों की टीम ने पहले ही सात उत्तर पूर्वी राज्यों के सबसे ऊंचे पहाड़ों पर तिरंगा फहरा लिया है और अब हिमाचल प्रदेश की सबसे ऊंची चोटी पर पहुंचने में भी सफतला हासिल कर ली है।
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हिमालय के दक्षिण जांस्कर रेंज के रियो पुर्गिल भाग में पिछले पांच दशकों में केवल तीन बार पर्वतारोहियों ने सफलतापूर्वक चढ़ाई की है। रियो पुर्गिल पहाड़ पर बड़े पत्थर एवं बर्फ सहित कठिन ढलान के कारण इस पर चढ़ने का बहुत कम प्रयास किया जाता है। पिछले 10 वर्षों में इस पहाड़ पर चढ़ने के चार से ज्यादा प्रयास किए गए, लेकिन वह सफल नहीं हुए। निमास की टीम को पहाड़ी उपकरणों और राशन अपनी पीठ पर ही ले जाना पड़ा, क्योंकि बर्फबारी के कारण खच्चर बेस कैंप तक नहीं पहुंच सके।
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टीम ने शिखर पर पहुंचने से पहले 5417 मीटर और 6170 मीटर की ऊंचाई पर दो कैंप लगाए। बर्फ और चट्टानी इलाके के दुर्गम रास्ते से टीम के सदस्य 18 घंटे में गंतव्य शिखर तक पहुंचे। कर्नल जम्वाल के नेतृत्व में टीम 22 मई को दोपहर बाद 2:50 बजे शिखर पर पहुंची। टीम 22 मई को शाम 7:55 बजे बेस कैंप में और आखिर में 24 मई की शाम को नाको गांव पहुंची। यहां पहुंचने पर पूह ब्लॉक पार्षद शांता कुमार नेगी, गौरव नवांग सहित कई अन्य लोगों ने टीम के सदस्यों का स्वागत किया।

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