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बड़ा फैसला: हिमाचल के मंदिरों-शक्तिपीठों में सिर्फ हिंदू कर्मचारी ही होंगे तैनात, गैर हिंदुओं पर खर्च नहीं होगा चढ़ावा

Sat, 02 Oct 2021 12:16 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Sat, 02 Oct 2021 12:16 PM IST
सार

भाषा कला एवं संस्कृति विभाग ने हिमाचल प्रदेश हिंदू सार्वजनिक धार्मिक संस्था और पूर्त विन्यास अधिनियम-1984 की धारा 27 के तहत मंदिर आयुक्तों को आदेश जारी किए हैं। भाषा एवं संस्कृति विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव आरडी धीमान की ओर से इसको लेकर अधिसूचना जारी की गई है। 

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chadhawa to Himachal temples will not be spent on non-Hindus
हिमाचल के प्रसिद्घ शक्तिपीठ। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल के मंदिरों-शक्तिपीठों, धार्मिक संस्थाओं को चढ़ावे के तौर पर मिलने वाला पैसा और सोना, चांदी गैर हिंदुओं पर खर्च नहीं होगा। साथ ही मंदिरों में सुरक्षा से संबंधित कामों समेत समस्त तैनात या नियुक्त अधिकारी और कर्मचारी भी केवल हिंदू धर्म को मानने वाले ही होंगे। भाषा कला एवं संस्कृति विभाग ने हिमाचल प्रदेश हिंदू सार्वजनिक धार्मिक संस्था और पूर्त विन्यास अधिनियम-1984 की धारा 27 के तहत मंदिर आयुक्तों को आदेश जारी किए हैं।

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मुख्य सचिव आरडी धीमान की ओर से इसको लेकर अधिसूचना जारी की गई
भाषा एवं संस्कृति विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव आरडी धीमान की ओर से इसको लेकर अधिसूचना जारी की गई है। बता दें कि कि प्रदेश में कई बड़े मंदिर हैं और इनमें हर साल करोड़ों रुपये का चढ़ावा चढ़ाया जाता है। मंदिरों का सोना और चांदी खजाने में जमा किया जाता है, जबकि धनराशि को बैंकों में एफडी बनाकर रखा जाता है। अधिकांश मंदिरों में यह सोना और चांदी वर्षों से खजाने में पड़ा है। इसका सही इस्तेमाल नहीं हो पाया है। 
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वर्तमान में चढ़ावा राशि से देते हैं मंदिर कर्मचारियों को वेतन
प्रदेश के मंदिरों में चढ़ावा राशि से पुजारियों और अन्य कर्मचारियों को वेतन और भत्ते दिए जाते हैं। इसके अलावा यह राशि मंदिरों के रखरखाव, मूर्तियों-मंदिरों की सजावट, मंदिरों के अधीन स्कूलों-कॉलेजों और संस्कृत कॉलेज खोलने, सराय बनाने, सड़कों को तैयार करने पर भी खर्च की जाती है। चढ़ावे की शेष राशि बैंक में मंदिरों के नाम एफडी के रूप में जमा की जाती है। यह पैसा विकास कार्यों समेत कई अन्य प्रशासनिक कार्यों पर खर्च होता है।
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सोना-चांदी को ढालकर श्रद्धालुओं को सिक्के देने की थी योजना 
मंदिरों के खजाने में सालों से क्विंटलों के हिसाब से पड़े सोने-चांदी को पिघलाकर श्रद्धालुओं को सिक्के देने की योजना थी, लेकिन यह सिरे नहीं चढ़ पाई। बताया जा रहा है 1986 में संशोधित नियमों में फिर संशोधन करने की तैयारी है, ताकि मंदिरों के पैसे और जेवरात का सही इस्तेमाल हो सके। 

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