Baddi: भगवंत खुबा बोले- भारत को फार्मा हब के रूप में तैयार करने का बनाया रोडमैप, हिमाचल को देंगे प्राथमिकता
केंद्रीय रसायन और उर्वरक राज्य मंत्री भगवंत खुबा ने कहा है कि केंद्र सरकार ने आने वाले 25 सालों में भारत को एक फार्मा हब के रूप में तैयार करने का रोडमैप बनाया है।
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केंद्रीय रसायन और उर्वरक राज्य मंत्री भगवंत खुबा ने कहा है कि केंद्र सरकार ने आने वाले 25 सालों में भारत को एक फार्मा हब के रूप में तैयार करने का रोडमैप बनाया है। इसमें हिमाचल प्रदेश को प्राथमिकता दी जाएगी। भगवंत खुबा मंगलवार को बद्दी में आयोजित संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। लघु उद्योग भारती की फार्मा विंग और हिमाचल ड्रग मैन्युफेक्चर एसोसिएशन की प्रदेश इकाई की ओर से फार्मास्युटिकल उद्योग के सुदृढ़ीकरण की योजना पर यह संगोष्ठी आयोजित की गई थी। खुबा ने कहा कि सरकार कच्चे माल के लिए किसी भी बाहरी देश पर निर्भर नहीं रहना चाहती। इसलिए पहले यहां पर कच्चा माल तैयार होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि देश की 35 फीसदी दवाएं हिमाचल में बनती हैं, जिसमें 20 फीसदी बीबीएन क्षेत्र से बन रही हैं। इसके लिए उन्होंने यहां के दवा निर्माताओं का आभार भी जताया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार अपनी जीडीपी का 50 फीसदी लघु उद्योग के विकास पर व्यय करना चाहती है।
अंग्रेजों के समय के ड्रग एक्ट में संशोधन करने की मांग
एचडीएमए के प्रदेशाध्यक्ष राजेश गुप्ता ने कहा कि कोरोना काल में भारत ही नहीं, अमेरिका में भी दवाओं का निर्यात किया गया। उन्होंने अंग्रेजों के समय के ड्रग एक्ट में संशोधन करने, ड्रग ट्रिब्यूनल बोर्ड का गठन करने की मांग की। वहीं, उद्योग विभाग के निदेशक राकेश प्रजापति ने कहा कि नालागढ़ में 265 एकड़ जमीन पर मेडिकल डिवाइस पार्क बन रहा है। सीआईए ने इसे मंजूरी दे दी है। उन्होंने यहां पर ट्रेनिंग सेंटर खोलने की मांग रखी। मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव सुभाष पांडा ने कहा कि बद्दी में 243 उद्योग ऐसे हैं, जिन्हें डब्ल्यूएचओ की ओर से गुणवत्ता के लिए प्रमाणित किया गया है। बद्दी में 45,000 करोड़ रुपये का उत्पादन होता है। उन्होंने कहा कि पैकेज समाप्त होने के बाद भी उद्योगपति यहां पर अपने उद्योग चला रहे हैं। हिमाचल के पास न तो खरीदार हैं और न ही कोई विशेष छूट है। उसके बावजूद भी यहां पर उद्योग काम कर रहे हैं। हालांकि, हिमाचल में बिजली-पानी सस्ता है। वातावरण के हिसाब से भी यहां पर कोई दिक्कत नहीं है। यही कारण है कि यहां से उद्योग पलायन नहीं कर रहे हैं।