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Shimla News: आम जनता के लिए खुला बैंटनी कैसल, गांधी और शिमला का इतिहास दिखेगा

Wed, 20 Sep 2023 10:52 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Wed, 20 Sep 2023 10:52 PM IST
सार

प्रदेश की राजधानी शिमला के मालरोड पर वर्ष 1830 में बना बैंटनी कैसल भवन बुधवार को आम जनता और पर्यटकों के लिए खुल गया। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने इसका शुभारंभ किया।

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Bantony Castle opened for general public and tourists, history of Shimla - glimpse of Kangra Kalam will be see
आम जनता, पर्यटकों के लिए खुला बैंटनी कैसल - फोटो : संवाद

विस्तार

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के मालरोड पर वर्ष 1830 में बना बैंटनी कैसल भवन बुधवार को आम जनता और पर्यटकों के लिए खुल गया। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने इसका शुभारंभ किया। शिमला का पुराना इतिहास, महात्मा गांधी का शिमला दौरा, कांगड़ा कलम, चंबा थाल, कांगड़ी टोपी, शॉल और हिमाचल के स्मारकों को आकर्षक तरीके से इसमें प्रदर्शित किया है। इसके अलावा इसमें प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री डॉ. वाईएस परमार की जीवनी, मालरोड का 1890, संजौली 1845, पीटरहॉफ 1865 और विलो बैंक का 1860 का इतिहास दर्शाया है। इसमें पर्यटकों के लिए हिमाचल से संबंधित क्राफ्ट भी उपलब्ध रहेगा जिसे देखने के लिए पर्यटक उत्साहित रहते हैं। 24 मई को उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने लाइट एंड साउंड शो का शुभारंभ किया था। इसके बाद यह शो रोजाना शाम के समय दिखाया जाता है। अब बैंटनी कैसल भवन को आम जनता के लिए अंदर से देखने के लिए भी खोल दिया है। टूरिस्ट सीजन में शिमला में रोजाना 15 से 20 हजार सैलानी घूमने के लिए आते हैं।

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भवन देखने के लिए लगेगा 50 रुपये का टिकट
राज्य संग्रहालय के अध्यक्ष हरि चौहान ने बताया कि बैंटनी कैसल में प्रवेश के लिए 50 रुपये टिकट निर्धारित किया है। बताया कि पर्यटकों के लिए बैंटनी कैसल का भवन सुबह 10 से शाम 5 बजे तक खुला रहेगा। इसके बाद पर्यटक शाम को लाइट एंड साउंड शो देख सकते हैं। इसका समय शाम 7:00 से 7:30 और 7:30 से 8:00 बजे तक का रखा है। इसमें शिमला के इतिहास को वीडियो के माध्यम से दिखाया जाता है। इसके लिए अलग से 100 रुपये का टिकट लेना होगा।
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25 करोड़ से हुआ है भवन का नवीनीकरण
बैंटनी कैसल का निर्माण कैप्टन अंग्रेज अफसर बैंटनी ने वर्ष 1830 में एक कॉटेज के रूप में कराया था। साल 1880 में बैंटनी कैसल को कैप्टन ए गार्डन ने तत्कालीन सिरमौर रियासत के राजा अमर प्रकाश बहादुर को बेच दिया था। महाराजा सिरमौर ने इसका पुनर्निर्माण करवाया। इसके बाद यह ऐतिहासिक इमारत बिहार के दरभंगा महाराजा की संपत्ति भी रही। वर्ष 1968 में इसे लोअर बाजार के व्यक्ति ने 3.50 लाख रुपये में खरीद लिया। इसके बाद हिमाचल प्रदेश सरकार ने वर्ष 2017 में 27.84 करोड़ में बैंटनी कैसल का अधिग्रहण किया। पूर्व जयराम सरकार में बैंटनी कैसल को पर्यटक स्थल के तौर पर विकसित करने का काम शुरू किया था। इसके नवीनीकरण का काम 2022 में हो गया था। लगभग 25 करोड़ भवन के जीर्णोद्धार पर खर्च किए हैं। 18 हजार वर्ग मीटर में फैली यह इमारत खूबसूरत पहाड़ों के बीच है। इसकी एक तरफ शिमला का मशहूर ग्रैंड होटल और दूसरी तरफ सीटीओ भवन है।

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