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हिमाचल विधानसभा में एलान: सरकार जल्द लाएगी आउटसोर्स कर्मियों और करुणामूलक नियुक्तियों के लिए नई नीति

Mon, 13 Dec 2021 08:52 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, तपोवन/धर्मशाला
अमर उजाला ब्यूरो, तपोवन/धर्मशाला Published by: Krishan Singh Updated Mon, 13 Dec 2021 08:52 PM IST
सार

विपक्ष के आउटसोर्स नियुक्तियों को लेकर हंगामे पर जल शक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ने कहा कि आउटसोर्स की प्रवृत्ति को 2012 से 17 के दौरान शुरू किया गया। सरकार ने आउटसोर्स कर्मियों के लिए ही कैबिनेट सब कमेटी गठित की है। इसका काम लगभग पूरा हो गया है। 

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Announcement in Himachal Assembly: Government will soon bring new policy for outsourced and compassionate workers
तपोवन में करुणामूलक संघ ने प्रदर्शन किया। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आउटसोर्स कर्मियों और करुणामूलक नियुक्तियों को लेकर विपक्ष के हंगामे और वॉकआउट पर जल शक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ने कड़ी नाराजगी जताई। कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार ने करुणामूलक आधार पर करीब 900 लोगों को नियुक्तियां दी हैं। आरोप लगाया कि पूर्व कांग्रेस सरकार ने 58 साल की आयु तक करुणामूलक आधार पर नियुक्ति के नियम में बदलाव कर उसे घटाकर 50 साल कर दिया था। वर्तमान सरकार ने इसे 58 साल किया। सरकार ने प्रावधान किया कि अगर सेवानिवृत्ति के दिन भी कर्मचारी की मृत्यु होती है तो उसके परिवार के व्यक्ति को नौकरी दी जाएगी। कहा कि सरकार जल्द नीति लाएगी। विपक्ष के आउटसोर्स नियुक्तियों को लेकर हंगामे पर मंत्री ने कहा कि आउटसोर्स की प्रवृत्ति को 2012 से 17 के दौरान शुरू किया गया। सरकार ने आउटसोर्स कर्मियों के लिए ही कैबिनेट सब कमेटी गठित की है। इसका काम लगभग पूरा हो गया है।

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जल्द वह इन कर्मियों के लिए नई पॉलिसी कैबिनेट के सामने रखेगी। लगातार कर्मचारी सेवानिवृत्त हो रहे हैं। सरकारी तंत्र के विस्तार की वजह से कर्मचारियों की भर्ती जरूरी है। कहा कि पिछले 4 साल में सरकार ने इसी वजह से हजारों भर्तियां की हैं। कहा कि इनकी सरकार में तो चिट से भर्ती हुआ करती थी। जिनकी आदत में सिर्फ विरोध करना है, वही लोग सदन का बहुमूल्य समय बर्बाद कर रहे हैं। कहा कि प्रश्नकाल के दौरान ज्वलंत मुद्दे उठाए जाते हैं, लेकिन विपक्ष प्रश्नकाल के दौरान ही बाहर रहता है। कहा कि नियम 67 को भी विपक्ष ने कचरा बना दिया है, जबकि पीठ ने नियमों का हवाला देकर स्पष्ट किया कि एक ही साथ चार विषय पर चर्चा नहीं मांगी जा सकती है।

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