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लॉकडाउन से प्रदेश में होटल इंडस्ट्री को 20 हजार करोड़ का नुकसान

Wed, 21 Oct 2020 05:05 PM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Wed, 21 Oct 2020 05:05 PM IST
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20 thousand crore loss to Hotel industry due to lockdown in Himachal Pradesh
होटल (फाइल फोटो) - फोटो : Pexels.com

लॉकडाउन के कारण हिमाचल में होटल इंडस्ट्री को करीब 20 हजार करोड़ का नुकसान हुआ है। होटल कारोबारी भारी वित्तीय संकट से गुजर रहे हैं। अगर सरकार ने होटल कारोबारियों को वित्तीय मदद नहीं दी तो सैकड़ों होटलों पर ताले लटक सकते हैं। यह बात बुधवार को शिमला में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान फेडरेशन ऑफ हिमाचल होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के नवनियुक्त अध्यक्ष अश्वनी बांबा और उपाध्यक्ष संजय सूद ने कही।

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होटल कारोबारियों की समस्याएं और मांगें सरकार के समक्ष उठाने के लिए प्रदेश की सभी होटल और रेस्टोरेंट एसोसिएशन को संगठित कर फेडरेशन बनाई गई है। इसमें विंपी बख्शी महासचिव, राजेंद्र चोपड़ा कोषाध्यक्ष और नरेंद्र भारद्वाज कार्यकारिणी सदस्य चुने गए हैं। अश्वनी बांबा और संजय सूद ने कहा कि 6 महीने से प्रदेश में होटल बंद थे। अब होटल खुलना शुरू हुए हैं तो इनमें ऑक्यूपेंसी बहुत कम है।
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इस कारण कमाई नहीं हो रही है। नगर निकाय प्रॉपर्टी, गारबेज टैक्स और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड फीस का बोझ डाल रहे हैं। संकट के इस समय में सभी प्रकार के टैक्स और फीस की होटल कारोबारियों को छूट दी जानी चाहिए। लॉकडाउन के बाद होटल कारोबारियों को राहत देने के लिए सरकार ऋण देने की योजना लाई थी, लेकिन निजी बैंक होटल कारोबारियों को लोन देने के लिए तैयार नहीं हैं। इस समय होटलों को वर्किंग कैपिटल की भारी जरूरत है।
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प्रदेश में वोल्वो बसें न चलने से भी पर्यटन कारोबार रफ्तार नहीं पकड़ रहा है। मौजूदा सीजन में गुजरात और बंगाल से सैलानी प्रदेश के विभिन्न पर्यटन स्थल का रुख करते हैं, लेकिन न तो वोल्वो बसें चल रही हैं न ही ट्रेनें। इंटरनेशनल फ्लाइट भी बंद हैं। फेडरेशन ने सरकार से एसओपी के तहत तुरंत वोल्वो बसें चलाने की मांग की है। उत्तराखंड की तर्ज पर पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए डिस्काउंट कूपन की स्कीम लागू करने का भी आग्रह किया है।


स्टाफ की किल्लत, होटलों के आधे स्टाफ ने बदल दिया रोजगार
फेडरेशन के पदाधिकारियों ने कहा कि प्रदेश में करीब 4000 पंजीकृत और करीब इतने ही गैर पंजीकृत होटल हैं। 2000 पंजीकृत रेस्टोरेंट हैं। करीब तीन हजार गैर पंजीकृत रेस्टोरेंट और फूड ज्वाइंट चल रहे हैं। लॉकडाउन में होटल और रेस्टोरेंट से स्टाफ घर भेज दिया गया था। अब 50 फीसदी ही स्टाफ वापस आया है। 50 फीसदी स्टाफ ने लॉकडाउन में कोई अन्य रोजगार अपना लिया है। ऐसे में होटल इंडस्ट्री को स्टाफ की किल्लत से भी जूझना पड़ रहा है।

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