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सिरमौर की कातिल सड़कों पर हैं 50 ब्लैक स्पॉट
Shimla
Updated Tue, 17 Jun 2014 05:32 AM IST
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शिमला। हिमाचल में सिरमौर जिले की कातिल सड़कों पर 50 ब्लैक स्पॉट हैं। न तो इन्हें पीडब्ल्यूडी ने ठीक करने की जहमत उठाई और न ही परिवहन और पुलिस महकमे चेते कि वे अपने स्तर पर इन दुर्घटनाओं के मद्देनजर संवेदनशील स्थलों को ठीक करने के लिए उचित पग उठाए। ऐसे में एक सवाल खड़ा होता है कि भविष्य में इन स्थलों में हादसे रुक पाएंगे, यह कैसे संभव होगा?
पूरे सिरमौर जिले में 50 ब्लैक स्पॉट हैं। इनमें सैनवाला, बातापुल, सूरजपुर, पुरवाला, धौलाकुआं, संगडाह पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस, काहन, चोक्कर, बडयालटा, धनोई, जागीर, मीनार, पुनाली, कफोटा जैसे स्थल सबसे खतरनाक आंके गए हैं। नाहन क्षेत्र में कुल पांच, पांवटा साहिब में नौ, माजरा क्षेत्र में सात, संगडाह में तीन, शिलाई में एक, सराहन में चार, नौहराधार में तीन, हरिपुरधार में तीन, ददाहू में तीन, राजगढ़ में भी तीन, रोनहाट में चार, गत्ताधार में तीन और कफोटा में दो दुर्घटना स्थल हैं। इन सभी प्वाइंटों में उचित साइनबोर्ड की कमी, स्पीड ब्रेकर की कमी, तीखे मोड़, रेलिंग या पैरापिट की भारी कमी आदि दिक्कतें तो हैं ही। ऊपर से सड़कों की हालत भी खस्ता है। जिस क्षेत्र में यह दुर्घटना हुई है, वहां भी लगभग यही हालत बताई जाती है। हाल ही में एक संस्था की ओर से सरकार को दी गई एक रिपोर्ट में भी इन संवेदनशील दुर्घटना स्थलों का हवाला है। अगर इन्हें दुरुस्त नहीं किया जाता है तो भविष्य में भी ऐसे हादसों के रुकने का सिलसिला थमेगा नहीं।
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पूरे सिरमौर जिले में 50 ब्लैक स्पॉट हैं। इनमें सैनवाला, बातापुल, सूरजपुर, पुरवाला, धौलाकुआं, संगडाह पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस, काहन, चोक्कर, बडयालटा, धनोई, जागीर, मीनार, पुनाली, कफोटा जैसे स्थल सबसे खतरनाक आंके गए हैं। नाहन क्षेत्र में कुल पांच, पांवटा साहिब में नौ, माजरा क्षेत्र में सात, संगडाह में तीन, शिलाई में एक, सराहन में चार, नौहराधार में तीन, हरिपुरधार में तीन, ददाहू में तीन, राजगढ़ में भी तीन, रोनहाट में चार, गत्ताधार में तीन और कफोटा में दो दुर्घटना स्थल हैं। इन सभी प्वाइंटों में उचित साइनबोर्ड की कमी, स्पीड ब्रेकर की कमी, तीखे मोड़, रेलिंग या पैरापिट की भारी कमी आदि दिक्कतें तो हैं ही। ऊपर से सड़कों की हालत भी खस्ता है। जिस क्षेत्र में यह दुर्घटना हुई है, वहां भी लगभग यही हालत बताई जाती है। हाल ही में एक संस्था की ओर से सरकार को दी गई एक रिपोर्ट में भी इन संवेदनशील दुर्घटना स्थलों का हवाला है। अगर इन्हें दुरुस्त नहीं किया जाता है तो भविष्य में भी ऐसे हादसों के रुकने का सिलसिला थमेगा नहीं।
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