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विशेषज्ञों की तैनाती को ठोस नीति नहीं
Shimla
Updated Mon, 19 May 2014 05:30 AM IST
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शिमला। प्रदेश में आज तक विशेषज्ञ डाक्टरों की तैनाती को सरकार ठोस नीति तक नहीं बना पाई है। प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल आईजीएमसी से लेकर जिला अस्पतालों तक में विशेषज्ञ डाक्टरों की भारी कमी है। प्रदेश के किस जोन या जिला अस्पताल में कितने विशेषज्ञ डाक्टरों की तैनाती होनी चाहिए? कहां कितने स्त्री रोग विशेषज्ञ चाहिए तथा कहां न्यूरो सर्जन और कहां मनोरोग चिकित्सक की जरूर है? आज तक सरकार की ओर से कोई ब्यू प्रिंट तैयार नहीं किया गया है। वेतनमान पर भी स्पष्ट नीति नहीं है। इस कारण भी प्रदेश से विशेषज्ञ डाक्टरों का लगातार पलायन हो रहा है।
20 से ज्यादा ने छोड़ी नौकरी
प्रदेश में पिछले एक साल के भीतर 20 से अधिक विशेषज्ञ डाक्टरों ने नौकरी छोड़ दी है। आजीएमसी से लेकर टांडा मेडिकल कॉलेज तक के डाक्टर शामिल हैं। विशेषज्ञ डाक्टरों के लिए प्रदेश में नीति स्पष्ट न होने से प्रदेश से डाक्टरों का लगातार पलायन हो रहा है।
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तीन सौ डाक्टरों की जरूरत
एक अनुमान के मुताबिक हिमाचल में तीन सौ से अधिक विशेषज्ञ डाक्टरों की जरूरत है। जिला अस्पतालों से लेकर आईजीएमसी और टांडा मेडिकल कॉलेज में विशेषज्ञ डाक्टरों की भारी कमी है। इस कारण मरीजों को प्रदेश से बाहर रेफर करने को मजबूर होना पड़ता है। आईजीएमसी में महज एक न्यूरो सर्जन है।
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विशेषज्ञ डाक्टरों की तैनाती को लेकर सरकार एक पॉलिसी बना रही है। इस पर तेजी से काम चल रहा है। इससे प्रदेश में अधिक से अधिक डाक्टरों की तैनाती की जा सके। यह पॉलिसी कब तक बनकर तैयार होगी। यह बता पाना फिलहाल संभव नहीं है। - कौल सिंह ठाकुर, स्वास्थ्य मंत्री
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सरकार को विशेषज्ञ डाक्टरों के लिए पॉलिसी बनानी चाहिए। इसमें यह साफ हो कि किस अस्पताल में कितने विशेषज्ञ डाक्टर चाहिए। इसको लेकर लगातार मांग की जाती है, लेकिन सरकार स्तर पर आज तक कोई निर्णय नहीं लिया गया। इस कारण प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर नहीं हो पा रही हैं।
- डा. जीवानंद चौहान, महासचिव मेडिकल ऑफिसर एसोसिएशन
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20 से ज्यादा ने छोड़ी नौकरी
प्रदेश में पिछले एक साल के भीतर 20 से अधिक विशेषज्ञ डाक्टरों ने नौकरी छोड़ दी है। आजीएमसी से लेकर टांडा मेडिकल कॉलेज तक के डाक्टर शामिल हैं। विशेषज्ञ डाक्टरों के लिए प्रदेश में नीति स्पष्ट न होने से प्रदेश से डाक्टरों का लगातार पलायन हो रहा है।
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तीन सौ डाक्टरों की जरूरत
एक अनुमान के मुताबिक हिमाचल में तीन सौ से अधिक विशेषज्ञ डाक्टरों की जरूरत है। जिला अस्पतालों से लेकर आईजीएमसी और टांडा मेडिकल कॉलेज में विशेषज्ञ डाक्टरों की भारी कमी है। इस कारण मरीजों को प्रदेश से बाहर रेफर करने को मजबूर होना पड़ता है। आईजीएमसी में महज एक न्यूरो सर्जन है।
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विशेषज्ञ डाक्टरों की तैनाती को लेकर सरकार एक पॉलिसी बना रही है। इस पर तेजी से काम चल रहा है। इससे प्रदेश में अधिक से अधिक डाक्टरों की तैनाती की जा सके। यह पॉलिसी कब तक बनकर तैयार होगी। यह बता पाना फिलहाल संभव नहीं है। - कौल सिंह ठाकुर, स्वास्थ्य मंत्री
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सरकार को विशेषज्ञ डाक्टरों के लिए पॉलिसी बनानी चाहिए। इसमें यह साफ हो कि किस अस्पताल में कितने विशेषज्ञ डाक्टर चाहिए। इसको लेकर लगातार मांग की जाती है, लेकिन सरकार स्तर पर आज तक कोई निर्णय नहीं लिया गया। इस कारण प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर नहीं हो पा रही हैं।
- डा. जीवानंद चौहान, महासचिव मेडिकल ऑफिसर एसोसिएशन