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पीटीए भरती से पहले लेने होगी निदेशक की मंजूरी
Shimla
Updated Thu, 17 Apr 2014 05:32 AM IST
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शिमला। प्रदेश सरकार के कॉलेज प्राचार्यों के लिए नए अकादमिक सत्र 2014-15 से 2016-17 के लिए जारी दिशा निर्देशों से प्राचार्य असमंजस में हैं। इन आदेशों में हर कालेज को पीटीए, लेक्चरर आधार पर शिक्षकों की तैनाती से पूर्व शिक्षा निदेशक उच्चतर शिक्षा की मंजूरी लेनी अनिवार्य है। यदि प्राचार्य अनुमति नहीं लेता है तो पीटीए का वेतन उनकी तनख्वाह से काटा जाएगा। इन आदेशों से असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है।
कुछ कॉलेजों ने जहां पीटीए पर रखे शिक्षकों को हटाना और उन्हें नोटिस देेना शुरू कर दिया है, वहीं कुछ को जून में शुरू होने वाले नये सत्र में कक्षाएं चलाने की चिंता सताने लगी है। शिक्षा निदेशक से हर ऐसी नियुक्ति के लिए प्रस्ताव भी भेज दिए हैं, क्योंकि कॉलेजों में स्टाफ की कमी है। कोई भी प्राचार्य ऐसा रिस्क नहीं लेगा कि उसके वेतन पर ही कट लग जाए। इसलिए अगले शैक्षणिक सत्र के लिए समय रहते पीटीए की नियुक्ति के लिये निदेशक से अनुमति प्रक्रिया पूरी न हुई तो, शिक्षण कार्य प्रभावित होना तय है। शिमला के ढाई हजार से अधिक संख्या वाले कन्या महाविद्यालय (आरकेएमवी) प्राचार्य ने तो कॉलेज में नये सत्र में तैनाती के लिए दस पीटीए शिक्षकों का निदेशक को प्रस्ताव भी भेज दिया है। वहीं, संजौली और कोटशेरा महाविद्यालय भी जल्द प्रस्ताव भेजने की तैयारी में हैं। तीनों ही कॉलेजों में छात्रों की अधिक संख्या और पद रिक्त होने से पीटीए पर शिक्षक रख कर काम चल रहा है। जून में शुरू होने वाले नये सत्र से पूर्व अनुमति न मिली तो रूसा के तहत पहले और तीसरे सत्र की कक्षाओं को पढ़ाने के लिए शिक्षकों का बंदोबस्त करना मुश्किल होगा।
बाक्स
दो तरह से रखे जाते हैं पीटीए शिक्षक
कॉलेजों में रिक्त पदों को भरने के लिए विभाग की अनुमति से और स्थानीय शिक्षक अभिभावक संघ की सहमति से पीटीए फंड से शिक्षक रखे जाते हैं। वर्तमान सत्र में राजनीति शास्त्र और कामर्स के दो-दो, साइकोलॉजी, होम साइंस, कामर्शियल आर्ट, हिंदी, शारीरिक शिक्षा, इतिहास और डांस विषय में एक एक शिक्षक रखे गए थे। आगे भी इन्हें भरना जरूरी होगा। इसलिए निदेशक को प्राचार्य प्रो. मीरा वालिया ने प्रस्ताव भेज दिया है। संजौली प्राचार्य डा. जेएस नेगी और कोटशेरा प्राचार्य डा. ऊमा रणदेव का कहना है कि जल्द ही आवश्यकता के हिसाब से प्रस्ताव भेजा जा रहा है।
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कुछ कॉलेजों ने जहां पीटीए पर रखे शिक्षकों को हटाना और उन्हें नोटिस देेना शुरू कर दिया है, वहीं कुछ को जून में शुरू होने वाले नये सत्र में कक्षाएं चलाने की चिंता सताने लगी है। शिक्षा निदेशक से हर ऐसी नियुक्ति के लिए प्रस्ताव भी भेज दिए हैं, क्योंकि कॉलेजों में स्टाफ की कमी है। कोई भी प्राचार्य ऐसा रिस्क नहीं लेगा कि उसके वेतन पर ही कट लग जाए। इसलिए अगले शैक्षणिक सत्र के लिए समय रहते पीटीए की नियुक्ति के लिये निदेशक से अनुमति प्रक्रिया पूरी न हुई तो, शिक्षण कार्य प्रभावित होना तय है। शिमला के ढाई हजार से अधिक संख्या वाले कन्या महाविद्यालय (आरकेएमवी) प्राचार्य ने तो कॉलेज में नये सत्र में तैनाती के लिए दस पीटीए शिक्षकों का निदेशक को प्रस्ताव भी भेज दिया है। वहीं, संजौली और कोटशेरा महाविद्यालय भी जल्द प्रस्ताव भेजने की तैयारी में हैं। तीनों ही कॉलेजों में छात्रों की अधिक संख्या और पद रिक्त होने से पीटीए पर शिक्षक रख कर काम चल रहा है। जून में शुरू होने वाले नये सत्र से पूर्व अनुमति न मिली तो रूसा के तहत पहले और तीसरे सत्र की कक्षाओं को पढ़ाने के लिए शिक्षकों का बंदोबस्त करना मुश्किल होगा।
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दो तरह से रखे जाते हैं पीटीए शिक्षक
कॉलेजों में रिक्त पदों को भरने के लिए विभाग की अनुमति से और स्थानीय शिक्षक अभिभावक संघ की सहमति से पीटीए फंड से शिक्षक रखे जाते हैं। वर्तमान सत्र में राजनीति शास्त्र और कामर्स के दो-दो, साइकोलॉजी, होम साइंस, कामर्शियल आर्ट, हिंदी, शारीरिक शिक्षा, इतिहास और डांस विषय में एक एक शिक्षक रखे गए थे। आगे भी इन्हें भरना जरूरी होगा। इसलिए निदेशक को प्राचार्य प्रो. मीरा वालिया ने प्रस्ताव भेज दिया है। संजौली प्राचार्य डा. जेएस नेगी और कोटशेरा प्राचार्य डा. ऊमा रणदेव का कहना है कि जल्द ही आवश्यकता के हिसाब से प्रस्ताव भेजा जा रहा है।
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