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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   : Renewal in second petition for maintenance involves residual

High Court : भरण पोषण की दूसरी याचिका बदली हुई परिस्थितियों में कायम रखने योग्य

Fri, 23 Jun 2023 11:01 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 23 Jun 2023 11:01 AM IST
सार

यह आदेश न्यायमूर्ति ज्योत्सना शर्मा ने श्याम बहादुर सिंह की याचिका को खारिज करते हुए दिया है। कोर्ट ने कहा कि जहां एक व्यक्ति कुछ समय के लिए अपना भरण-पोषण करने में सक्षम है लेकिन उसके बाद बदली हुई परिस्थितियों के कारण अपने संसाधनों को खो देता है तो ऐसे में भरण-पोषण का दावा करने का एक नया अधिकार मिल सकता है।

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: Renewal in second petition for maintenance involves residual
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सीआरपीसी की धारा 125 के तहत भरण-पोषण की मांग करने वाली दूसरी याचिका पहली याचिका खारिज होने के बावजूद कायम रखी जा सकती है। बशर्ते, परिस्थितियों में बदलाव हो तो दावेदार इस प्रावधान के तहत हकदार हो सकता है। कोर्ट ने कहा कि यदि भरण-पोषण के लिए याचिका दाखिल करने का अधिकार समाप्त कर दिया जाता है तो यह सीआरपीसी की धारा 125 के मूल उद्देश्य को भी समाप्त कर देगा।

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यह आदेश न्यायमूर्ति ज्योत्सना शर्मा ने श्याम बहादुर सिंह की याचिका को खारिज करते हुए दिया है। कोर्ट ने कहा कि जहां एक व्यक्ति कुछ समय के लिए अपना भरण-पोषण करने में सक्षम है लेकिन उसके बाद बदली हुई परिस्थितियों के कारण अपने संसाधनों को खो देता है तो ऐसे में भरण-पोषण का दावा करने का एक नया अधिकार मिल सकता है।
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कोर्ट ने मामले में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट उत्तर-पूर्व रेलवे बांदा के जनवरी के आदेश को बरकरार रखते हुए प्रतिवादी को (याची की पत्नी) भरण-पोषण का भुगतान करने का आदेश दिया। प्रतिवादी का पूर्व में भरण पोषण का दावा जिसे जनवरी 1995 में कुछ आधारों पर खारिज कर दिया गया था। इसके बाद उसकी परिस्थितियों में बदलाव आया तो उसने सीआरपीसी 125 के तहत 2003 में फिर भरण-पोषण के भुगतान का दावा किया।

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अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने पत्नी को 15 सौ रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण के भुगतान का आदेश दिया। पति ने न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश को चुनौती दी, जिसे सत्र न्यायाधीश ने खारिज कर दिया। पति ने हाईकोर्ट में शरण ली। उसकी ओर से कहा गया कि पत्नी का दावा पहले खारिज हो चुका है। लिहाजा, दूसरी याचिका पोषणीय नहीं है। पत्नी ने पहले आदेश को चुनौती भी नहीं दी थी।

कोर्ट ने कहा कि धारा 125 का उद्देश्य आवारापन और गरीबी को रोकना है। यह प्रावधान समाज के सदस्यों को त्वरित राहत देता है। कोर्ट ने दूसरी याचिका की पोषणीयता पर उठाए गए सवाल की दलील को भी माना। कोर्ट ने कहा कि पुनर्न्याय का सिद्दांत समान सिद्धांत वाले मुद्दों पर लागू होगा। बदली हुई परिस्थितियों पर नहीं।

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