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प्रियंका के एक धमाकेदार भाषण ने बदल दी थी सियासत, 1999 में कहा था- राजनीति में कभी नहीं आऊंगी

Wed, 20 Mar 2019 12:01 PM IST
ललित फुलारा चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ललित फुलारा Updated Wed, 20 Mar 2019 12:01 PM IST
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Lok Sabha election 2019: Priyanka Gandhi profile congress general election
प्रियंका गांधी

साल 2019 प्रियंका गांधी के राजनीति में पदार्पण का गवाह है। वह कांग्रेस की स्टार चुनाव प्रचारक हैं। प्रियंका के पास पूर्वी उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी है। इससे पहले तक प्रियंका गांधी वाड्रा सक्रिय राजनीति में नहीं आई थीं। हालांकि, साल 2009 से ही प्रियंका गांधी अपने भाई राहुल गांधी और मां सोनिया गांधी के चुनाव प्रचार एवं रैलियों में हिस्सा लेती आई थीं।

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प्रियंका गांधी ने साल 1999 में 'बीबीसी' को दिए अपने एक इंटरव्यू में कहा था- 'मेरे दिमाग में यह विचार एकदम साफ है कि मैं राजनीति में नहीं आऊंगी।' इसके बाद भी कई मौकों पर चाहे वह  2014 का लोकसभा चुनाव हो या फिर 2017 यूपी विधानसभा चुनाव, प्रियंका हर बार सक्रिय राजनीति से दूरी बनाने की बात कहती आईं। लेकिन 23 जनवरी 2019 के दिन प्रियंका का सक्रिय राजनीति में प्रवेश हो ही गया और उन्हें पार्टी की तरफ से पूर्वी यूपी की कमान सौंपी गईं। आइए प्रियंका गांधी की पारिवारिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि पर एक नजर डालते हैं..
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16 साल की उम्र में दिया था पहला राजनीतिक भाषण
प्रियंका गांधी ने अपना पहला राजनीतिक भाषण 16-17 साल की उम्र में दिया था। वह बचपन में भारत की आजादी से संबंधित किताबें पढ़ती थीं। बचपन में प्रियंका गांधी को हिंदी कहानियां और कविताएं पढ़ने में रुचि थी। प्रियंका के बारे में कहा जाता है कि किताबें पढ़ने की उनकी यह रुचि आज भी बरकरार है।

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प्रियंका गांधी ने साल 2009 में कांग्रेस के लिए अमेठी में चुनाव प्रचार किया था। 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के लिए अमेठी और रायबरेली में चुनाव प्रचार किया। 2012 के विधानसभा चुनाव में प्रियंका गांधी कांग्रेस की स्टार कैंपेनर थीं।


13 साल की उम्र में पहली बार रॉबर्ट वाड्रा से मिली थीं प्रियंका
प्रियंका की पढ़ाई दिल्ली के मॉडर्न स्कूल से हुई। इसके बाद उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के जीसस एंड मैरी स्कूल से साइकॉलोजी में डिग्री ली। प्रियंका, रॉबर्ट वाड्रा से 13 साल की उम्र में मिली थीं। सोनिया गांधी रॉबर्ट वाड्रा से प्रियंका की शादी के विरोध में थीं लेकिन दादी इंदिरा गांधी की तरह प्रियंका भी अपने प्यार के लिए अड़ गईं और आखिरकार सोनिया गांधी मान गईं। 8 फरवरी 1997 को प्रियंका गांधी और रॉबर्ट वाड्रा की शादी हुई जो कि काफी लो-प्रोफाइल रखी गई थी। इस शादी में बेहद कम मेहमानों को बुलाया गया जिनमें बच्चन परिवार भी शामिल था।

 

Lok Sabha election 2019: Priyanka Gandhi profile congress general election
priyanka gandhi - फोटो : पीटीआई
प्रियंका के एक धमाकेदार भाषण की वजह से बदल गई थी सियासत
20 साल पहले प्रियंका गांधी के एक धमाकेदार भाषण की वजह से सियासत बदल गई थी। यह साल 1999 की बात है। प्रियंका उस वक्त महज 27 साल की थीं और केंद्र में तब भारतीय जनता पार्टी की गठबंधन सरकार थी। प्रियंका रायबरेली में अपने पारिवारिक मित्र और कांग्रेस प्रत्याशी कैप्टन सतीश शर्मा के लिए प्रचार कर रहीं थीं। भारतीय जनता पार्टी ने प्रत्याशी के तौर पर मैदान में राजीव गांधी के चचेरे भाई अरुण नेहरू को उतारा था। अरुण नेहरू ने 1980 के दशक में हुए बोफोर्स विवाद के बाद वीपी सिंह के जन मोर्चा के लिए पार्टी छोड़ दी थी। 

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भारतीय जनता पार्टी को पूरा विश्वास था कि अरुण नेहरू, सतीश शर्मा को पटखनी देकर चुनाव जीत ले जाएंगे। पूरा माहौल भी बन चुका था। इसके पीछे एक वजह यह भी थी कि अरुण नेहरू पहले भी रायबरेली से चुनाव जीत चुके थे। लेकिन प्रियंका ने भीड़ के सामने बस एक ही वाक्य कहा और रायबरेली की पूरी राजनीति बदल गई। प्रियंका ने लोगों से कहा-

''क्या आप उस व्यक्ति के लिए वोट करेंगे जिसने मेरे पिता की पीठ में छुरा भोंका था।''


प्रियंका गांधी की इस लाइन ने रायबरेली के पूरे राजनीतिक समीकरण को बदल के रख दिया था और इसकी बदौलत सतीश शर्मा के सिर पर जीत का मुकुट सज गया। उनके इस भाषण की खूब चर्चा हुई और दिल्ली तक बात पहुंची। प्रियंका गांधी के भाषण के अगले दिन अरुण नेहरू के प्रचार के लिए अटल बिहारी वाजपेयी आए लेकिन नेहरू जीत का स्वाद न चख सके। प्रियंका इस वक्त चुनावी राजनीति में हैं और उन्हें कांग्रेस का तारणहार माना जा रहा है। ऐसे में यह देखना बड़ा दिलचस्प होगा कि वह कैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके गढ़ में घेरती हैं।
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