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राज्य में महिलाओं की सुरक्षा संदेह में

Thu, 01 Nov 2012 05:22 PM IST
जयपुर/इंटरनेट डेस्क
जयपुर/इंटरनेट डेस्क Updated Thu, 01 Nov 2012 05:22 PM IST
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women is not safe in rajasthan

महिला उत्पीड़न से संबंधित आंकड़े राज्य में महिलाओं की सुरक्षा पर प्रश्नचिंह लगाते हैं। घर हो या बाहर महिलाएं कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं। रेप, दहेज उत्पीड़न और अपहरण हर मामले में आंकड़े आसान छूते हैं। आंकड़े के अनुसार महिलाओं पर होने वाले अत्याचार के मामलों में राजस्थान देश में चौथे और उत्तर भारत में दूसरे नंबर पर पहुंच गया है। साल 2011 में महिला उत्पीड़न के 19,888 मामले दर्ज हुए हैं।

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हालत इतनी खराब है कि सप्ताह में दो बहुएं दहेज की बलि चढ़ जाती हैं। महिला उत्पीड़न के मामले में राजधानी जयपुर सबसे आगे है। महिला आयोग के पास ही अप्रैल 2011 से जून 2012 तक उत्पीड़न के 541 मामले जयपुर में दर्ज हुए हैं। इसके बाद 159 मामलों के साथ राज्य में अलवर दूसरे नंबर पर आता है। इसके अतिरिक्त उन मामलों की तो गिनती ही नहीं जो पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हुए हैं। महिलाओं की स्थिति उनके परिवार में ही ठीक नहीं है। आंकड़े बताते है कि पिछले साल 12,218 मामले घरवालों व पति से उत्पीड़न के दर्ज हुए हैं।
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राज्य महिला आयोग के सामने अप्रैल 2011 से जून 2012 तक घरेलू हिंसा के 224 व दहेज के 83 मामले सामने आए हैं। साल 2011 में 514 महिलाओं की दहेज के चलते जान ले ली गई है। इसके अलावा प्रदेश में साल 2011 में 1800 मामले रेप के दर्ज किए जा चुके हैं। यहां तक कि 50 से अधिक आयु की 12 महिलाओं के साथ भी दुराचार के मामले आए हैं। राजधानी में ही जनवरी 2012 से लेकर अब तक रेप के 99 मामले दर्ज किए गए हैं। अपहरण के मामले में भी राज्य पीछे नहीं है। पिछले वर्ष अपहरण के 2,713 मामले दर्ज हुए, जिनमें केवल जयपुर के ही 310 मामले हैं।
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