राजस्थान : श्रीगंगानगर में धरने पर बैठे किसानों से पीएचईडी मंत्री ने की मुलाकात, मांगों पर विचार करने का दिया आश्वासन
किसान आंदोलन से चर्चित हुए घड़साना का किसान राज्य की गहलोत सरकार के खिलाफ उग्र हो उठा है। यहां किसान इंदिरा गांधी नहर परियोजना में चार में से दो समूह पानी की मांग कर रहे हैं, जबकि राज्य सरकार इसके लिए तैयार नहीं है। ऐसे में किसान प्रशासनिक कार्यालय के बाहर धरना दे रहे हैं। रविवार को किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल ने राजस्थान सरकार के जलसंसाधन मंत्री बीडी कल्ला से मुलाकात की थी।
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राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में करीब 250 किसानों ने इंदिरा गांधी नहर से सिंचाई का पानी छोड़ने की मांग को लेकर धरना शुरू कर दिया है। एक अधिकारी ने रविवार को यह जानकारी दी है। बीते शनिवार को घड़साना में सैकड़ों किसानों ने एसडीएम कार्यालय के बाहर जमा होकर परिसर का घेराव किया। उन्होंने कार्यालय में प्रवेश को अवरुद्ध कर दिया जिसके बाद इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल को तैनात किया गया।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि वहां तैनात कुछ अधिकारियों और पुलिसकर्मियों को किसानों ने कुछ देर के लिए कार्यालय के अंदर बंद कर दिया। श्रीगंगानगर के कलेक्टर जाकिर हुसैन ने कहा, स्थिति शांतिपूर्ण है और लगभग 250 किसान इस समय घड़साना में धरने पर बैठे हैं और नहर से सिंचाई के पानी की मांग कर रहे हैं।
वहीं रविवार को किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल ने राजस्थान सरकार के जलसंसाधन मंत्री बीडी कल्ला से मुलाकात की। जिसके बाद मंत्री ने किसानों की मांग पर विचार करने का आश्वासन दिया है। कलेक्टर ने कहा, बातचीत के जरिए मामले को सुलझाने का प्रयास किया जा रहा है।
पुलिस अधीक्षक राजन दुष्यंत ने कहा कि एसडीएम कार्यालय के अंदर और बाहर पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए राजस्थान सशस्त्र बल (आरएसी) की एक बटालियन को भी तैनात किया गया है।
किसानों की नहीं सुनी जा रही थी बातें
कई दिन से किसान खेतों में सिंचाई के लिए पानी दिए जाने की ठोस मांग करने का अनुरोध कर रहे थे। किसानों ने कई बार इस बाबत प्रशासन को घेराव और बंधक बनाने की चेतावनी भी दी थी, लेकिन सरकार पर असर नहीं हो रहा था। शनिवार को किसानों का धर्य टूटने लगा और उन्होंने एसडीएम कार्यालय के बाहर धरना शुरू कर डीएसपी समेत कई पुलिस अधिकारी और प्रशासनिक अधिकारियों को कब्जे में लेकर एक कमरे में बंद कर दिया। हालांकि, कलेक्टर और एसपी के दखल के बाद कब्जे में लिए गए अधिकारियों को रिहा किया गया।
2004 में किसानों का हुआ था उग्र आंदोलन
घड़साना में वर्ष 2004 में भी सिंचाई पानी के लिए उग्र आंदोलन हुआ था। उस वक्त भी किसानों ने सिंचाई के लिए पानी नहीं मिलने पर प्रदर्शन किया था। कई दिनों तक चले प्रदर्शन के बाद प्रशासन को पानी की व्यवस्था करना पड़ा था। एक बार फिर से किसानों के इस प्रदर्शन को देखते हुए सरकारी अधिकारियों की चिंता बढ़ गई है।
पुलिस और किसानों के बीच धक्का मुक्की
शुक्रवार को जिला कलेक्टर और एसपी ने भी घड़साना के किसान नेताओं से बात कर उनसे शांति बनाए रखने की अपील की थी, लेकिन शाम होते-होते यह बेअसर हो गई। किसान नेताओं ने कलेक्टर और एसपी को किसानों की ओर से टकराव की पहल नहीं करने का विश्वास दिलाया था , लेकिन शाम को किसान पुलिसकर्मियों से उलझ गए और धक्का मुक्की की नौबत आ गई ।