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Rajasthan: शेखावत की गहलोत को चुनौती, कहा- ERCP पर मुझसे बहस करें, मैं सिद्ध करूंगा ये राजनीतिक कर रहे
Thu, 24 Aug 2023 10:02 PM IST
उदित दीक्षित
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, करौली
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, करौली
Published by: उदित दीक्षित
Updated Thu, 24 Aug 2023 10:02 PM IST
सार
शेखावत ने कहा कि ईआरसीपी को लेकर हमने दस बार मीटिंग रखीं, लेकिन राजस्थान सरकार के मंत्री किसी बैठक में उपस्थित नहीं हुए। अब प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में ईआरसीपी परियोजना को पुरानी पीकेसी के साथ जोड़कर एक नई परियोजना बनाई है। इससे राजस्थान को 2500 एमसीएम पानी मिलेगा।
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गजेंद्र सिंह शेखावत और अशोक गहलोत
- फोटो : Amar Ujala Digital
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विस्तार
केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ईआरसीपी) पर खुले मंच पर बहस की चुनौती दी है। शेखावत ने कहा कि राजस्थान सरकार ईआरसीपी पर राजनीतिक पाप कर रही है। राष्ट्रीय परियोजना के नाम पर 10 जिलों के प्यासे कंठों पर राजनीति कर रही है।
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ये बातें शेखावत ने गुरुवार को करौली में पत्रकारों से बातचीत में कहीं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री गहलोत जयपुर या राजस्थान में किसी भी जगह खुले मंच पर ईआरसीपी पर मुझसे बहस कर लें। जयपुर में सचिवालय, विधानसभा या अल्बर्ट हॉल के सामने खुला मंच लगा लें। यदि उनकी खुद की इच्छा हो तो खुद आ जाएं, वरना अपने किसी सबसे काबिल मंत्री को भेज दें या अपने सबसे काबिल सचिव को लेकर आ जाएं। मैं खुले मंच पर बहस करने के लिए तैयार हूं। मैं सिद्ध करूंगा कि राजस्थान सरकार ईआरसीपी पर राजनीतिक पाप कर रही है।
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ईआरसीपी की पृष्ठभूमि का जिक्र करते हुए शेखावत ने कहा कि वर्ष 2004 से पहले अटलजी की सरकार ने नदियों को जोड़ने की परियोजना बनाई थी। देश के 31 लिंक्स में से एक पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक मध्यप्रदेश और राजस्थान के बीच चिह्नित हुआ था, लेकिन राजस्थान की असहमति के कारण से उस लिंक को उसी समय स्थगित कर दिया गया था। वर्ष 2016 में वसुंधरा राजे की सरकार ने ईआरसीपी की परिकल्पना की और वर्ष 2017 में वाप्कोस को डिजाइन बनाने के लिए दिया। हालांकि, देश के तय मानक 75 प्रतिशत के बजाय इसे 50 प्रतिशत डिपेंडेबिलिटी पर बनाया, जिसे स्वीकृति नहीं मिली। सीडब्ल्यूसी ने इसे सही करके बनाने के लिए कहा, लेकिन दुर्भाग्य से सरकार बदल गई।
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शेखावत ने कहा कि ईआरसीपी को लेकर हमने दस बार मीटिंग रखीं, लेकिन राजस्थान सरकार के मंत्री किसी बैठक में उपस्थित नहीं हुए। अब प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में ईआरसीपी परियोजना को पुरानी पीकेसी के साथ जोड़कर एक नई परियोजना बनाई है। इससे राजस्थान को 2500 एमसीएम पानी मिलेगा। 40 हजार करोड़ की इस परियोजना में 36 हजार करोड़ केंद्र सरकार देगी, लेकिन राजस्थान सरकार इसे राजनीतिक कारणों से स्वीकृति नहीं दे रही, जबकि मध्यप्रदेश ने इसे मंजूरी दे दी है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अब राजस्थान सरकार नवनेरा-गलवा-बीसलपुर-ईसरदा लिंक परियोजना लेकर आई है। 15 हजार करोड़ से बनने वाले इस लिंक से केवल 521 एमसीएम पानी जयपुर, अजमेर और टोंक शहर को मिलेगा। उन्होंने कहा कि यदि गहलोत साहब की वर्तमान योजना बन जाती है तो जयपुर, टोंक और अजमेर को छोड़कर शेष 10 जिलों को भविष्य में एक बूंद पानी नहीं मिलेगा। शेखावत ने कहा कि राष्ट्रीय परियोजना के नाम पर गहलोत सरकार पूर्वी राजस्थान के 13 में से 10 जिलों के प्यासे कंठों पर राजनीति कर रही है। इन 10 जिलों की कुल मिलाकर 7 लाख एकड़ जमीन की सिंचाई नदी जोड़ो परियोजना से मिलने वाले 2500 एमसीएम पानी से हो सकती है। ये लोग उन प्यासे खेतों और किसानों के भविष्य के साथ राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये 8-10 बच्चों को उकसाकर नारे लगवा रहे हैं। आप देखना कांग्रेस के लिए ईआरसीपी एक आत्मघाती हथियार बनेगा।
राज्य में हो रहा तुष्टिकरण का तांडव
केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि गहलोत सरकार ने राजस्थान को भ्रष्टाचार, रेप व महिलाओं पर अत्याचार, बेरोजगारी और महंगाई में देश में नंबर वन बना दिया है। राजस्थान में अपराधियों का आत्मविश्वास इतना बढ़ गया है कि जनता डरी और सहमी हुई है। तुष्टिकरण का तांडव सबने देखा है। करौली में भगवान राम के जूलुस पर नियोजित रूप से पथराव किया गया। जांच, मुआवजा और जमानत में भेदभाव किया गया। राजस्थान में अलगाववादी ताकतों के हौसले इतने बढ़ गए कि उदयपुर में टेलर कैन्हयालाल की ऐलान करके हत्या कर दी गई।