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Rajasthan: डूंगरपुर में UNICEF की पहल, 'चाइल्ड फ्रेंडली पुलिसिंग सिस्टम' से तेजी से सुलझ रहे बच्चों के मुद्दे

Tue, 03 Jan 2023 12:43 PM IST
रोमा रागिनी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, डूंगरपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, डूंगरपुर Published by: रोमा रागिनी Updated Tue, 03 Jan 2023 12:43 PM IST
सार

यूनिसेफ ने आदिवासी बहुल इलाके में 'चाइल्ड फ्रेंडली पुलिसिंग सिस्टम' बनाने की पहल की है। इसी के तहत ‘वात्सल्य वार्ता’ कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस कार्यक्रम के तहत बाल मजदूरी में कमी आई है।

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UNICEF initiative in Dungarpur working on Child friendly policing system
बच्चों के लिए यूनिसेफ की पहल - फोटो : Social Media

विस्तार

राजस्थान के आदिवासी बहुल इलाकों में भी बच्चों, किशोरों और युवाओं के खिलाफ साइबर क्राइम के मामले बढ़ गए हैं। ऐसे में संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने राजस्थान के डूंगरपुर जिले में बच्चों के मुद्दे सुलझाने के लिए एक अच्छी पहल की है। यूनिसेफ 'चाइल्ड फ्रेंडली पुलिसिंग सिस्टम' यानि बाल-अनुकूल पुलिस प्रणाली बनाने के लिए पुलिस के साथ मिलकर काम कर रहा है। इससे बच्चों के मुद्दे सुलझाने में तेजी आई है।

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पुलिस अधिकारियों को बच्चों और महिलाओं के मुद्दों को सही ढंग से सुलझाने का उचित प्रशिक्षण दिया गया है। अगर कोई महिला या बच्चा शिकायत लेकर पहुंचता है तो पुलिस अधिकारी उन्हें शिकायत कक्ष ले जाते हैं, जहां उन्हें बाल कल्याण पुलिस अधिकारी उनकी समस्या सुनते हैं और मदद का आश्वासन देते हैं।

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15 साल की किशोरी ने मांगी पुलिस से मदद
डूंगरपुर की 15 साल की शारदा अपने पिता के साथ साइबर क्राइम की शिकायत दर्ज कराने पुलिस स्टेशन पहुंची थी। शारदा ने बताया कि 'किसी ने मेरा मोबाइल नंबर अपने फेसबुक पेज पर डाल दिया है। जिसके बाद मुझे अज्ञात नम्बरों से मैसेज आ रहे हैं। शारदा ने पुलिस से मदद मांगी और पेज को ब्लॉक करने में मदद मांगी।
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पुलिस स्टेशन के एसएचओ अनिल कुमार बिश्नोई बताते हैं कि फोन और इंटरनेट सबके पास पहुंच गया है। ऐसे में उदयपुर केआदिवासी बहुल ब्लॉक में भी लगातार साइबर अपराध के मामले सामने आने लगे हैं। अनिल आगे बताते हैं कि हमारे यहां एक साइबर विशेषज्ञ है, जो छोटी समस्याओं को निपटाता है लेकिन संभावना है कि इस तरह के मामले को हम साइबर क्राइम प्रकोष्ठ भेजेंगे और वे जल्द ही पेज ब्लॉक करके उस व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।

बच्चों के मुद्दे पर कैसे काम करती है पुलिस
भारत स्थित यूनीसेफ कार्यालय की मदद से शुरू की गई ‘चाइल्ड फ्रेंडली पुलिसिंग सिस्टम’ यानि बाल-अनुकूल पुलिस प्रणाली के तहत पुलिस कर्मियों को नियमित रूप से प्रशिक्षण दिया जाता है।


बच्चों से की जाती है चर्चा

फिर प्रशिक्षित पुलिसकर्मी चयनित सुरक्षा सखियों (सुरक्षा मित्रों) और ग्राम रक्षकों जैसे स्वयंसेवक समूहों के माध्यम से समुदायों के साथ सीधा संपर्क बनाए रखते हैं। जिनके साथ पुलिस नियमित बैठक करती है। इन बैठकों में बच्चों के मुद्दे उठाए जाते हैं। इस कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा ‘वात्सल्य वार्ता’ (बच्चों की चर्चा) है, जिसमें वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, स्कूल या समुदाय में, बच्चों के साथ जीवन्त चर्चा आयोजित करते हैं।


पांच हजार लड़कियों को थानों का करवाया गया दौरा

यूनिसेफ के इस कदम से पुलिस और समुदाय के बीच की खाई को पाटने और उनके प्रति विश्वास पैदा करने में काफी मदद मिलती है। इस पहल को मजबूत करने के लिए, पांच हजार से अधिक लड़कियों को जिले के विभिन्न थानों के दौरे के लिए भी ले जाया गया है।

उदयपुर के पुलिस अधीक्षक सुधीर जोशी बताते हैं कि बच्चे खुलकर, पुलिस संबंधित मुद्दे उठाते हैं, जिनपर त्वरित कार्रवाई की जाती है। हम बच्चों की मदद करने की पूरी कोशिश करते हैं, भले ही वो क्षेत्र हमारे दायरे में न आता हो। सुधीर जोशी बताते हैं कि हाल ही में, जब हमारी ‘वात्सल्य वार्ता’ में बिजली की कमी से बच्चों की परीक्षा की तैयारी पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने का मुद्दा सामने आया तो हमने बिजली आपूर्ति कार्यालय में जाकर इस समस्या को सुलझाने की कोशिश की। 


बाल मजदूरी में भी आई कमी
उनके अनुसार बाल-अनुकूल पुलिस प्रणाली की एक बड़ी उपलब्धि यह रही है कि बाल मजदूरी के लिए, पड़ोसी राज्य जाकर काम करने वाले बच्चों की संख्या में भारी कमी आई है। खासतौर पर पुलिस ने बालश्रम के लिए पलायन रोकने के लिए विशेष चौकियां बनाई हैं।

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