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Rajasthan: पूजा-अर्चना के बाद खोले गए बीसलपुर बांध के दो गेट, 3 से 4 हजार क्यूसेक पानी की जा रही निकासी
Fri, 26 Aug 2022 10:17 AM IST
वीरेंद्र शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: वीरेंद्र शर्मा
Updated Fri, 26 Aug 2022 10:17 AM IST
सार
बीसलपुर बांध से एक करोड़ से ज्यादा लोगों की पेयजल व्यवस्था की जाती है। पानी की कुल भराव क्षमता 315.50 मीटर तक पहुंचने पर अधिकारियों ने बांध के गेट खोले है।
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बीसलपुर बांध के गेट खोले जाने के बाद दिखा ऐसा नजारा
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
राजस्थान की राजधानी जयपुर समेत टोंक और अजमेर जिलों के एक करोड़ से ज्यादा लोगों की प्यास बुझाने वाले बीसलपुर बांध के शुक्रवार को दो गेट खोले गए है। यह बांध अभी तक छठवीं बार पूरा भरा है। इससे पहले बांध के गेटों को साल 2004, 2006, 2014, 2016 और 2019 में खोलना पड़ा था।
देर रात बांध पानी की कुल भराव क्षमता 315.50 मीटर तक पहुंचने पर परियोजना के अधिकारियों ने उच्च अधिकारियों से वार्ता कर गेट खोलने का निर्णय लिया। शुक्रवार सुबह जिला कलेक्टर चिन्मय गोपाल, एडीएम प्रभाती लाल जाट, बांध परियोजना के अधीक्षण अभियंता वीएस सागर और अन्य अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंची। बांध खोलने से पहले पूजा-अर्चना की गई। खोले गए बांध के दो गेट से 3 से 4 हजार क्यूसेक पानी की निकासी शुरू की गई है।
ग्रामीणों को किया गया अलर्ट
बांध के गेट खोलने से पहले जिला प्रशासन की तरफ से आस-पास के गांवों के लोगों को भी अलर्ट किया गया। साथ ही पुलिस और प्रशासन की तरफ से हर स्थिति से निपटने के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए है। अधिकारियों का कहना है कि बांध भरने से राजधानी जयपुर, अजमेर और टोंक जिले के लोगों को पेयजल समस्या का सामना नहीं करना होगा। साथ ही किसान खेतों में पानी से सिंचाई कर सकेंगे। बीसलपुर बांध भरने से 3 जिलाें के 1800 गांवों काे डेढ़ साल तक सप्लाई करने के लिए पानी इक्ट्ठा हो गया है। बीसलपुर बांध से तीन जिलों मेंं रोजाना करीब एक करोड़ लोगों के घरों में पेयजल की सप्लाई होती है।
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गुरुवार को 315.41 आरएल तक पहुंचा था पानी
गुरुवार को बीसलपुर बांध का जलस्तर 315.41 आरएल मीटर पर पहुंच गया। देर रात पानी भराव की क्षमता 315.50 मीटर तक जा पहुंची। बांध छलकने की स्थिति में आने के बाद फसलों की सिंचाई के लिए नहरों में पानी छोड़ा गया है। इससे जिले के करीब तीन लाख किसानों की 2 लाख हेक्टेयर जमीन सिंचित होगी।
बीसलपुर बांध का निर्माण अरावली पर्वतमाला की श्रृंखलाओं के बीच किया गया
बीसलपुर बांध का निर्माण बीसलपुर गांव के पास अरावली पर्वतमाला की श्रृंखलाओं के बीच बनास, खारी व डाई नदियों के संगम पर किया गया है। बांध का शिलान्यास 25 जनवरी 1985 को तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवचरण माथुर ने किया था। 1987 में शुरू हुआ बांध के निर्माण कार्य 1996 में पूरा हुआ था। जिसमें करीब 300 करोड़ रुपये की लागत आई। इसमें कुल जलभराव क्षेत्र में 21 हजार 300 हेक्टेयर भूमि है।
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देर रात बांध पानी की कुल भराव क्षमता 315.50 मीटर तक पहुंचने पर परियोजना के अधिकारियों ने उच्च अधिकारियों से वार्ता कर गेट खोलने का निर्णय लिया। शुक्रवार सुबह जिला कलेक्टर चिन्मय गोपाल, एडीएम प्रभाती लाल जाट, बांध परियोजना के अधीक्षण अभियंता वीएस सागर और अन्य अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंची। बांध खोलने से पहले पूजा-अर्चना की गई। खोले गए बांध के दो गेट से 3 से 4 हजार क्यूसेक पानी की निकासी शुरू की गई है।
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ग्रामीणों को किया गया अलर्ट
बांध के गेट खोलने से पहले जिला प्रशासन की तरफ से आस-पास के गांवों के लोगों को भी अलर्ट किया गया। साथ ही पुलिस और प्रशासन की तरफ से हर स्थिति से निपटने के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए है। अधिकारियों का कहना है कि बांध भरने से राजधानी जयपुर, अजमेर और टोंक जिले के लोगों को पेयजल समस्या का सामना नहीं करना होगा। साथ ही किसान खेतों में पानी से सिंचाई कर सकेंगे। बीसलपुर बांध भरने से 3 जिलाें के 1800 गांवों काे डेढ़ साल तक सप्लाई करने के लिए पानी इक्ट्ठा हो गया है। बीसलपुर बांध से तीन जिलों मेंं रोजाना करीब एक करोड़ लोगों के घरों में पेयजल की सप्लाई होती है।
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गुरुवार को 315.41 आरएल तक पहुंचा था पानी
गुरुवार को बीसलपुर बांध का जलस्तर 315.41 आरएल मीटर पर पहुंच गया। देर रात पानी भराव की क्षमता 315.50 मीटर तक जा पहुंची। बांध छलकने की स्थिति में आने के बाद फसलों की सिंचाई के लिए नहरों में पानी छोड़ा गया है। इससे जिले के करीब तीन लाख किसानों की 2 लाख हेक्टेयर जमीन सिंचित होगी।
बीसलपुर बांध का निर्माण अरावली पर्वतमाला की श्रृंखलाओं के बीच किया गया
बीसलपुर बांध का निर्माण बीसलपुर गांव के पास अरावली पर्वतमाला की श्रृंखलाओं के बीच बनास, खारी व डाई नदियों के संगम पर किया गया है। बांध का शिलान्यास 25 जनवरी 1985 को तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवचरण माथुर ने किया था। 1987 में शुरू हुआ बांध के निर्माण कार्य 1996 में पूरा हुआ था। जिसमें करीब 300 करोड़ रुपये की लागत आई। इसमें कुल जलभराव क्षेत्र में 21 हजार 300 हेक्टेयर भूमि है।