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श्रीमद्भागवत कथा: श्रीकृष्ण की लीलाओं का चैतन्य महाराज ने किया वर्णन, बोले- जो गौभक्त नहीं वह सौभाग्यशाली नहीं
Fri, 17 Feb 2023 11:25 AM IST
अर्पित याज्ञनिक
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, राजस्थान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, राजस्थान
Published by: अर्पित याज्ञनिक
Updated Fri, 17 Feb 2023 11:25 AM IST
सार
हनुमानगढ़ में प्रबल महाराज की कुटिया में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन कथा व्यास समर्थ त्रयंबकेश्वर चैतन्य महाराज ने भक्तों को श्री कृष्ण की बाल लीलाओं के प्रसंग सुनाए।
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कथाव्यास समर्थ त्रयंबकेश्वर चैतन्य महाराज
- फोटो : Amar Ujala Digital
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विस्तार
जो मनुष्य गौसेवा में नहीं लगा हो वह भले ही कितना भी बड़ा, कितना भी धनवान हो यदि वह गौभक्त नहीं है तो वह सौभाग्यशाली नहीं हो सकता। यह बात गुरुवार को प्रबल महाराज की कुटिया में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन कथाव्यास पूज्य समर्थ त्रयंबकेश्वर चैतन्य जी महाराज ने कही। आज के समय में वस्तु महत्वपूर्ण बन गई है। वो मूर्ख है जो वस्तु के लालच में पारिवारिक संबंध बिगाड़ लेता है।
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कथा व्यास समर्थ त्रयंबकेश्वर चैतन्य जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, सकटासुर, माखन चोरी, पूतना वध, गौचारण लीला व कंस वध के प्रसंग सुनाए। वहीं, काशी की दिव्य आरती व भगवान यज्ञ नारायण की परिक्रमा करके श्रद्धालुओं ने अपने जीवन को सफल बनाया। देर शाम को भजन संध्या का आयोजन हुआ, जिसमें श्रद्धालुगण ईश्वर की आराधना में लीन हो गए। इससे पहले तरूण तपस्वी डॉ. गुणप्रकाश चैतन्य जी महाराज ने 44 वर्ष बाद यज्ञ सम्राट प्रबल जी महाराज की पावन धरा पर हो रहे 100 कुंडीय श्री पंचदेव महायज्ञ के सफल आयोजन पर सहयोगियों व इलाका वासियों को शुभाशीष दिया।
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प्रबल महाराज की कुटिया में चल रही श्रीमद्भागवत कथा
- फोटो : Amar Ujala Digital
सवा लाख पार्थिवेश्वर महादेव का रुद्राभिषेक कल
महाशिवरात्रि महोत्सव के तहत 18 फरवरी को धर्मसंघ संस्कृत महाविद्यालय एवं आयुर्वेद रसायनशाला परिसर में सुबह सात बजे से मिट्टी के सवा लाख शिवलिंग बनाए जाएंगे। इसके बाद समस्त भक्तों के द्वारा शास्त्रीय व वैदिक परम्परा से महाशिवरात्रि की बेला पर रात्रि के चारों प्रहर के अलग-अलग अभिषेक व पूजन अलग-अलग पदार्थों से किया जाएगा। इसमें लाखों की संख्या में भक्तगण भगवान भोलेनाथ का अर्चन करके पुण्य अर्जन करेंगे।
महायज्ञ की पूर्णाहुति और भंडारा आज
सात दिवसीय श्रीमद भागवत कथा व 100 कुंडीय श्री पंचदेव महायज्ञ का समापन शुक्रवार को होगा। आयोजन समिति के सदस्य मांगीलाल महिपाल ने बताया कि सातवें दिवस को सर्वप्रथम 111 यजमानों द्वारा नित्य पूजन किया जाएगा। इसके बाद 1100 कन्याओं, 108 बटुकों तथा 108 सौभाग्यवती माताओं का पूजन किया जाएगा। आखिरी दिवस भगवान श्रीकृष्ण-सुदामा सहित विभिन्न प्रसंगों के साथ श्रीमद् भागवत कथा के इस दिव्य आयोजन की पूर्णाहुति होगी। शाम छह बजे काशी विश्वनाथ की तर्ज पर हो रही महाआरती का भी विश्राम होगा। साथ ही शाम सात बजे से लाखों भक्तजनों के लिए विशाल भंडारा होगा। इसी बीच 11 दिवसीय कार्यक्रम के सफल आयोजन पर विशिष्ठ सहयोगियों व समस्त कमेटियों के कार्यकर्ताओं का सम्मान भी किया जाएगा।
महाशिवरात्रि महोत्सव के तहत 18 फरवरी को धर्मसंघ संस्कृत महाविद्यालय एवं आयुर्वेद रसायनशाला परिसर में सुबह सात बजे से मिट्टी के सवा लाख शिवलिंग बनाए जाएंगे। इसके बाद समस्त भक्तों के द्वारा शास्त्रीय व वैदिक परम्परा से महाशिवरात्रि की बेला पर रात्रि के चारों प्रहर के अलग-अलग अभिषेक व पूजन अलग-अलग पदार्थों से किया जाएगा। इसमें लाखों की संख्या में भक्तगण भगवान भोलेनाथ का अर्चन करके पुण्य अर्जन करेंगे।
महायज्ञ की पूर्णाहुति और भंडारा आज
सात दिवसीय श्रीमद भागवत कथा व 100 कुंडीय श्री पंचदेव महायज्ञ का समापन शुक्रवार को होगा। आयोजन समिति के सदस्य मांगीलाल महिपाल ने बताया कि सातवें दिवस को सर्वप्रथम 111 यजमानों द्वारा नित्य पूजन किया जाएगा। इसके बाद 1100 कन्याओं, 108 बटुकों तथा 108 सौभाग्यवती माताओं का पूजन किया जाएगा। आखिरी दिवस भगवान श्रीकृष्ण-सुदामा सहित विभिन्न प्रसंगों के साथ श्रीमद् भागवत कथा के इस दिव्य आयोजन की पूर्णाहुति होगी। शाम छह बजे काशी विश्वनाथ की तर्ज पर हो रही महाआरती का भी विश्राम होगा। साथ ही शाम सात बजे से लाखों भक्तजनों के लिए विशाल भंडारा होगा। इसी बीच 11 दिवसीय कार्यक्रम के सफल आयोजन पर विशिष्ठ सहयोगियों व समस्त कमेटियों के कार्यकर्ताओं का सम्मान भी किया जाएगा।