Rajasthan: ट्रेजरी खत्म करने वाले विधेयक पर राज्यपाल ने मांगा जवाब, विधानसभा में जाने से पहले ही उपजा विवाद
प्रदेश में ट्रेजरी सिस्टम को खत्म करने के लिए विधानसभा के बजट सत्र में लाए जा रहे 'राजस्थान अकाउंटिंग सिस्टम अमेंडमेंट बिल-2023' को लेकर विवाद गहरा गया है। अब राज्यपाल कलराज मिश्र ने इस मामले में सरकार को पत्र लिखकर स्पष्टीकरण मांग लिया है।
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राज्यपाल से पहले सीएजी भी दो बार राज्य सरकार के इस कदम को लेकर आपत्ति जता चुके हैं। राजस्थान राजभवन ने 14 फरवरी को सरकार को पत्र लिखकर प्रकाशित खबरों और सीएजी के उस आदेश की जानकारी दी है, जिसमें केंद्र सरकार के डीपीसी एक्ट का हवाला देते हुए राज्य सरकार को कहा गया था कि अकाउंटिंग सिस्टम में बदलाव करना संविधान सम्मत नहीं है। राजस्थान में सरकार के दो मंत्रियों के साथ ही पक्ष और विपक्ष के 80 से ज्यादा विधायकों और कुछ सांसदों ने भी गहलोत सरकार को पत्र लिखकर इस ट्रेजरी सिस्टम को जारी रखने की मांग की है। भाजपा विधायकों का कहना है कि वह इस बिल का पुरजोर विरोध करेंगे और विधानसभा में इस मुद्दे को उठाएंगे।
सरकार से स्थिति स्पष्ट करने को कहा है- सचिव, राज्यपाल
राज्यपाल के सचिव सुबीर कुमार का कहना है कि 'इस मामले में हमने राज्य सरकार को पत्र लिखकर स्थिति स्पष्ट करने के लिए कहा है। अभी तक सरकार की तरफ से कोई जवाब नहीं आया है।'
चेक एंड बैलेंस सिस्टम खत्म हो जाएगा- बीजेपी
उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि 'कांग्रेस सरकार जो नया अकाउंटिंग सिस्टम लाना चाहती है, वह कई खामियों से भरा हुआ है। उससे चेक एंड बैलेंस सिस्टम ही खत्म हो जाएगा। जब सीएजी पहले ही इस पर रोक लगा चुके और ट्रेजरी बंद करने से मना कर चुके हैं, तो सरकार इसे क्यों खत्म करना चाहती है।' बीजेपी विधायक अशोक लाहोटी ने कहा कि 'ट्रेजरी सिस्टम प्रदेश में चेक एंड बैलेंस का काम करता है। बीजेपी से खत्म करने के कदम का विरोध करती है विधानसभा में हम इस मुद्दे को उठाएंगे।'
नए 'पे एंड अकाउंटिंग' सिस्टम पर सीएजी ने पहले लगाई थी रोक
राज्य सरकार के करीब 8.50 लाख रिटायर्ड कर्मचारियों की पेंशन और 93 लाख सामाजिक सुरक्षा पेंशनर्स का भुगतान इन्हीं ट्रेजरी ऑफिसों से होता है। अलग-अलग सरकारी डिपोर्टमेंट्स की ओर से भेजे गए बिलों का वेरिफिकेशन करने के बाद फाइनल पेमेंट का प्रोसेस भी इन्हीं ट्रेजरी ऑफिसेज के जरिए ही होता है। फाइनेंस डिपार्टमेंट लेवल पर पहले भी ट्रेजरी और सब ट्रेजरी सिस्टम को खत्म कर नया 'पे एंड अकाउंटिंग' सिस्टम लाया गया था, लेकिन सीएजी ने उस पर रोक लगा दी थी। साथ ही कहा था कि यह सिस्टम संविधान के डीपीसी एक्ट 1971 के प्रोविजन के खिलाफ है।
राजस्थान अकाउंटिंग सिस्टम अमेंडमेंट बिल 2023 का विरोध क्यों ?
राजस्थान अकाउंटिंग सिस्टम अमेंडमेंट बिल 2023 का विरोध तीन लेवल पर हो रहा है।
पहला- 3000 से ज्यादा अकाउंटिंग सर्विस के कर्मचारी ट्रेजरी और सब ट्रेजरी में प्रदेशभर में काम करते हैं, ये ट्रेजरी तहसील स्तर तक खुली हुई हैं। अगर ये ट्रेजरी बंद हो गईं, तो उनके ऑफिस बंद हो जाएंगे। ऐसे में कर्मचारियों को अपने भविष्य पर खतरा मंडराता नजर आ रहा है।
दूसरा- ऐसे सरकारी रिटायर्ड पेंशनर्स और सोशल सिक्योरिटी योजनाओं के पेंशनर्स जिन्हें ट्रेजरी से भुगतान मिलता है। अगर उन्हें पेमेंट संबंधित कोई समस्या आती है, तो ट्रेजरी, सब ट्रेजरी ऑफिस से फिलहाल लोकल लेवल पर ही सॉल्यूशन मिल जाता है। अगर ये ट्रेजरी बंद हो जाएंगी, तो उन्हें प्रदेशभर से किसी भी परेशानी के लिए सीधा जयपुर आना पड़ेगा।
तीसरा- मंत्री, विधायक और सांसद सहित जनप्रतिनिधियों के लिए भी यह मुद्दा वोट से जुड़ा हुआ बड़ा मामला है। अगर ट्रेजरी बंद होती हैं, तो स्थानीय स्तर पर उन्हें इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है। हर बड़े बुजुर्ग पेंशनर्स की परेशानी उसके पूरे परिवार की परेशानी बन जाती है। इसलिए इसका पेंशनर्स की संख्या के मुकाबले कई गुणा ज़्यादा लोगों में नाराजगी हो सकती है।