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राजस्थान: टेराकोटा कलाकार चंद्रशेखर सेन को मिलेगा राष्ट्रीय अकादमी पुरस्कार, ‘माइ एंटायर वर्ल्ड’ के लिए सम्मान
Mon, 28 Sep 2026 06:19 PM IST
प्रतीक पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: प्रतीक पांडेय
Updated Mon, 28 Sep 2026 06:19 PM IST
सार
राजस्थान के टेराकोटा एवं दृश्य कलाकार चंद्रशेखर सेन को 65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी, 2026 के राष्ट्रीय अकादमी पुरस्कार के लिए चुना गया है। उन्हें ‘माइ एंटायर वर्ल्ड-I’ टेराकोटा शिल्प के लिए यह सम्मान मिलेगा।
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कलाकार चंद्रशेखर सेन
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
ललित कला अकादमी ने 65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी, 2026 के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय अकादमी पुरस्कार के लिए राजस्थान के टेराकोटा एवं दृश्य कलाकार चंद्रशेखर सेन को चुना है। चंद्रशेखर सेन को उनके उत्कृष्ट टेराकोटा शिल्प ‘माइ एंटायर वर्ल्ड-I’ के लिए इस सम्मान हेतु चयनित किया गया है। इस वर्ष पुरस्कार प्राप्त करने वाले प्रतिष्ठित कलाकारों की सूची में वे राजस्थान के एकमात्र कलाकार हैं।
राजस्थान की लोक परंपराओं से मिलती है प्रेरणा
चंद्रशेखर सेन प्राथमिक रूप से टेराकोटा कला के माध्यम से अपनी रचनाएं बनाते हैं। अपनी कलाकृतियों के सृजन के लिए वे राजस्थान की समृद्ध लोक परंपराओं तथा पुरातात्विक धरोहरों से निरंतर प्रेरणा लेते हैं। उनके शिल्प में कालीबंगा और मोलेला जैसी प्रसिद्ध पुरातात्विक व लोक कला शैलियों का व्यापक प्रभाव नजर आता है।
प्रकृति और जैविक रूपों को देते हैं कलात्मक पहचान
उनकी कलाकृतियां मुख्य रूप से प्रकृति, स्मृतियों, जैविक आकारों, पक्षियों, पशुओं, बीजों तथा वृक्षों जैसे विभिन्न प्राकृतिक विषयों को अन्वेषित करती हैं। वे अपने शिल्पों के माध्यम से इन जैविक रूपों और प्राकृतिक तत्वों को कलात्मक पहचान देते हैं।
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2014 में मिल चुका है राज्य कला पुरस्कार
कला के क्षेत्र में उनके विशिष्ट कलात्मक योगदान के लिए उन्हें वर्ष 2014 में राजस्थान ललित कला अकादमी राज्य कला पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। वे अब तक देशभर के विभिन्न हिस्सों में 10 से अधिक एकल कला प्रदर्शनियों का आयोजन कर चुके हैं। इसके अतिरिक्त, उन्होंने ललित कला अकादमी की राष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनियों में भी सक्रिय रूप से हिस्सा लिया है।
स्पेन में भी प्रदर्शित कर चुके हैं अपनी कला
चंद्रशेखर सेन ने भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के माध्यम से स्पेन के वलाडोलिड शहर में स्थित कासा दे ला इंडिया में अपनी कला का प्रदर्शन किया था। इस दौरान उन्होंने वहां व्याख्यान भी दिया था। राष्ट्रीय अकादमी पुरस्कार के लिए चयन उनके टेराकोटा शिल्प और कला के क्षेत्र में योगदान को मिला एक और महत्वपूर्ण सम्मान है।
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राजस्थान की लोक परंपराओं से मिलती है प्रेरणा
चंद्रशेखर सेन प्राथमिक रूप से टेराकोटा कला के माध्यम से अपनी रचनाएं बनाते हैं। अपनी कलाकृतियों के सृजन के लिए वे राजस्थान की समृद्ध लोक परंपराओं तथा पुरातात्विक धरोहरों से निरंतर प्रेरणा लेते हैं। उनके शिल्प में कालीबंगा और मोलेला जैसी प्रसिद्ध पुरातात्विक व लोक कला शैलियों का व्यापक प्रभाव नजर आता है।
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प्रकृति और जैविक रूपों को देते हैं कलात्मक पहचान
उनकी कलाकृतियां मुख्य रूप से प्रकृति, स्मृतियों, जैविक आकारों, पक्षियों, पशुओं, बीजों तथा वृक्षों जैसे विभिन्न प्राकृतिक विषयों को अन्वेषित करती हैं। वे अपने शिल्पों के माध्यम से इन जैविक रूपों और प्राकृतिक तत्वों को कलात्मक पहचान देते हैं।
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2014 में मिल चुका है राज्य कला पुरस्कार
कला के क्षेत्र में उनके विशिष्ट कलात्मक योगदान के लिए उन्हें वर्ष 2014 में राजस्थान ललित कला अकादमी राज्य कला पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। वे अब तक देशभर के विभिन्न हिस्सों में 10 से अधिक एकल कला प्रदर्शनियों का आयोजन कर चुके हैं। इसके अतिरिक्त, उन्होंने ललित कला अकादमी की राष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनियों में भी सक्रिय रूप से हिस्सा लिया है।
स्पेन में भी प्रदर्शित कर चुके हैं अपनी कला
चंद्रशेखर सेन ने भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के माध्यम से स्पेन के वलाडोलिड शहर में स्थित कासा दे ला इंडिया में अपनी कला का प्रदर्शन किया था। इस दौरान उन्होंने वहां व्याख्यान भी दिया था। राष्ट्रीय अकादमी पुरस्कार के लिए चयन उनके टेराकोटा शिल्प और कला के क्षेत्र में योगदान को मिला एक और महत्वपूर्ण सम्मान है।