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स्वतंत्रता दिवसः पाकिस्तान को भी झुका दिया सरहद पर माता के इस मंदिर ने

Tue, 15 Aug 2017 12:23 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर Updated Tue, 15 Aug 2017 12:23 PM IST
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Tanot Mata is a big special, 3000 bombs were useless
तनोट माता मंदिर - फोटो : अमर उजाला
भारत-पाक सीमा पर माता का एक मंदिर एेसा है, जिसकी शक्ति ने पाकिस्तान तक तो झुका दिया। माता की शक्ति देखनी हो, तो आप राजस्थान से लगती भारत-पाक सीमा पर स्थित तनोट माता मंदिर आइए। यह एक एेसा शक्ति स्थल है, जहां वर्ष 1965 में पाकिस्तान ने मंदिर और उसके आस-पास 3000 से अधिक बम बरसाए थे। लेकिन मंदिर का कुछ भी नहीं बिगाड़ सके। पाकिस्तानी तोपों के ये बम मंदिर और उसके आस-पास फुस्स साबित हुए।

माता के चमत्कार की ये अकेली मिसाल नहीं है। दिसंबर 1971 की रात को माता ने फिर भारतीय सेना की रक्षा की। इस रात को पंजाब रेजीमेंट और सीमा सुरक्षा बल कि एक कंपनी ने लोंगेवाला में पाकिस्तान की सेना को बुरी तरह खदेड़ दिया।

आप यहां के म्यूजियम में देख सकते हैं पाक के फुस्स बम

Tanot Mata is a big special, 3000 bombs were useless
मंदिर के म्यूजियम में रखे बम - फोटो : अमर उजाला
जैसलमेर से करीब 130 किलोमीटर दूर भारत-पाक सीमा पर 1200 साल पुराने इस मंदिर पर इस लड़ाई के दौरान करीब साढ़े चार सौ बम फट तक नहीं पाए। इन बमों को अब मंदिर परिसर में स्थित एक म्यूजियम में रखा गया है।

पाकिस्तान से जीत के बाद बनवाया था विजय स्तंभ

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मंदिर पर लगी तख्ती - फोटो : अमर उजाला
लोंगेवाला में पाकिस्तान टैंक रेजीमेंट को सबक सिखाने के साथ ही टैंकों को तहस नहस कर दिया। लोंगेवाला पोस्ट तनोट माता के मंदिर से नजदीक है। इस जीत के बाद भारतीय सेना ने मंदिर में एक विजय स्तंभ बनाया, जहां हर साल शहीद सैनिकों के याद में उत्सव आयोजित किया जाता है। इस मंदिर का जिम्मा सीमा सुरक्षा बल ने ले लिया है। मंदिर परिसर में लगे पट्ट पर पूरी कहानी लिखी गई है।
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तनोट माता के आवड माता व हिंगलाज माता भी हैं नाम

Tanot Mata is a big special, 3000 bombs were useless
तनोट माता मंदिर - फोटो : अमर उजाला
दरअसल तनोट माता यह हिंगलाज माता का ही एक रूप है। इन्हें आवड माता के नाम से भी जाना जाता है। हिंगलाज माता का शक्तिपीठ पाकिस्तान के बलूचिस्तान में है। इन माता से एक कहानी भी जुड़ी है। कहा जाता है कि एक समय एक चारण थे, उनका नाम था मामडिया। उन्होंने संतान के लिए माता के सात बार पैदल यात्रा की। स्वप्न में माता ने उनसे ईच्छा पूछी, तो उन्होंने कहा कि माता आप मेरे यहां जन्म लें। इसके बाद चारण के घर सात बेटी और एक बेटे ने जन्म लिया।
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दैवीय चमत्कारों से पुराना नाता है इस मंदिर का

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तनोट माता मंदिर - फोटो : अमर उजाला
इन सात बेटियों में से एक थी आवड। जन्म के बाद उन्होंन कई दैवीय चमत्कार दिखाए। उनमें से एक था हूणों के आक्रमण से माड़ प्रदेश की रक्षा की। माड़ प्रदेश में आवड़ माता की कृपा से भाटी राजपूतों का सुदृढ़ राज्य स्थापित हो गया। राजा तणुराव भाटी ने इस स्थान को अपनी राजधानी बनाया और आवड़ माता को स्वर्ण सिंहासन भेंट किया। विक्रम संवत 828 ईस्वी में आवड़ माता ने अपने भौतिक शरीर के रहते हुए यहां अपनी स्थापना की।
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