Omicron Variant: विशेषज्ञ ने बताए ओमिक्रॉन से बचाव के उपाय, टीके की बूस्टर खुराक की आवश्यकता पर दिया जोर
राजस्थान की राजधानी जयपुर में स्थित सवाई मान सिंह (एसएमएस) मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल और नियंत्रक डॉ. सुधीर भंडारी ने कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट से बचाव के लिए टीके की बूस्टर खुराक पर जोर दिया है।
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जयपुर में स्थित एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. सुधीर भंडारी ने मंगलवार को कोरोना वायरस के नए और अधिक संक्रामक माने जाने ओमिक्रॉन वैरिएंट पर बात की। डॉ. भंडारी ने कहा कि यह वैरिएंट दुनिया के 50 से अधिक देशों के लिए संकट बना हुआ है। हमारे देश में इससे बचाव के लिए कोरोना रोधी टीके की बूस्टर खुराक देने की जरूरत है।
डॉ. सुधीर भंडारी ने कहा कि जिस तरह इस्राइल ने अपने यहां कोरोना वायरस रोधी टीके की बूस्टर खुराक देने की शुरुआत की है वैसे ही कदम हमारे देश में भी उठाने का आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि ओमिक्रॉन वैरिएंट कितना घातक है इस बारे में फिलहाल कुछ भी कहना संभव नहीं है। लेकिन यह तय है कि यह वैरिएंट बहुत तेजी से संक्रमित करता है।
बचाव के लिए मास्क जरूर लगाएं और शारीरिक दूरी के नियम का पालन करें
इसके साथ ही उन्होंने ओमिक्रॉन से बचने के लिए लोगों से सतर्क रहने की और मास्क लगाने व शारीरिक दूरी के नियमों का गंभीरता से पालन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि एक अध्ययन में सामने आया है कि बूस्टर खुराक ओमिक्रॉन वैरिएंट से 90 फीसदी कर सुरक्षा दे सकती है। अभी के लिए उन्होंने सभी से टीके की दोनों खुराकें लेने की अपील की।
रविवार को जयपुर में मिले ओमिक्रॉन संक्रमित सभी नौ मरीजों की हालत ठीक
जयपुर में रविवार को ओमिक्रॉन वैरिएंट से संक्रमण के नौ मामले सामने आए थे। डॉ. भंडारी ने कहा कि सभी मरीजों की स्थिति सामान्य है। इनमें से कुछ एसिम्टोमैटिक (ऐसे मरीज जिनमें बीमारी के लक्षण नहीं दिखते) हैं और बाकी में बीमारी के हल्के लक्षण हैं। सभी मरीजों में कोई खतरे की स्थिति नहीं दिख रही है और सभी सामान्य गति से ठीक हो रहे हैं।
ओमिक्रॉन डेल्टा से अधिक संक्रामक पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी
उधर, वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती संकेत इस ओर इशारा करते हैं कि ओमिक्रॉन वैरिएंट इससे पहले सामने आए डेल्टा के मुकाबले अधिक संक्रामक है। हालांकि, ओमिक्रॉन को लेकर अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। कोरोना का डेल्टा वैरिएंट भारत में इस महामारी की दूसरी और बेहद भयावह लहर का कारण बना था।