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Sirohi News: दो किलो सोना और डायमंड तिलक भगवान आदिनाथ को भक्त ने किया दान, भक्ती देख श्रद्धालु हैरान

Wed, 25 Mar 2026 09:25 AM IST
सिरोही ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सिरोही
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सिरोही Published by: सिरोही ब्यूरो Updated Wed, 25 Mar 2026 09:25 AM IST
सार

Sirohi News: सिरोही के माउंट आबू स्थित देलवाड़ा जैन मंदिर में श्रद्धालुओं ने भगवान आदिनाथ की प्रतिमा पर 2 किलोग्राम स्वर्ण आभूषण, डायमंड तिलक, चक्षु एवं कपाली चढ़ाकर भव्य श्रृंगार किया। धार्मिक अनुष्ठानों के बीच बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और मंदिर जयकारों से गुंजायमान हो उठा।

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2 kilograms of gold jewellery diamond tilak chakshu and kapali were offered at Jain temple in Sirohi
माउंटआबू स्थित देलवाड़ा जैन मंदिर

विस्तार

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आज हम सिरोही जिले के माउंट आबू स्थित अति प्राचीन देलवाड़ा जैन मंदिर के बारे में बता रहे हैं, जहां मंगलवार को श्रद्धालुओं द्वारा 2 किलोग्राम स्वर्ण आभूषण, डायमंड तिलक, चक्षु एवं कपाली चढ़ाए गए। इस दौरान मंदिर परिसर में विभिन्न प्रकार के धार्मिक कार्यक्रम हुए, जिनमें सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।

किया गया भगवान आदिनाथ का श्रृंगार
आचार्य भगवंत भाग्येशसूरी चतुर्विद संघ के साथ ढोल-नगाड़ों के बीच नाचते-गाते मंगलवार को मंदिर पहुंचे। इसके बाद शुभ मुहूर्त में विधि-विधान व पूजा-अर्चना के पश्चात इस प्राचीन तीर्थ में विराजित प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ की प्रतिमा के सिद्धशिखा मस्तक पर दो किलोग्राम स्वर्ण आभूषण, डायमंड जड़ित तिलक, चक्षु एवं कपाली चढ़ाकर आकर्षक श्रृंगार किया गया।

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'जय-जय श्री आदिनाथ' के जयकारों से गुंजायमान हो उठा मंदिर
भगवान के आकर्षक स्वरूप को देखकर मंदिर 'जय-जय श्री आदिनाथ' के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। स्वर्ण आभूषण, चक्षु, तिलक व कपाली धारण करने के बाद परमात्मा की प्रतिमा अत्यंत मनमोहक लगने लगी और दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। आचार्य भगवंत ने श्रद्धालुओं द्वारा भगवान को अर्पित किए गए इस चढ़ावे पर प्रसन्नता जताते हुए कहा कि जैन धर्म में परमात्मा को अर्पण करने की परंपरा आदिकाल से चली आ रही है और आज भी यह परंपरा जारी है। उन्होंने कहा कि जैन धर्म में परमात्मा द्वारा बताए गए मार्ग त्याग, तप, जप, आराधना, दान, परोपकार, अहिंसा, अपरिग्रह, सत्य एवं अचौर्य का पालन कर व्यक्ति मोक्ष प्राप्त कर सकता है।
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जैन धर्म के 5 प्राचीन तीर्थों में से एक है देलवाड़ा मंदिर
गौरतलब है कि जैन धर्म के पांच प्राचीन तीर्थों में एक तीर्थ आबू देलवाड़ा भी है, जिसकी 1000वीं वर्षगांठ आगामी 2031 में मनाई जाएगी। इस तीर्थ का संचालन सिरोही जैन संघ के तत्वावधान में श्री कल्याणजी परमानंदजी पेढ़ी द्वारा किया जाता है। पेढ़ी के नव निर्वाचित अध्यक्ष पंकज गांधी और उपाध्यक्ष सुनील सिंघी ने बताया कि इस तीर्थ का निर्माण प्राचीन काल में भामाशाह तेजपाल और वस्तुपाल धन्नासेठों ने करवाया था। इसकी शिल्पकला विश्वविख्यात और अद्भुत है, जिसे निहारने के लिए पिछले 995 वर्षों में करोड़ों श्रद्धालु यहां पहुंच चुके हैं।

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