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Sikar News: आस्था के साथ खिलवाड़, बाउंसर भक्तों से फूल और पताका छीनकर डस्टबिन में डाला

Mon, 15 May 2023 08:53 PM IST
अरविंद कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीकर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीकर Published by: अरविंद कुमार Updated Mon, 15 May 2023 08:53 PM IST
सार

सीकर जिले के खाटूश्यामजी में आस्था के साथ खिलवाड़ होता हुआ दिखाई पड़ा है। दरअसल, खाटूश्यामजी में मौजूद बाउंसर भक्तों से फूल और पताका छीनकर डस्टबिन में डालते हुए देखा गया है।

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Sikar News bouncer snatched flowers and flags from devotees and threw them dustbin In Khatushyamji
आस्था के साथ खिलवाड़ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सीकर जिले के खाटूश्यामजी में प्रशासन की ओर से मेले के समय लगाई गई धारा-144 का प्रभाव अभी भी जारी नजर आ रहा है। हालांकि, अधिकारी इस बात से मना कर रहे हैं। मगर मौके पर स्थिति सब बयां कर रही है। भक्तों से एंट्री गेट (जिगजैग में प्रवेश) से पहले ही बाबा के लिए चढ़ाए जाने वाले फूलों को प्रशासन के आदेश का हवाला देकर छीनकर डस्टबिन (प्लास्टिक का ड्रम) में डाला जा रहा है। इसके अलावा पैदल यात्रियों द्वारा लाई जा रही पताका को भी मंदिर से दूर रखा जा रहा है। इतना ही नहीं कोई भक्त मंदिर के एंट्री गेट से पताका ले भी आता है तो सुरक्षाकर्मी इसे छीनकर डस्टबिन में डाल देते हैं।

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ऐसे में जब मौके पर जाकर देखा तो यहां भक्तों से जबरदस्ती बाउंसरों द्वारा फूल छीने जा रहे थे। इस दौरान कई बार बाउंसरों को भक्तों की नोंक-झोंक का सामना करना पड़ रहा था।  जब इस बारे में अधिक जानकारी जुटाई तो पता चला कि प्रशासन ने मेले के समय सात फरवरी को एक आदेश निकालकर इस क्षेत्र में धारा-144 लगा दी थी, जिसमें मंदिर में इत्र के अलावा कांटेदार फूलों के प्रवेश पर रोक लगाई थी, जो आदेश अभी तक चल रहा है। 
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डस्टबिन में पदयात्रियों की पताका, 14 किमी दूर से लाते हैं पताका...
मंदिर में रींगस से पैदल आने वाले पदयात्रियों के लिए पताका रखने की भी कोई जगह नहीं है, जिसके चलते पताकाओं को मंदिर से काफी दूर रखवाया जा रहा है। ऐसे में जो भक्त बाबा के चरणों में पताका चढ़ाने के मकसद से पताका लेकर आते हैं वह पूरा नहीं हो पाता। गौरतलब है कि पदयात्री करीब 16 किलोमीटर दूर स्थिर रींगस से पताका लेकर चलते हैं, जिसे वे कंधे पर रखकर मंदिर प्रांगण तक लाते हैं। दूसरी तरफ कोई भक्त पताका मन्दिर परिसर में ले भी आता है तो उसे मंदिर प्रांगण से पहले रखे कचरा पात्रों में डाल दिया जाता है।
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यह है मामला... 
मंदिर में प्रवेश से पहले जिगजैग के पास बाउंसर खड़े रहते हैं। जो जिगजैग में एंट्री से पहले ही रखे प्लास्टिक के कचरा पात्रों में भक्तों से जबरदस्ती फूलों को छीनकर डलवा देते हैं। अगर कोई भक्त पात्र में अपने आस्था के फूल और घर से लगाया प्रसाद नहीं डालता तो उससे नोंक-झोंक की नौबत तक आ जाती है। इसके अलावा भक्तों से पताका भी मंदिर से काफी दूर रखवा ली जाती है। इसके बाद सैकड़ों किलोमीटर दूर से बाबा के दर्शन के लिए पहुंचे भक्त अपने आप को ठगा महसूस करते हैं। 

भक्त आरती ने खाटूश्यामजी में बताया, बाउंसरों ने हाथ से फूल और आरती छीन लिया है। हम दिल्ली से आए हैं। बाबा के लिए गुलाब का फूल लाई थी, मगर बाउंसरों ने इसे मेरे हाथ से छीनकर डस्टबिन में डाल दिया। आरती ने कहा कि मुझे बहुत बुरा लगा। अगर बाबा के चरणों तक फूल पहुंचाने ही नहीं दिए जा रहे हैं तो प्रशासन इनकी बिक्री पर ही पाबन्दी क्यों नहीं लगा देता। 

संतोष सिंह, मैनेजमेंट, खाटूश्यामजी मंदिर ने तर्क देते हुए कहा कि हमने कोई ड्रम नहीं रखे। हालांकि एंट्री गेट पर कचरे के ड्रम जरूर रखे रहते हैं। अगर भक्तों से फूल छीनकर कचरे के ड्रम में डाले जा रहे हैं तो मामले को दिखवा लेता हूं। हम प्रसाद और पताकाओं के लिए जल्द ही मंदिर में स्थान बनवाएंगे।

मोहनदास महाराज, पूर्व अध्यक्ष, खाटूश्याम मंदिर कमेटी कहते हैं कि भक्त अगर फूल खरीदकर उसे बाबा के दरबार में चढ़ाना चाहते तो इसमें कोई गलत नहीं है। अगर भक्तों की आस्था के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है तो यह बहुत ही गलत है। जो भक्त सैकड़ों किमी. से घर का प्रसाद और फूल चढ़ाने के लिए आते हैं वह उनकी बाबा के प्रति आस्था है।


प्रतिभा वर्मा, एसडीएम, खाटूश्याम के अनुसार, प्रशासन की ओर से मेले के समय लगाई गई धारा-144 मेला ख़त्म होते ही हटा दी गई थी। अब अगर मंदिर कमेटी की ओर से कोई नया फैसला लिया गया है तो उसकी मुझे जानकारी नहीं है। बाकी भक्तों की आस्था के साथ ऐसा किया जाना बिल्कुल गलत है।

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