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वो लहूलुहान थी, लेकिन लोग फोटो खींच रहे थे..

Wed, 08 Jul 2015 09:32 AM IST
Updated Wed, 08 Jul 2015 09:32 AM IST
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She had blood Luhaninjoured, but people were take his photograph

राजस्थान सरकार में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के सहायक निदेशक आईएएस नीरज कुमार पवन सोमवार को सड़क हादसे में घायल एक युवती को लेकर एसएमएस अस्पताल पहुँचे। वहां उन्हें बेहद कड़वे अनुभव हुए। इस घटना को सोशल मीडिया पर भी खूब शेयर किया जा रहा है।

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मैं अपने दफ्तर जा रहा था। सुबह पौने दस बजे जयपुर की लालकोठी के पास हादसे का शिकार एक लड़की लहूलुहान पड़ी थी। उसके सर से खून बह रहा था, लोग फोटो खींचने और वीडियो बनाने में लगे थे, कोई उसे अस्पताल ले जाने के बारे में नहीं सोच रहा था। कुछ समझदार लोग भी थे जो शायद एंबुलेंस का इंतजार कर रहे थे।
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देर होने और खून अधिक बहने पर लड़की की जान को खतरा हो सकता था। मैं तुरंत उसे अपनी सरकारी गाड़ी से लेकर एसएमएस अस्पताल पहुँचा लेकिन तमाशा देख रहे लोगों में से कोई भी लड़की को सहारा देने के लिए मेरी गाड़ी में बैठने को तैयार नहीं हुआ।

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तो इस तरह पेश आए डॉक्टर

She had blood Luhaninjoured, but people were take his photograph

अस्पताल में ज्यादा भीड़ नहीं थी, पीड़ित को देखने नर्सिंग स्टाफ तो आ गया लेकिन कोई डॉक्टर नहीं आया। मैंने एक डॉक्टर से कहा, “जरा लड़की को देख लीजिए”।

डॉक्टर ने अजीब जवाब दिया- “हम जरा नहीं पूरा ही देखते हैं।” उन्होंने लड़की को नहीं देखा। मैंने फिर गुहार लगाई जो उन्होंने नजर अंदाज कर दी, लड़की के चेहरे से बह रहे खून को दिखाते हुए मैंने कहा, “मैं उसे सड़क से उठाकर लाया हूँ”।

इस पर डॉक्टर ने कहा- “सड़क से उठाकर लाए हो तो कोई एहसान किया है क्या”? ये जवाब सुनकर मैं लड़की को लेकर दूसरे डॉक्टर के पास गया जिन्होंने मरहम-पट्टी की।

मुझ से दवाइयां लाने के लिए कहा गया। मैंने कहा कि दवा तो मुफ्त मिलती है। इस पर डॉक्टर ने कहा लेकिन “लेकर तो तुम्हें ही आनी होगी”।

मैंने अनुभव किया कि आम आदमी को अस्पताल में कैसे व्यवहार का सामना करना पड़ता है। जब ऐसा व्यवहार अस्पताल में होगा तो सड़क पर घायल पड़े किसी मरीज को कोई अस्पताल उठाकर क्यों लाएगा?

बाद में क्या हुआ?

She had blood Luhaninjoured, but people were take his photograph

डॉक्टर नीरज कुमार पवन ने घटना की जानकारी स्वास्थ्य मंत्री को दी जिन्होंने तुरंत कार्रवाई करते हुए संबंधित डॉक्टर को वहां से हटा दिया है।

इस घटना के बाद मंगलवार को डॉक्टर नीरज पवन ने अस्पताल के डॉक्टरों के साथ बैठक की जिसमें सभी डॉक्टरों से व्यवहार सुधारने के लिए कहा।

साथ ही एक सप्ताह के भीतर सभी डॉक्टरों का आई-कार्ड पहनना अनिवार्य कर दिया गया है। अस्पतालों के ट्रॉमा सेंटरों में सीसीटीवी कैमरे भी लगाए जाएंगे।

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