फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Rajasthan ›   Saint Vijaydas Self Immolation Illegal Mining In Bharatpur Zahida Khan

साधु के आत्मदाह का सच: मंत्री के बेटे के पास जिस पहाड़ की माइनिंग का लाइसेंस, उसे पवित्र मानते हैं कृष्णभक्त

Wed, 27 Jul 2022 04:54 PM IST
उदित दीक्षित न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, भरतपुर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, भरतपुर Published by: उदित दीक्षित Updated Wed, 27 Jul 2022 04:54 PM IST
सार

भरतपुर में संत विजय दास की आस्था के आड़े नियम आ गए और उन्होंने आत्मदाह कर अपना बलिदान दे दिया। इस मामले में संत समाज नाराज है और गहलोत सरकार को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं।

विज्ञापन
Saint Vijaydas Self Immolation Illegal Mining In Bharatpur Zahida Khan
ब्रज क्षेत्र के पर्वतों को कृष्णभक्त पवित्र मानते हैं। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

भरतपुर में 20 जुलाई को संत विजय दास के आत्मदाह का मामला ठंडा नहीं हो रहा। इसने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। भाजपा जहां इसे मुद्दा बनाने के लिए अपनी जांच कमेटी बना चुकी है, वहीं कांग्रेस की अशोक गहलोत सरकार नियम-कानून की आड़ में बचाव तलाश रही है। 
विज्ञापन


यह पूरा मामला आस्था और नियम-कानूनों का है। ब्रज क्षेत्र के पर्वतों को कृष्णभक्त पवित्र मानते हैं। उनका विरोध माइनिंग को लेकर है, जिसका माइनिंग लाइसेंस गहलोत सरकार में राज्यमंत्री जाहिदा खान के बेटे साजिद खान के पास है। कांग्रेस की सरकार में ही साजिद ने दो खदानों की लीज खरीदी थी। संत समाज इन पहाड़ों को संरक्षित वन क्षेत्र घोषित कर वन विभाग को सौंपने की मांग पर अड़ा है। पिछले 551 दिन से संत इस मुद्दे पर आंदोलन कर रहे हैं। संत विजय दास के आत्मदाह के बाद माइनिंग का खेल सामने आया है। कागजों के जरिए भले ही साजिद खान के माइनिंग लाइसेंस और लीज को वैध बताया जा रहा हो, यह मुद्दा आस्था का है। 
विज्ञापन


कृष्णभक्त पवित्र मानते हैं ब्रज क्षेत्र के पहाड़ों को 
भगवान कृष्ण ने ही गोवर्धन पूजा करवाई थी और उसके बाद से ब्रज में सभी पर्वतों की पूजा होती है। आदिबद्री और कनकांचल में हिंदुओं की गहरी आस्था है। पौराणिक कहानी है कि भगवान कृष्ण ने नंद बाबा और यशोदा माता को तीर्थ कराने के लिए आदिबद्री में ही सभी तीर्थों को बुलाया था। इसी जगह पर बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री समेत सभी मंदिर बने हैं। ऐसा माना जाता है कि ब्रज पर्वत की यात्रा करने से चार धामों की तीर्थ यात्रा का फल मिलता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


2009 में हुआ था पहली बार आंदोलन
दरअसल, यह विवाद नया नहीं है। नवंबर 2009 में साधु-संतों और कृष्ण भक्तों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए उस समय की कांग्रेस सरकार ने डीग व कामां तहसील के पर्वतों को संरक्षित वन क्षेत्र घोषित करने की शुरुआत की थी। उस समय कनकांचल और आदिबद्री का कुछ हिस्सा वन क्षेत्र में घोषित होने से रह गया था। इसकी वजह थी कि यह हिस्सा अन्य तहसीलों में पड़ता था। मान मंदिर बरसाना के अध्यक्ष राधाकांत शास्त्री का कहना है कि कनकांचल और आदिबद्री का कुछ हिस्सा महत्वपूर्ण है। इसे अब भी संरक्षित वन में शामिल नहीं किया गया है। हकीकत तो यह है कि पिछले 15 साल से साधु समाज इसी पहाड़ी के लिए संघर्ष कर रहा था। 

डेढ़ साल पहले हुई थी बैठक 
डीग क्षेत्र के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल आदिबद्री धाम में महंत शिवराम दास की अध्यक्षता में आदिबद्री पर्वत व पहाड़ी स्थित कनकांचल पर्वत पर खनन को लेकर बड़ी बैठक बुलाई गई थी। इसमें 16 जनवरी 2021 से अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया गया था। तब से अब तक यह आंदोलन चल रहा है। सरकार ने नौ महीने पहले साधु-संतों से बातचीत में इस इलाके को संरक्षित वन क्षेत्र घोषित करने का आश्वासन दिया था। हालांकि, मामला टलता गया और अब भी इस पर स्वीकृति नहीं मिली है। 

मंत्री के बेटे की क्या है भूमिका? 
राज्य मंत्री जाहिदा खान के बेटे पहाड़ी पंचायत समिति के प्रधान साजिद खान ने 2019 में आदिबद्री क्षेत्र में दो खान को लीज पर लिया था। साजिद मिनरल्स नाम से उसकी कंपनी है। क्षेत्र को खनन मुक्त कराने और वन क्षेत्र घोषित कराने के लिए साधु-संत लगातार आंदोलन कर रहे थे। पिछले साल एक अक्टूबर को राज्य सरकार ने नीतिगत निर्णय लिया कि आदिबद्री एवं कनकांचल पर्वत क्षेत्र के खनन पट्टों को वन विभाग में स्थानांतरित किया जाए। इस संबंध में आश्वासन मिलने के बाद भी वन विभाग को पहाड़ों को स्थानांतरित करने का मामला अटक गया। इसी दौरान साजिद खान ने स्टोन क्रशर लगाने के लिए एनओसी भी हासिल कर ली। इस पूरी प्रक्रिया में राज्यमंत्री ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल किया और बेटे को लाभ पहुंचाया।  


मंत्री के प्रभाव में ठंडे बस्ते में गया प्रस्ताव
अक्टूबर 2021 में भरतपुर के तत्कालीन कलेक्टर ने तहसील सीकरी व पहाड़ी की 749.44 हेक्टेयर सिवायचक एवं 7.96 हेक्टेयर चारागाह मिलाकर कुल 757.40 हेक्टेयर जमीन को वन विभाग को हस्तांतरित करने का प्रस्ताव भेजा था। साथ ही 62.55 हेक्टेयर खातेदारी एवं गैर-खातेदारी जमीन पर खनन संबंधी गतिविधियों को प्रतिबंधित करने की बात भी कही थी। यह प्रस्ताव राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव को भेजा गया था। इसके बाद राज्यमंत्री के प्रभाव के चलते प्रस्ताव ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। करीब नौ माह गुजरने के बाद भी इस क्षेत्र को वन क्षेत्र घोषित नहीं किया जा सका।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed