फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Rajasthan ›   Rajasthan: School making fun to RTE

आरटीई का मजाक उड़ा रहे राजस्थान के स्कूल, अभिभावकों से कर रहे उगाही

Thu, 04 Aug 2016 05:31 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 04 Aug 2016 05:31 PM IST
विज्ञापन
Rajasthan: School making fun to RTE

सरकारें गरीब बच्चों की पढ़ाई का स्तर सुधारने के लिए लाख प्रयास करें लेकिन स्कूलों की मनमानी के आगे उसकी एक नहीं चलती। जिसका खामियाजा भुगतना पड़ता है बेबस अभिभावकों को। 

विज्ञापन


हर बच्चे को शिक्षा दिलाने के मकसद से लागू किए गए शिक्षा के अधिकार कानून (RTE) का राजस्‍थान में जमकर मजाक उड़ाया जा रहा है। यहां शुरूआती एक दो सालों में गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा देने के बाद अब प्राइवेट स्कूल मनमानी पर उतर आए हैं। उनसे जमकर वसूली की जा रही है। 
विज्ञापन


टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार ऐसे कई मामले सामने आए हैं जब निजी स्कूल अभिभावकों से मनचाही वसूली कर रहे हैं। जयपुर निवासी मोहम्मद सरफराज ने बताया कि उनकी बेटी एक अच्छे प्राइवेट स्कूल में पढ़कर शिक्षा ले रही थी। 
विज्ञापन
विज्ञापन


शुरूआती दो सालों में उसकी पढ़ाई अच्छी चली स्‍कूल ने उसकी ट्यूशन फीस से लेकर सभी फीस माफ कर रखी थी। लेकिन अब अचानक उन्हें लगता है कि उसे स्कूल से निकालना होगा। एक झुग्गी बस्ती में रहने वाले सरफराज ने बताया कि अब उनकी बेटी से किताबों के नाम पर 2500 रुपये की मांग की जा रही है। 

अभिभावकों से किताबों और अन्य चीजों के नाम पर उगाही कर रहे स्कूल

Rajasthan: School making fun to RTE

वह एक दुकान पर काम करके बामु‌श्किल 6 हजार रुपये महीना कमाते हैं उनकी स्थिति ऐसी नहीं है कि बेटी की किताबों के इतने पैसे जमा कर सके। उन्होंने कहा वह स्कूल के अन्य महंगे खर्चे जैसे पिकनिक फीस और नियमित दान योगदान आदि का खर्च वहन नहीं कर सकते। 

अन्य अभिभावकों की भी ऐसी ही कहानी है। रेहडी खोमचा लगाने वाले मुकेश मीणा ने बताया कि वह अपने बच्चे की किताबों की फीस के लिए 1500 रुपये जमा करने के लिए अब अतिरिक्त समय तक काम कर रहे हैं। मीणा ने बताया कि उनके बेटे ने तीन साल पहले नजदीकी स्कूल में एडमिशन लिया था। 

पहले दो साल में उन्हें कोई दिक्‍कत नहीं हुई और स्कूल ने किसी तरह के खर्चे की मांग नहीं की। यहां तक की किताबें और ड्रेस भी स्कूल की तरफ से ही दी गई। लेकिन इस साल स्कूल की तरफ से उन्‍हें किताबों के भुगतान के लिए नोटिस दे दिया गया।

वहीं आरटीई एक्ट के जानकारी प्रांजल सिंह बताते हैं कि उन्हें इस तरह की शिकायतें लगातार मिल रही हैं। आलम ये है कि हर दूसरा स्कूल इस तरह के काम कर रहा है। सरकार की तरफ से भी इस पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed