Rajasthan Politics: कैसे लगातार पायलट के सीएम बनने के आड़े आ रहे गहलोत, चार साल में कैसे बढ़ी अदावत, जानें
Rajasthan Politics: अशोक गहलोत और सचिन पायलट की पुरानी अदावत राजस्थान में खुलकर सामने आ गई है। मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार पर कुछ दिन की शांति के बाद पार्टी में घमासान शुरू हो गया है। गहलोत गुट ने सीएम पद के लिए पायलट को नकार दिया है। जानतें हैं क्यों?
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Rajasthan Politics: मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए नामांकन करने की घोषणा करने के बाद नए सीएम को लेकर चर्चा शुरू हो गई। हालांकि, शुरुआत में सामने आया है कि गहलोत दोनों पद पर बने रह सकते हैं। ऐसी उन्होंने इच्छा भी जताई थी, लेकिन बाद में मना कर दिया। इसी बीच भारत जोड़ो यात्रा कर रहे राहुल गांधी ने संकेत दिए कि एक पद पर एक व्यक्ति ही रहेगा। उन्होंने उदयपुर में कांग्रेस अधिवेशन में किए गए फैसले का हावाला दिया। इस दौरान सचिन पायलट ने भी राहुल गांधी से मुलाकात की, इसके बाद से वह मुख्यमंत्री पद के दावेदार बन गए।
इस बीच यह भी सामने आया कि अशोक गहलोत ने विधानसभा अध्यक्ष और अनुभवी नेता सीपी जोशी का नाम आलाकमान को मुख्यमंत्री पद के लिए सुझाया। कहा गया कि गहलोत पायलट के सीएम बनने के खिलाफ हैं। उधर, राहुल गांधी से संकेत मिलने के बाद सचिन पायलट राजस्थान में सक्रिय हुए और विधायकों से मिलना शुरू कर दिया। कल यानी शनिवार रात को राजस्थान के नए सीएम पद के उम्मीदवार पर चर्चा करने को लेकर कांग्रेस ने रविवार शाम सात बजे विधायक दल की बैठक बुलाई। विधायकों से चर्चा करने के लिए कांग्रेस हाईकमान ने दिल्ली से राष्ट्रीय महासचिव अजय माकन और मल्लिकार्जुन खड़गे को जयपुर भेजा। दोनों नेता रविवार दोपहर को जयपुर पहुंचे। इसके बाद से प्रदेश की राजनीति में अचानक उबाल गया।
गहलोत गुट के विधायक रविवार दोपहर बाद से एक्टिव हो गए। सभी विधायकों को मंत्री शांति धारीवाल के आवास पर शाम पांच बजे बैठक के लिए बुलाया गया। बताया गया कि इस बैठक में शामिल होने के लिए गहलोत गुट के करीब 60 विधायक पहुंचे थे। उधर, विधायक दल की बैठक के लिए शाम सात बजे का समय तय किया गया, लेकिन गहलोत गुट के विधायक उसमें नहीं पहुंचे। धारीवाल हाउस से निकले विधायक विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी के बंगले पर इस्तीफा लेकर पहुंचे। इस दौरान 92 विधायकों के इस्तीफे के एलान की बात सामने आईं।
- अशोक गहलोत के अध्यक्ष पद की दावेदारी करने से पहले बीते शुक्रवार को राजस्थान में विधायक दल की बैठक हुई थी। इस दौरान गहलोत समर्थक मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने साफ कहा था कि अशोक गहलोत सीएम और कांग्रेस अध्यक्ष दोनों पद पर रहेंगे। विधायक दल की बैठक में सभी विधायकों ने यही इच्छा जताई है। इससे तभी साफ हो गया था कि आगे आने वाले दिनों में सियासी रंग देखने को मिल सकता है।
- अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री पद के लिए कांग्रेस के अनुभवी नेता और विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी का नाम आगे बढ़ाया था। बीते कई साल से गहलोत और जोशी के बीच नजदीकियां बढ़ी हैं। ऐसे में वह चाहते थे कि उनका भरोसमंद नेता प्रदेश का सीएम बने। बता दें कि यह पहली बार नहीं कि जब सीपी जोशी के मुख्यमंत्री बनने की चर्चा हो रही है। 2008 में भी वह मुख्यमंत्री बन सकते थे, लेकिन एक वोट से चुनाव हारने के कारण वह सीएम नहीं बन पाए थे। इसके बाद गहलोत को मुख्यमंत्री बनाया गया था।
- अशोक गहलोत और सचिन पायलट की अदावत 2018 विधानसभा चुनाव से चली आ रही है। उस दौरान दोनों के बीच राजस्थान का मुख्यमंत्री बनने को लेकर पेंच फंसा था। आखिर में आलाकमान ने गहलोत को सीएम बनाया और पायलट उप मुख्यमंत्री बनाए गए थे।
- सरकार बनने के बाद भी गहलोत और पायलट के बीच का सियासी टकराव खुलकर सामने आया। दोनों नेता कई बार एक दूसरे का विरोध करते नजर आए। इससे दोनों के बीच की दूरियां लगातार बढ़ती चलीं गईं। सरकार बनने के दो साल बाद 2020 में पायलट ने बगावत कर दी और अपने समर्थक विधायकों के साथ हरियाणा के मानेसर चले गए। कई दिन चली सियासी उठापट के बीच गहलोत अपनी सरकार बचाने में सफल हो गए, लेकिन पायलट को प्रदेश अध्यक्ष और उप मुख्यमंत्री के पद से हटा दिया गया। इसके बाद से पायलट सिर्फ एक विधायक की भूमिका हैं। अब एक बार फिर उनके मुख्यमंत्री बनने की चर्चा हो रही है, लेकिन गहलोत उनके खिलाफ खड़े नजर आ रहे हैं। कहा जा रहा है कि गहलोत के कारण ही विधायक पायलट को सीएम बनाने का विरोध कर रहे हैं।
- सचिन पायलट के विरोध में खड़े विधायकों का कहना है कि बगावत करने वाले 18 विधायकों को छोड़कर किसी को भी मुख्यमंत्री बना दिया जाए। वह उसका समर्थन करेंगे। बताया जा रहा है कि कई विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी को मुख्यमंत्री बनाए जाने पर समर्थन करने की बात कही हैं। इस तरह से देखा जाए तो गहलोत गुट सिर्फ पायलट के सीएम बनने का विरोध कर रहा है।