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Rajasthan: 'वही होता है जो मंजूरे सोनिया गांधी होता है', सियासी संकट के बीच ये क्यों बोले मंत्री, देखें वीडियो
Mon, 26 Sep 2022 09:59 PM IST
उदित दीक्षित
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: उदित दीक्षित
Updated Mon, 26 Sep 2022 09:59 PM IST
सार
Rajasthan Political Crisis: मंत्री ने कहा हम सोनिया गांधी के सिपाही हैं। पिछले 50 साल में मुझ पर एक बार भी अनुशासनहीनता का आरोप नहीं लगा है। अगर पार्टी महासचिव और प्रभारी बगावत करने वालों को मुख्यमंत्री बनाने के मिशन के साथ आएंगे तो विधायकों का गुस्सा होना तय है।
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मंत्री शांति धारीवाल
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विस्तार
Rajasthan Political Crisis: मुद्दई लाख बुरा चाहे तो क्या होता है, वही होता है जो मंजूरे खुदा होता है। यह कहावत हम सब ने कई बार सुनी होगी, लेकिन राजस्थान में चल रहे सियासी टकराव के बीच इस कहावत के मायने बदल गए। सोमवार को गहलोत गुट के एक मंत्री ने कहा, मुद्दई लाख बुरा चाहे तो क्या होता है, वही होता है जो मंजूरे सोनिया गांधी होता है। मीडिया वार्ता में मंत्री की कही इस बात पर जमकर ठहाके लगे। अब इसका वीडियो भी देख लीजिए...।
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राजस्थान के रंग... pic.twitter.com/qB4MfOUfNm
— Uditdixit7 journalist (@Uditdixit4) September 26, 2022
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दरअसल, कल रविवार से प्रदेश कांग्रेस की सियासत गर्मा गई है। गहलोत गुट के विधायकों ने सचिन पायलट को सीएम बनाए जाने की चर्चा के बीच उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया। पायलट के खिलाफ खोले गए इस मोर्चे की पटकथा गहलोत गुट के मंत्री शांति धारीवाल के आवास पर ही लिखी गई थी। यहां विधायकों ने शक्ति प्रदर्शन के बाद इस्तीफे का एलान कर दिया था। इसके बाद से प्रदेश कांग्रेस की सियासत नया मोड़ ले लिया।
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दिल्ली में सोनिया गांधी से मुलाकात करने के बाद पर्यवेक्षक अजय माकन ने मीडिया से बात की। इस दौरान उन्होंने गहलोत गुट के विधायकों पर अनुशासनहीनता का आरोप लगाया। साथ ही कार्रवाई के भी संकेत दिए। इसके कुछ देर बाद मंत्री शांति धारीवाल में जयपुर में मीडिया वार्ता कर अजय माकन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, सीएम बनाने के लिए कांग्रेस महासचिव सचिन पायलट का प्रचार कर रहे थे।
मंत्री ने कहा, हम सोनिया गांधी के सिपाही हैं। पिछले 50 साल में मुझ पर एक बार भी अनुशासनहीनता का आरोप नहीं लगा है। अगर पार्टी महासचिव और प्रभारी ऐसे लोगों (जो पार्टी के खिलाफ बगावत करते हैं) को मुख्यमंत्री बनाने के मिशन के साथ आएंगे तो विधायकों का गुस्सा होना तय है।
उन्होंने का उप मुख्यमंत्री और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष होने के बाद भी सरकार गिराने की साजिश रची गई। ऐसे लोगों को मुख्यमंत्री बनाने का मिशन लेकर दिल्ली से नेताओं को भेजा गया। अगर, किसी को मुख्यमंत्री बनाना ही है तो उन 102 विधायकों में से बनाया जाए जिन्होंने सरकार बचाने में साथ दिया था।