Rajasthan Panchayat Election Result 2020: डोली कांग्रेस की नैया, कई दिग्गजों की साख को आंच, भाजपा को बढ़त

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: अनवर अंसारी Updated Wed, 09 Dec 2020 11:33 AM IST
अशोक गहलोत-सचिन पायलट (फाइल फोटो)
अशोक गहलोत-सचिन पायलट (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
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राजस्थान के 21 जिलों में पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्यों के चुनावों में भाजपा को कांग्रेस पर बढ़त हासिल हुई है। इसके साथ ही इन चुनावों को लेकर पिछले 10 सालों से चला रहा मिथक टूट गया। मंगलवार दोपहर सामने आए 4371 पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव में भाजपा के 1836 उम्मीदवार जीत गए हैं जबकि कांग्रेस के 1718 उम्मीदवारों को जीत मिली है। राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, निर्दलीयों को 422 व राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) को 56 जगहों पर विजय प्राप्त हुई है। सीपीआईएम 16 व बसपा ने 3 सीटें जीतीं।  
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मंत्रियों के क्षेत्रों में हारी कांग्रेस
वहीं, कुल 636 जिला परिषद सदस्यों के लिए चुनाव भी हुए हैं। अभी तक 598 सीटों के नतीजे आ चुके हैं। इसमें भाजपा को 323, कांग्रेस को 246, निर्दलीय 17, आरएलपी 10 और सीपीआईएम दो सीटें हासिल हुई हैं। यह चुनाव कांग्रेस के लिए किसी झटके से कम नहीं है, क्योंकि कांग्रेस को मंत्रियों के क्षेत्रों में भी हार का सामना करना पड़ा है। 


इस बार चुनाव में सचिन पायलट, गोविंद डोटासारा, रघु शर्मा, उदयलाल आंजना और अशोक चांदना जैसे नेताओं के गढ़ों में भी कांग्रेस को पराजय का मुंह देखना पड़ा है। वहीं, चुनावी नतीजों के बाद से कांग्रेस के खेमे में निराशा और भाजपा के खेमे में उत्साह लौट आया है। 

पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्य चुनावों में मिली हार के बाद कांग्रेस में बेचैनी पैदा हो गई है। नेताओं द्वारा पार्टी की हार के लिए जिम्मेदार असल कारणों को तलाशा जा रहा है। 

इन तीन वजहों से परास्त हुई सत्तारूढ़ पार्टी
ऐसे में आइए जानते हैं उन तीन वजहों के बारे में जिनकी वजह से इस चुनाव में राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस की हार हुई है। 

संगठन बिखरा हुआ: चुनाव अभियान के दौरान कांग्रेस का संगठन ना ही प्रदेश स्तर पर सक्रिय दिखाई दिया और ना ही जिला स्तर पर। इसका खामियाजा पार्टी को हार के साथ चुकाना पड़ा। दूसरी तरफ, विपक्षी भाजपा ने हर चुनाव की तरह इस चुनाव में भी पूरी जी-जान लगा दी। 

जीताने की जिम्मेदारी विधायकों की: कांग्रेस ने इन चुनावों में जीताने की जिम्मेदारी अपने विधायकों के सिर मढ़ दी, लेकिन विधायक ठीक तरीके से जनता को लामबंद करने में विफल रहे। इससे पहले जयपुर, कोटा और जोधपुर के नगर निगम चुनावों में भी कांग्रेस का यही हाल हुआ था। 

टिकट वितरण में परिवारवाद का आरोप: इस चुनाव के लिए जितने भी कांग्रेस प्रत्याशी मैदान में उतरे, उन्हें लेकर आरोप लगाया गया कि उन्हें विधायकों का रिश्तेदार होने के चलते टिकट मिला है। इससे लोगों के बीच नाराजगी बढ़ी। इसके अलावा कांग्रेस पर टिकट बेचने के भी आरोप लगे।    

जीत से गदगद हुए भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा

वहीं, पंचायत चुनावों में मिली जीत से भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा गदगद नजर आ रहे हैं। उन्होंने ट्वीट कर कहा, 'राजस्थान में पंचायती राज और जिला परिषद चुनावों में प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्र की जनता, किसानों व महिलाओं ने भाजपा में जो विश्वास प्रकट किया है, इसके लिए मैं उनका आभार व्यक्त करता हूं। यह जीत गांव, गरीब, किसान और मजदूर के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी में विश्वास का प्रतीक है।'
 

वसुंधरा ने कहा- कांग्रेस के अहंकार की पराजय
पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने पंचायती चुनाव में भाजपा की जीत पर कहा कि पंचायती राज चुनावों के ये परिणाम वास्तव में कांग्रेस सरकार के झूठ, फरेब व अहंकार की पराजय है तथा यह जीत केंद्र की मोदी सरकार पर जनता के विश्वास की है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने कहा कि पंचायती राज चुनाव के परिणाम इस भ्रष्ट सरकार की विदाई का एक निश्चित संकेत हैं।

बता दें कि राजस्थान के 21 जिलो में कुल 636 जिला परिषद सदस्यों और 4,371 पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव के लिए अजमेर, बांसवाड़ा, बाड़मेर, भीलवाड़ा, बीकानेर, बूंदी, चित्तौड़गढ़, चुरू, डूंगरपुर, हनुमानगढ़, जैसलमेर, जालोर, झालावाड़, झुंझुनू, नागौर, पाली, प्रतापगढ़, राजसमंद, सीकर, टोंक और उदयपुर में मतदान 23 और 27 नवंबर और एक और पांच दिसंबर को चार चरणों हुआ था।
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