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चुनाव आयोग ने राजस्थान की इन सीटों को जातीय संघर्ष की आशंका के चलते अतिसंवेदनशील माना है और इन सीटों को छावनी में तबदील कर दिया है। पिछले लोकसभा चुनाव में सबसे ज्यादा उपद्रव के हालात इन सीटों पर ही बने थे। इस कारण प्रदेश की आधी पुलिस इन लोकसभा क्षेत्रों में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात की गई है।
प्रचार थमन से पहले भाजपा और कांग्रेस ने अपनी ओर से कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने अलवर में केन्द्रीय राज्य मंत्री जितेन्द्र सिंह के समर्थन में रोड शो किया, तो भाजपा से मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने ताबड़तोड़ रैलियां कीं। इधर, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी पीछे नहीं रहे।
टोंक-सवाईमाधोपुर सीट
भाजपा - सुखवीर सिंह जोनापुरिया
अन्य - जगमोहन मीणा
इस सीट से वर्तमान केन्द्रीय मंत्री नमोनारायण मीणा की सीट बदलकर कांग्रेस भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान रहे मोहम्मद अजहरुद्दीन को आजमाने जा रही है।
उनके सामने भाजपा ने सुखवीर सिंह जोनापुरिया को टिकट दिया है। विधानसभा चुनाव के परिणामों के हिसाब से देखा जाए, तो भाजपा मजबूत है।
इस संसदीय सीट के तहत सभी आठों विधानसभा सीटों पर भाजपा का कब्जा है। यही नहीं, मोदी लहर को देखते हुए भी यहां कांग्रेस को जोर आनेवाला है।
इसके अलावा राजपा ने भी राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अधिकारी रहे जगमोहन मीणा को खड़ा किया है। मीणा समाज के बड़े नेता विधायक किरोड़ी लाल मीणा के भाई हैं जहमोहन मीणा। विधायक बनने से पहले किरोड़ी दौसा सीट से सांसद थे।
अलवर
कांग्रेस - जितेन्द्र सिंह
भाजपा - महंत चांदनाथ
इस सीट पर भाजपा और कांग्रेस में सीधा और कांटे का मुकाबला है। वर्तमान सांसद व केन्द्रीय राज्य मंत्री जितेन्द्र सिंह राजपरिवार से जुड़े हुए हैं।
उनके सामने भाजपा ने अस्थल बोहर मठ रोहतक हरियाणा के महंत चांदनाथ को उतारा है। इस संसदीय सीट में आनेवाली विधानसभा सीटों में से एक पर भी कांग्रेस का विधायक नहीं है।
ऐसे में जितेन्द्र सिंह को कांग्रेस कार्यकर्ताओं में ऊर्जा और आत्मविश्वास भरने में खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, भाजपा के सात विधायक होने के कारण महंत चांदनाथ को सहयोग मिल रहा है।
दौसा सीट
कांग्रेस - नमोनारायण मीणा
भाजपा - हरीश मीणा
अन्य - किरोड़ी लाल मीणा
इस बार नमोनारायण मीणा दौसा से खुद को आजमा रहे हैं, लेकिन उनके सामने दो बड़ी मुश्किलें खड़ी हुई हैं। एक तो भाजपा ने उनके भाई पूर्व डीजीपी हरीश मीणा को उतारा है, दूसरी यह कि मीणा वोट बैंक में सेंध मारने के लिए किरोड़ी लाल राजपा से खड़े हुए हैं।
हरीश मीणा राजनीति में नए हैं, लेकिन मोदी लहर और आठ में से पांच विधानसभा सीटें भाजपा के पास होने का उन्हें मजबूत बना रहा है। नमोनारायण मीणा की मुश्किल यह है कि यह उनके लिए नई सीट है। इधर, विधायक किरोडी लाल मीणा चुनाव में यह कह कर उतर गए कि एक घर में टिकट देने का कांग्रेस और भाजपा का यह फिक्सिंग का खेल चल रहा है।
किरोड़ी लाल मीणा ने इस सीट से वर्ष 2009 में निर्दलीय के रूप में लोकसभा चुनाव जीता था।
भरतपुर सीट
कांग्रेस - सुरेश यादव
भाजपा - बहादुर सिंह कोली
अन्य - महेन्द्र कुमार जाटव
भरतपुर लोकसभा सीट पर कांग्रेस के उम्मीदवार सुरेश यादव को विधायक विश्वेन्द्र सिंह की सिफारिश पर टिकट मिला है। जिम्मेदारी निभाते हुए विश्वेन्द्र सिंह प्रचार में कोई कमी नहीं छोड़ रहे।
यादव का मुकाबला अनुभवी राजनीतिज्ञ बहादुर सिंह कोली से है, जिन्हें विधानसभा की आठ में से सात भाजपा विधायकों का सहयोग मिल रहा है।
बसपा ने महेन्द्र कुमार जाटव को टिकट दिया है, लेकिन मुकाबला भाजपा और कांग्रेस में ही है।
करौली-धौलपुर
कांग्रेस - लख्मी राम बैरवा
भाजपा - मनोज राजोरिया
अन्य - जी.आर. बरुआ
विधानसभा चुनाव में अति निराशाजनक नतीजों के बीच कांग्रेस के लिए केवल इस क्षेत्र से ही कुछ उत्साहजनक परिणाम आए थे।
यहां से कांग्रेस को आठ में से पांच सीटें हासिल हुई थीं और मात्र दो पर भाजपा कब्जा जमा पाई थी। ऐसे में कांग्रेस के लख्मी राम बैरबा को खुद की जीत की काफी आशा है।
इधर, भाजपा के मनोज राजोरिया को मोदी लहर और राजे के प्रचार का सहारा है। बसपा से जी.आर. बरुआ भी मैदान में है, लेकिन असल मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच ही है।