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राजस्थान: अपने ही बिल को वापस लेने पर क्यों मजबूर हुई गहलोत सरकार, भाजपा युवा मोर्चा ने बताई अपनी जीत

Wed, 13 Oct 2021 06:46 PM IST
Rahul Sampal राहुल संपाल
Updated Wed, 13 Oct 2021 06:46 PM IST
सार

राजस्थान के भाजपा युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने पूरे प्रदेश के 30 जिलों में राजस्थान अनिवार्य विवाह पंजीकरण अधिनियम 2009 के अनुच्छेद 8 के विरोध में प्रदर्शन किया था। भाजयूमो ने इस अधिनियम को समाज के लिए प्रतिगामी बताते हुए कहा की इस कानून से बाल विवाह को प्रोत्साहन मिलेगा और विवाह के पंजीकरण की अनिवार्यता से महिलाओं को ऐसे विवाह से अलग होना कठिन हो जाएगा...

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Rajasthan: Gehlot government was forced to withdraw its compulsory registration of marriage act, BJP Yuva Morcha claimed its victory
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार ने बाल विवाह रजिस्ट्रेशन बिल वापल ले लिया है। पिछले महीने सितंबर में इस बिल को सरकार ने विधानसभा में पारित कराया था। लेकिन इस बिल को लेकर विवाद बढ़ता गया। कई सामाजिक संगठन सहित भाजपा ने भी इस बिल का पुरजोर विरोध किया था, जिसके चलते प्रदेश के राज्यपाल ने इस बिल को अपने पास रखा था। अब मुख्यमंत्री गहलोत ने यू-टर्न लेते हुए बिल को वापल लेने का एलान कर दिया है।

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कांग्रेस सरकार के बिल वापस लेने पर भारतीय जनता युवा मोर्चा (बीजेवाईएम) ने दावा किया कि, उसने राजस्थान सरकार को हाल में पारित विवाह पंजीकरण विधेयक को वापस लेने के लिए विभिन्न प्रदर्शनों के माध्यम से मजबूर किया। भाजपा की युवा शाखा ने एक बयान जारी कर कहा कि यह विधेयक पश्चगामी था और इससे लोगों के लिए बाल विवाह कराना आसान हो जाता। भारतीय जनता युवा मोर्चा ने कांग्रेस शासित राजस्थान सरकार पर आरोप लगाया है कि इस अधिनियम से बाल विवाह को प्रतिबंधित करने केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए कानून कमज़ोर होंगे। युवा मोर्चा का कहना है कि कार्यकर्ताओं के अथक प्रयासों से कांग्रेस सरकार द्वारा राजस्थान अनिवार्य विवाह पंजीकरण अधिनियम 2009 के अनुच्छेद 8 को संशोधित करते इस काले क़ानून को ध्वस्त कर दिया है।
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राजस्थान के भाजपा युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने पूरे प्रदेश के 30 जिलों में इस कानून के विरोध में प्रदर्शन किया था। भाजयूमो ने इस अधिनियम को समाज के लिए प्रतिगामी बताते हुए कहा की इस कानून से बाल विवाह को प्रोत्साहन मिलेगा और विवाह के पंजीकरण की अनिवार्यता से महिलाओं को ऐसे विवाह से अलग होना कठिन हो जाएगा।
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मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेजस्वी सूर्या ने इस कानून पर अपनी बात रखते हुए कहा कि ये अधिनियम न्याय विरुद्ध है। यह कानून युवा नाबालिग बालिकाओं के शोषण को प्रोत्साहित करता है और पूरी न्याय व्यवस्था का माखौल उड़ाता है। मैं पूरे राजस्थान के युवा मोर्चा की टीम के अथक प्रयासों की प्रशंसा करता हूं, जिसने प्रदेश की असंवेदनशील सरकार को इस अधिनियम को वापस लेने पर विवश कर दिया। उन्होंने आगे कहा की कांग्रेस सरकार द्वारा लाया गया राजस्थान अनिवार्य विवाह पंजीकरण अधिनियम कांग्रेस की महिला विरोधी मानसिकता को दर्शाता है।

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सीएम ने राज्यपाल से बिल लौटाने का किया अनुरोध

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस पर कहा, विवाह के अनिवार्य पंजीयन को लेकर सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश की भावना के अनुरूप ही राजस्थान विवाहों का अनिवार्य पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2021 लाया गया है। परंतु बाल विवाह को लेकर जो गलत धारणा बन गयी है, तो हम बिल को माननीय राज्यपाल महोदय से अनुरोध करेंगे कि इसे सरकार को पुनः लौटा दें।

क्या था बाल विवाह एक्ट

बता दें कि 17 सितंबर को गहलोत सरकार ने विधानसभा में जो बाल विवाह पारित किया था। उसके तहत अगर राजस्थान में किसी लड़की की उम्र 18 साल से कम और लड़के की उम्र 21 से कम है तो उसके माता-पिता को 30 दिन के अंदर इसकी सूचना रजिस्ट्रेशन अधिकारी को देनी होगी। इसके आधार वर रजिस्ट्रेशन अधिकारी उस बाल विवाह को रजिस्टर्ड करेगा। यह रजिस्ट्रेशन पहले जिला स्तर पर होता था, लेकिन गहलोत सरकार ने इसे ब्लॉक लेवल करने के आदेश दिए थे।

सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर भी की गई

इस बिल के बाद प्रदेश के प्रमुख विपक्षी दल भाजपा ने बाल विवाह के रजिस्ट्रेशन के प्रावधान का जमकर विरोध किया था। इतना ही नहीं विधानसभा का वॉकआउट भी कर दिया था। तभी से लेकर अभी तक इस बिल को लेकर विरोध हो रहा था। इतना ही नहीं राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने राजस्थान सरकार को पिछले दिनों चिट्ठी लिखी थी। आयोग ने विधेयक के प्रावधानों पर फिर से विचार करने और समीक्षा करने को कहा था। इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर की गई है।

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