राजस्थान चुनाव अब होगा रोचक, हार-जीत के समीकरण बिगाड़ सकती है ये नई पार्टी
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राजस्थान के विधानसभा चुनावों में दो मुख्य दलों भाजपा और कांग्रेस के लिए कभी बसपा और आप तनाव का विषय नहीं रहे, लेकिन अब एक नई पार्टी की घोषणा जरूर परेशानी खड़ी करने वाली साबित हो सकती है। कारण है कि इस पार्टी को यहां से सबसे बड़े वोट बैंक जाट समाज का समर्थन मिल रहा है। राजस्थान में किसान वर्ग में सबसे अधिक दबदबा भी जाट समाज का ही है। अब इस नई पार्टी ने इस विधानसभा चुनाव को रोचक बना डाला है। सरकार पलटने की क्षमता रखने वाले जाट समाज को खुश रखने से ही भाजपा और कांग्रेस की इस चुनाव में बात बन सकती है, लेकिन अब नई पार्टी बनने से कांग्रेस व भाजपा को उम्मीदवार चुनने को लेकर काफी मशक्कत करनी पड़ेगी। तय माना जा रहा है कि दोनों बड़ी पार्टियों के प्रत्याशियों की हार-जीत में इस नई पार्टी के उम्मीदवार अपनी खासी भूमिका निभाएंगे।
भाजपा से बागी होकर पिछले चुनाव में निर्दलीय के रूप में जीत कर आए जाट समाज के नेता हनुमान बेनीवाल ने सोमवार को जयपुर में हुई सभा में अपनी नई 'राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी' का ऐलान कर दिया। उनके साथ भाजपा से नाराज होकर हाल ही नई 'भारत वाहिनी पार्टी' बनाने वाले घनश्याम तिवाड़ी भी उनके साथ आ गए हैं। माना जा रहा है कि राजस्थान में बन रहा जाट और ब्राह्मण समीकरण कइयों के जीत के समीकरण बिग़ड सकता है। राजस्थान में विधानसभा की 200 सीटों में से 50 से अधिक सीटों पर जाट समाज का दबदबा है और करीब 40 से अधिक सीटों पर ये समाज उलट-फेर करने की क्षमता भी रखता है। राजस्थान में इस समाज से आने वाले किसानों की संख्या भी अच्छी खासी है। राजनीतिक पार्टियों का मानना है कि 11 फीसदी से अधिक वोटर जाट समाज से आते हैं, लेकिन खास बात यह है कि ये समाज एक मुश्त वोट डालने के लिए जाना जाता है।
पश्चिमी राजस्थान व नागौर तक तथा पूरे शेखावाटी में जाट समाज बड़ी संख्या में हैं। आमतौर पर कांग्रेस का वोट बैंक माना जाने वाले इस समाज ने पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस शासन से नाराज होकर और मोदी लहर के चलते भाजपा का साथ दिया था। भाजपा की ऐतिहासिक जीत में इस समाज की बड़ी भूमिका मानी जा रही थी, क्योंकि 163 सीटें बिना जाट समाज के वोट के राजस्थान में संभव नहीं है। लेकिन पिछले तीन सालों में भाजपा से बागी विधायक हनुमान बेनीवाल ने भाजपा के खिलाफ और खासकर वसुंधरा राजे के खिलाफ जमकर माहौल बनाया है। उन्होंने शेखावाटी से लेकर पश्चिमी राजस्थान और जयपुर तक किसान व जाट समाज की रैलियों में अच्छी खासी भीड़ जुटाई है।
भाजपा छोड़ने वाले ब्राह्मण नेता भी बेनीवाल के पाले में
ब्राह्मण समाज के चेहरा माने जाते रहे वरिष्ठ विधायक व पूर्व मंत्री घनश्याम तिवाड़ी भी वसुंधरा राजे से रूठकर भाजपा छोड़ अपनी अलग पार्टी बना चुक हैं। उन्होंने सभी 200 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने की घोषणा की है। उन्होंने कहा है कि भाजपा के कई नेता उनसे सम्पर्क में हैं, ऐसे में वे भाजपा के ही वोट काटेंगे। हालांकि ब्राह्मण वोट बैंक बंटा हुआ माना जाता है। इसलिए भाजपा या कांग्रेस घनश्याम तिवाड़ी को लेकर खास परेशान नहीं है। लेकिन अब बेनीवाल के साथ मिलकर चुनाव लड़ने से कांग्रेस और भाजपा को थोड़ी दिक्कत जरूर होने वाली है।