Rajasthan election: पोकरण में फिर 'विस्फोट' की तैयारी! धार्मिक नेताओं में है जबरदस्त भिड़ंत
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विस्तार
पाकिस्तान की सीमा से कुछ दूर बसे पोकरण में राजनीतिक लड़ाई एक अलग ही मोर्चे पर लड़ी जा रही है। यहां कांग्रेस और भाजपा दोनों ही पार्टियों के उम्मीदवार धार्मिक पृष्ठभूमि से हैं। कांग्रेस ने यहां से वर्तमान विधायक, अशोक गहलोत सरकार में कैबिनेट मंत्री और इस्लाम धर्म में एक वर्ग के धार्मिक नेता शाले मोहम्मद को दोबारा मैदान में उतारा है। पोकरण के कुल लगभग 2.25 लाख मतदाताओं में लगभग 65 हजार मुस्लिम मतदाता उनकी ताकत हैं। शाले मोहम्मद को भाजपा के उम्मीदवार प्रताप पुरी जी महाराज से कड़ी चुनौती मिल रही है। प्रताप पुरी जी महाराज यहां के लोकप्रिय धार्मिक नेता हैं। यहां उनके मठ के काफी संख्या में अनुयायी हैं। हालांकि, राजनीति के इस दौर में भी पोकरण में यह एक बहुत अच्छी बात देखी जा सकती है कि दो धार्मिक नेताओं के आमने-सामने होने के बाद भी यहां का माहौल सांप्रदायिक नहीं है। शाले मोहम्मद को हिंदू मतदाताओं के भी भारी संख्या में वोट मिल रहे हैं, तो प्रताप पुरी जी महाराज को भी पांच से दस हजार मुस्लिम मतदाताओं के वोट मिलने की उम्मीद है। प्रताप पुरी जी महाराज पिछला चुनाव केवल 800 वोटों के अंतर से हार गए थे। उन्हें लगता है कि इस बार पोकरण की जनता उन्हें अवसर देगी।
पोकरण में शाले मोहम्मद ने अच्छा काम किया है। उन्होंने कई स्कूल और कॉलेज बनवाने में अपना योगदान दिया है। पाकिस्तानी सीमा के करीब होने के कारण यहां की सड़कों का विकास केंद्र-राज्य सरकार की प्राथमिकता में रहा था। स्थानीय सड़कें भी अच्छी स्थिति में हैं। लिहाजा यहां के निवासियों को उनसे कोई समस्या नहीं है। कहा यहां तक जाता है कि शाले मोहम्मद राजनीतिक रूप से अलग विचार रखने वाले लोगों को भी बुलाकर उनकी समस्याओं का निवारण करते हैं। इससे उनकी छवि एक लोकप्रिय, शांतिप्रिय और जनता के लिए हमेशा उपलब्ध रहने वाले नेता की बनी है। उन्हें अपनी इस शैली का खूब लाभ मिलता दिख रहा है। लगभग हर वर्ग के मतदाता उनके साथ हैं।
मंदिर से शुरू किया चुनाव प्रचार
सोमवार 20 नवंबर को शाले मोहम्मद को पोकरण में ही एक जनसभा को संबोधित करना था। कार्यक्रम स्थल पर पहुंचकर उन्होंने सबसे पहले यहां के कुलदेवता के मंदिर में दर्शन किए। कुलदेवता का आशीर्वाद लेकर वे लोगों से मिलते हुए कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे। यहां पहुंच कर अपने चुनावी संबोधन में उन्होंने पूरे क्षेत्र के विकास को अपनी प्राथमिकता बताया। भारी संख्या में जुटे उनके समर्थकों ने उन्हें जीत के प्रति आश्वस्त किया।
इस 'कलंक' को धो डालिये- प्रताप पुरी जी महाराज
वहीं, भाजपा उम्मीदवार प्रताप पुरी जी महाराज इस समय अपने चुनाव प्रचार में जबरदस्त व्यस्त हैं। उनके समर्थकों को उनका 'दर्शन' करने के लिए भी चार-पांच घंटे तक का इंतजार करना पड़ रहा है। लेकिन अब भी लोग उनका इंतजार कर रहे हैं। पोकरण में ही एक अन्य स्थल पर लोगों को संबोधित करते हुए प्रताप पुरी जी महाराज ने कहा कि पिछले चुनाव में उन्हें केवल 800 वोटों से हार मिली थी। इससे पोकरण को 'कलंक' लग गया था, लेकिन इस बार पोकरण की जनता उन्हें भारी मतों से जिताकर इस कलंक को धो देने के लिए तैयार है। वे समर्थकों को बता रहे हैं कि पोकरण में उनकी जीत केवल राजस्थान तक ही नहीं, देश-विदेश तक में एक संदेश देगी।
हाथ जोड़कर सुन रहे महाराज की बात
प्रताप पुरी जी महाराज अपनी जनसभाओं में राष्ट्रीय मुद्दे उठा रहे हैं। वे लोगों को बता रहे हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कारण देश का राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुत मान बढ़ा है। पोकरण की जनता उन्हें वोट देकर सीधे नरेंद्र मोदी के हाथ मजबूत करेगी, इसलिए लोगों को उन्हें वोट करना चाहिए। मुसलमान मतदाताओं को भी वे यह बता रहे हैं कि वे 'सबके साथ, सबके विकास' के लिए काम कर रहे हैं। मुस्लिम मतदाताओं का एक वर्ग उनसे खासा प्रभावित बताया जा रहा है। उनकी जनसभाओं में हिंदू-मुस्लिम हाथ जोड़कर उन्हें सुनते हुए देखे जा रहे हैं।
क्या कहते हैं स्थानीय लोग
पोकरण की जिला अदालत में एक वकील चंदन सिंह राठौड़ बताते हैं कि शाले मोहम्मद मुस्लिम समुदाय के एक वर्ग के लोगों के ही नेता हैं। मुसलमानों में ही कुछ अन्य समुदाय प्रताप पुरी जी को सपोर्ट कर रहे हैं। पोकरण के स्थानीय दुकानदार श्रवण कुमार ने अमर उजाला से कहा कि शाले मोहम्मद ने यहां पर अच्छा कामकाज किया है, जनता को उनसे कोई परेशानी नहीं है। फिर भी लोग इस बार बदलाव की ओर देख रहे हैं। यहां की परंपरा भी हर बार विधायक बदलने की रही है। क्योंकि पिछली बार शाले मोहम्मद जीत चुके हैं, इस बार प्रताप पुरी जी महाराज की बारी है। लेकिन दूसरे व्यापारी अब्दुल मजीद बताते हैं कि स्थानीय जनता शाले मोहम्मद के व्यवहार और उनके कामकाज से बहुत संतुष्ट है। उन्हें यहां दोबारा अवसर मिल सकता है। उन्होंने कहा कि अशोक गहलोत सरकार की लोकप्रिय योजनाओं का असर है कि इस बार राजस्थान में भी सरकार बदलने की परंपरा टूट सकती है।