Rajasthan Election 2023: सबसे पहले प्रत्याशी घोषित करने थे, फिर क्यों पिछड़ी कांग्रेस? पहली सूची का इंतजार
Rajasthan Election 2023: सबसे पहले प्रत्याशियों के नामों की घोषण करने की बात कहने वाली कांग्रेस अब तक राजस्थान में अपने उम्मीदवार सामने नहीं ला पाई है। पिछले करीब एक साल से तैयारी कर रही कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं को तारीख पर तारीख दे रही है। आइए, समझते हैं ऐसा क्यों हो रहा है?
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राजस्थान सियासत के सबसे बड़े दंगल के लिए तैयार है। भाजपा ने 41 सीटों पर अपने चुनावी खिलाड़ियों (प्रत्याशियों) को मैदान में उतार दिया है। लेकिन, कांग्रेस अब तक प्रत्याशियों के नामों का एलान नहीं कर सकी है। ये वही पार्टी है जो सबसे पहले सितंबर में प्रत्याशियों के नामों की घोषणा करने की बात कह रही थी। आइए जानते हैं, ऐसा क्या हुआ, जिससे प्रत्याशियों की लिस्ट अभी तक अटकी हुई है।
कब तक आ सकती है पहली सूची?
सबसे पहले प्रत्याशियों की पहली सूची जारी करने की बात कहने वाली कांग्रेस अपनी योजना के अनुसार काम नहीं कर पाई। सितंबर में न तो दावेदारों के नामों की स्क्रूटनी हो पाई और न ही नामों का पैनल बन पाया। 10 अक्तूबर को सीएम गहलोत ने दिल्ली में सोनिया गांधी से मुलाकत की। इसके बाद उन्होंने कहा था- अभी तो हमने प्रक्रिया शुरू की है। सीईसी की बैठक होगी। इसके बाद ही कुछ फाइनल होगा। उन्होंने कहा कि मैं समझता हूं कि 18 के आसपास हम टिकट फाइनल होने की उम्मीद कर सकते हैं।
तारीख पर तारीख दे रही कांग्रेस
- 29 मई को संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने चुनवा को लेकर एक बयान दिया था। उन्होंने कहा था सितंबर के पहले सप्ताह में प्रत्याशियों की पहली सूची जारी करेंगे।
- 15 जून को सीएम अशोक गहलोत ने भी ऐसा ही बयान दिया था। उन्होंने चुनाव से तीन महीने पहले प्रत्याशियों की सूची जारी करने की बात कही थी।
- अगस्त महीने में संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल जयपुर दौरे पर आए थे। इस दौरान उन्होंने सितंबर के अंतिम या अक्तूबर के पहले सप्ताह में सूची जारी होना बताया था।
- 10 अक्तूबर को मुख्यमंत्री गहलोत ने 18 अक्तूबर तक टिकट फाइनल होने की बात कही।
कैसे सर्वे बन गए पार्टी के लिए मुसीबत?
प्रत्याशियों के चुनाव के लिए कांग्रेस ने अलग-अलग स्तर पर चार सर्वे कराए थे। कांग्रेस, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रभारी स्तर पर हुए इन सभी सर्वे के परिणाम अलग-अलग हैं। सूत्रों का कहना है कि जिस स्तर पर ये सर्वे कराए गए हैं, उसके गुट और पसंद के नेताओं को कमजोर होने के बाद भी कुछ बेहतर हालत में दिखाने की कोशिश की गई है, ताकि उस नेता का टिकट कटने की नौबत न आए। यही कारण है कि सर्वे के परिणाम अलग-अलग हैं। इस कारण से भी नामों पर सहमति नहीं बन पा रही है।
टिकट बंटवारे में क्या चाहते हैं गहलोत?
कांग्रेस से टिकट लेने वाले दावेदारों की लिस्ट लंबी है। पार्टी के नेता भी अपने समर्थकों के लिए टिकट मांग रहे हैं। वहीं, मुख्यमंत्री गहलोत भी अपने गुट के विधायकों और समर्थकों को टिकट दिलाने की कोशिश में हैं। वे चाहते हैं कि बागवत में साथ देने वाले विधायकों को टिकट दिया जाए। इनमें करीब 13 निर्दलीय विधायक भी शामिल हैं। दूसरी तरह कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य सचिन पायलट भी अपने समर्थक विधायकों को टिकट दिलाना चाहते हैं।
कितने नामों पर हो रहा मंथन?
प्रत्याशियों की सूची जारी नहीं करने वाली कांग्रेस अब 80 नामों पर मंथन कर रही है। इनमें ज्यादातर चेहरे पुराने बताए जा रहे हैं। एक चर्चा ये भी है कि प्रत्याशियों के एलान में देरी होने के कारण कांग्रेस पहली सूची में ही ज्यादा उम्मीदवारों की घोषणा कर सकती है।
टिकट फाइनल करने के लिए क्या हो रहा?
आज शुक्रवार को जयपुर में प्रदेश चुनाव समिति की बैठक हुई। इसमें टिकटों का फैसला हाईकमान पर छोड़ने के लिए एक लाइन का प्रस्ताव पास किया गया। अब ये पूरी कवायद दिल्ली पहुंच जाएगी। शनिवार को गौरव गोगोई की अध्यक्षता में दिल्ली में स्क्रीनिंग कमेटी की बैठकों का दौर शुरू होगा। नामों पर सहमति बनने के बाद लिस्ट जारी की जाएगी।