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Rajasthan: विधायक सोलंकी बोले, 'पायलट लाओ, राजस्थान बचाओ', सचिन का दर्द- मेरे नाम के आगे कितने पूर्व लगाओगे
Sat, 11 Jun 2022 11:06 PM IST
उदित दीक्षित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: उदित दीक्षित
Updated Sat, 11 Jun 2022 11:06 PM IST
सार
सोलंकी का पायलट लाओ और राजस्थान बचाओ के नारे ने प्रदेश नेतृत्व पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं पायलट का यह कहना कि इतनी कम उम्र में और कितने पूर्व लगाओगे इस बात के भी कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं।
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सचिन पायलट और वेद प्रकाश सोलंकी।
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
राजस्थान में राज्यसभा चुनाव के अगले दिन एक बार फिर सियासत गरमा गई है। पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के समर्थक विधायक ने पायलट लाओ, राजस्थान बचाओ का नारा लगाया तो वहीं पायलट को बार-बार पूर्व कहने जाने पर उनका भी दर्द छलक आया। यह सब करौली के श्रीमहावीरजी में किसान सम्मेलन और शहीद प्रतिमा अनावरण समारोह में हुआ।
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दरअसल, किसान सम्मेलन में सचिन पायलट के संबोधन से पहले किसी नेता ने उनके नाम के आगे कई सारे पूर्व लगाकर उनका परिचय दिया। इसके बाद जब पायलट सम्मेलन को संबोधित करने आए तो उन्होंने कहा, अभी भाषण में यह मेरा नाम ले रहे थे, ये पूर्व वो पूर्व कह रहे थे। इतनी कम उम्र में मेरे नाम के पीछे बहुत से पूर्व लगा दिए। मुझे पार्लियामेंट से पेंशन मिलती है। मैं पूर्व सासंद भी तो हूं। पूर्व उप मुख्यमंत्री, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, अब मेरे नाम के आगे और कितने पूर्व लगाओगे। पायलट के इस इस बयान के कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं।
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सम्मेलन में सचिन पायलट के समर्थक विधायक वेद प्रकाश सोलंकी ने भी सियासी भाषण दिया। पायलट के सामने सोलंकी ने कहा, 'पायलट लाओ, राजस्थान बचाओ'। उन्होंने आगे कहा, अभी आपने (पायलट) कहा कि यहां का तापमान 40 डिग्री है। आपने यहां का तापमान नाप लिया, लेकिन लोगों के दिलों में कितना टेंपरेचर है, यह नहीं मापा। इसे भी नापना पड़ेगा, अगर ऐसा नहीं किया तो समय नहीं बचेगा। 'पायलट साहब को लाओ, राजस्थान बचाओ' यह समय की मांग है। सोलंकी ने कहा, पायलट साहब का जहां पसीना गिरता है, हम साथ रहते हैं। क्योंकि, वह जो कहते हैं, वह करते हैं। वे और नेताओं की तरह नहीं हैं, जो कहते कुछ हैं और करते कुछ हैं।
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कांग्रेस में फिर शुरू हो सकती है सियासी खींचतान
सोलंकी का पायलट लाओ और राजस्थान बचाओ के नारे ने प्रदेश नेतृत्व पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं पायलट का यह कहना कि इतनी कम उम्र में और कितने पूर्व लगाओगे इस बात के भी कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में एक बार फिर सियासी कांग्रेस में सियासी टकराव देने को मिल सकता है।
गहलोत और पायलट की अदावत पुरानी
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट की अदावत पुरानी है। दोनों कई बार एक दूसरे का विरोध करते रहते हैं। सूत्रों का कहना यह भी कि दोनों नेता आपस में बात तक नहीं करते। राज्यसभा चुनाव की रणनीति के दौरान एक बैठक में होने के बाद भी दोनों के बीच कोई बात नहीं हुई थी। ऐसे में यह साफ है कि 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आ सकता है।