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Ajmer News: ‘अकेला मैं दोषी क्यों?’ 13 पत्रावलियों के मामले में पूर्व मेयर गहलोत का पलटवार, देवनानी को भी घेरा
Mon, 24 Aug 2026 08:31 AM IST
अजमेर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर
Published by: अजमेर ब्यूरो
Updated Mon, 24 Aug 2026 08:31 AM IST
सार
13 पत्रावलियों के मामले में खुद को अकेले दोषी ठहराए जाने पर पूर्व मेयर धर्मेंद्र गहलोत ने फिर सवाल उठाए हैं। वीडियो जारी कर उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया में अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की भूमिका रही, फिर कार्रवाई सिर्फ उनके खिलाफ क्यों?
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धर्मेंद्र गहलोत, पूर्व मेयर अजमेर नगर निगम
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भाजपा छोड़ चुके अजमेर नगर निगम के पूर्व मेयर धर्मेंद्र गहलोत ने 13 पत्रावलियों से जुड़े मामले को लेकर एक बार फिर वीडियो जारी किया है। करीब 6 मिनट 16 सेकंड के इस वीडियो में गहलोत ने मामले में उन्हें अकेले दोषी ठहराए जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि पूरी प्रक्रिया में कई अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की भूमिका रही है, ऐसे में कार्रवाई सिर्फ उनके खिलाफ क्यों की जा रही है।
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गहलोत ने कहा कि भवन स्वीकृति से जुड़ी पत्रावलियां महापौर के स्तर पर स्वीकृति के लिए नहीं आतीं और न ही इन पर उनके हस्ताक्षर हैं। उन्होंने दावा किया कि कमिश्नर और उपायुक्त के बीच विवाद के बाद जब 13 व्यापारियों की पत्रावलियां निरस्त की गईं, तब उन्होंने जनप्रतिनिधि होने के नाते जनता के पक्ष में आवाज उठाई।
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एम्पावर्ड कमेटी के फैसले का हवाला
पूर्व मेयर ने कहा कि मामला सरकार की ओर से गठित एम्पावर्ड कमेटी के सामने गया था। इसमें कमिश्नर स्तर के अधिकारी, एक्सईएन, तकनीकी और विधि अधिकारी शामिल थे। गहलोत के अनुसार कमेटी ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया था। ऐसे में केवल उन्हें दोषी ठहराना उचित नहीं है, जबकि प्रक्रिया में शामिल अन्य अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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साधारण सभा में भी सर्वसम्मति से हुआ था निर्णय
गहलोत ने कहा कि सरकार के निर्देश पर इन पत्रावलियों को साधारण सभा में रखने के लिए कहा गया था। उस समय बोर्ड की बैठक में पक्ष-विपक्ष के पार्षदों के साथ तत्कालीन आईएएस अधिकारी चिन्मयी गोपाल और आरएएस अधिकारी भी मौजूद थे। उन्होंने दावा किया कि बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय हुआ था। गहलोत ने कहा कि आज इस मामले को उठाने वाले चंद्रेश सांखला भी उस बैठक में मौजूद थे और उपस्थिति रजिस्टर पर उनके हस्ताक्षर हैं। उस समय उन्होंने कोई विरोध दर्ज नहीं कराया था।
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उन्होंने बताया कि कमिश्नर की ओर से नोट ऑफ डिसेंट लगाए जाने के बाद सरकार ने 26 अप्रैल 2019 को फिर से मामले को साधारण सभा में रखने के निर्देश दिए थे लेकिन करीब सात साल बीतने के बावजूद पत्रावलियां साधारण सभा में नहीं रखी गईं और आज भी नगर निगम में लंबित हैं। गहलोत ने सवाल उठाया कि जिन पत्रावलियों का अंतिम निस्तारण ही नहीं हुआ, उनमें उन्हें अकेले दोषी कैसे ठहराया जा सकता है?
देवनानी पर लगाए आरोप
गहलोत ने अपने वीडियो में विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ कार्रवाई दबाव की राजनीति के तहत की जा रही है। उन्होंने भाजपा नेता महेंद्र जादम और भाजपा जिलाध्यक्ष रमेश सोनी का भी नाम लेते हुए कहा कि उन्हें भी पूरे मामले की जानकारी है और उन्हें सच्चाई जनता के सामने रखनी चाहिए।
पुराने मामले का किया जिक्र
गहलोत ने वासुदेव देवनानी के शिक्षा मंत्री रहने के दौरान के एक पुराने मामले का भी जिक्र किया। उन्होंने कोटपूतली में कार्यरत कर्मचारी दिनेश शर्मा की आत्महत्या का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि कर्मचारी ने विभागीय दबाव और कथित वसूली से जुड़े मामलों के चलते कार्यालय में फांसी लगाकर आत्महत्या की थी। गहलोत ने दावा किया कि कर्मचारी की दो बेटियों ने इस मामले की शिकायत प्रधानमंत्री तक की थी लेकिन प्रभाव का इस्तेमाल कर जांच को दबा दिया गया। उन्होंने इस मामले की भी निष्पक्ष जांच कर सच्चाई जनता के सामने लाने की मांग की।
भाजपा से इस्तीफे पर भी दी सफाई
गहलोत ने कहा कि जब उन पर दोषी होने का आरोप सामने आया तो पार्टी पर कोई आंच न आए, इसलिए उन्होंने खुद भाजपा की सदस्यता से इस्तीफा दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक वे इस मामले में पूरी तरह दोषमुक्त नहीं हो जाते, तब तक भाजपा में शामिल नहीं होंगे। पूर्व मेयर ने कहा कि एक जनप्रतिनिधि होने के नाते उनका उद्देश्य जनता के सामने पूरे मामले की सच्चाई रखना है, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।