फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Rajasthan ›   Rajasthan Cm Gehlot and Ex Cm Vasundhara raje never get defeat in Assembly Election

Rajasthan: 33 सालों से हर बार बदलती है सत्ता, पर गहलोत-वसुंधरा एक बार भी नहीं हारे; जानें पूरी सियासी कहानी

Fri, 05 May 2023 04:28 PM IST
नीरज शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: नीरज शर्मा Updated Fri, 05 May 2023 04:28 PM IST
सार

राजस्थान में दो कद्दावर नेता ऐसे हैं जिनका तोड़ कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही पार्टियां नहीं खोज पाई हैं। सीएम अशोक गहलोत के सामने जोधपुर की सरदारपुरा और पूर्व सीएम वसुंधरा राजे के सामने झालावाड़ की झालरापाटन सीट पर टक्कर देने वाला नेता नहीं मिला।

विज्ञापन
Rajasthan Cm Gehlot and Ex Cm Vasundhara raje never get defeat in Assembly Election
सत्ता बदलती, गहलोत-वसुंधरा नहीं हारते विधानसभा चुनाव, सरदारपुरा में 1999, झालरापाटन में 2003 से रीत - फोटो : फाइल फोटो।

विस्तार

राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 की रणभेरी बज चुकी है। तीन बार के सीएम अशोक गहलोत अपनी सरकार की योजनाओं के दम पर फिर से चौथी बार सीएम बनने की कवायद में जुट गए हैं। जबकि दो बार की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे भी झालावाड़ के झालरापाटन से विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी हैं और राजस्थान की रीत के मुताबिक अबकी बार बीजेपी सरकार आने का दावा कर रही हैं। राजस्थान की परिपाटी रही है कि एक बार 5 साल के लिए कांग्रेस और दूसरी बार 5 साल के लिए बीजेपी के पास सत्ता रहती है। यहां की जनता हर बार बदलाव तो करती है, लेकिन द्विदलीय व्यवस्था के आधार पर ही यह सत्ता हस्तांतरण पिछले 30 साल से होता आया है।
विज्ञापन

 
लेकिन सीएम गहलोत और पूर्व सीएम वसुंधरा राजे दो ऐसे चेहरे हैं, जो इस सत्ता परिवर्तन के बाद भी कभी चुनाव खुद नहीं हारते। मंत्री-विधायक चुनाव हार जाते हैं, लेकिन गहलोत और वसुंधरा राजे अपनी-अपनी सीटों से हर बार जीतकर आते हैं। साल 2003 से लेकर अब तक 20 साल का रिकॉर्ड यही कहता है। अशोक गहलोत का गढ़ जोधपुर की सरदारपुरा विधानसभा सीट है। जबकि वसुंधरा राजे का गढ़ झालावाड़ जिले का झालरापाटन है। गहलोत गांधीवादी छवि, सादगी और सहज-सुलभ व्यवहार और क्षेत्र में विकास कार्यों के कारण चुनाव जीतते आ रहे हैं। वसुंधरा राजे भी ग्वालियर की रॉयल सिंधिया फैमिली से होने के बावजूद जनता में अपनी मजबूत पकड़, विश्वास, क्षेत्र में विकास कार्यों की सौगात के बल पर चुनाव जीतती आ रही हैं। गहलोत और वसुंधरा राजे 5-5 बार विधायकी का चुनाव जीत चुके हैं। दोनों ही 5-5 बार सांसद भी रह चुके हैं।
विज्ञापन

 
2023 के आखिर में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में एक बार फिर कांग्रेस के लिए झालरापाटन में वसुंधरा राजे को और बीजेपी के लिए सरदारपुरा सीट पर अशोक गहलोत को मजबूत टक्कर देने वाले प्रत्याशी की तलाश है। लेकिन दोनों पार्टियां अब तक ऐसा प्रत्याशी खोजने में नाकाम रही हैं जो राजस्थान की राजनीति के इन मजबूत किलों को ढहा सकें। राजस्थान में झालरापाटन को आम बोलचाल की भाषा में वसुंधरा राजे की सीट और सरदारपुरा को अशोक गहलोत की सीट ही बोला जाता है। 2018 में मानवेंद्र सिंह जसोल को कांग्रेस ने झालरापाटन से टिकट देकर बदलाव की उम्मीद के साथ उतारा था। लेकिन महारानी (वसुंधरा राजे) के सामने बागी कैंडिडेट टिक नहीं पाया।  बीजेपी के संस्थापक सदस्य, अटल बिहारी सरकार में कद्दावर नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री जसवंत सिंह जसोल के बेटे मानवेंद्र सिंह भी वसुंधरा राजे को हरा नहीं सके। कांग्रेस टिकट पर यह चुनाव लड़कर उन्होंने अपनी किरकिरी ही करवाई। वसुंधरा राजे के कारण मानवेंद्र बीजेपी में घरवापसी की हिम्मत तक नहीं जुटा पा रहे। इससे पहले मजबूत कोशिश सचिन पायलट की माताजी रमा पायलट को 2003 में झालरापाटन से चुनाव लड़ाकर भी की गई थी। लेकिन रमा पायलट को भी वसुंधरा राजे से करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा था। झालरापाटन और यूं कहें कि झालावाड़ में वसुंधरा राजे का एकल वर्चस्व चला आ रहा है। झालावाड़-बारां सीट से वसुंधरा राजे के बेटे दुष्यंत सिंह ही बीजपी के सांसद हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

 
वसुंधरा राजे की लोकप्रियता की वजह? 
कभी झालावाड़ जिला राजस्थान में उपेक्षित जिलों की गिनती में आता था। लेकिन इस पूरे क्षेत्र की कायापलट का श्रेय वसुंधरा राजे को जाता है। पीने के पानी की व्यवस्था,  गाँव-ढाणी तक बिजली पहुंचने, शिक्षा के लिए स्कूल-कॉलेज, सरकारी अस्पताल, पांच सितारा होटल-रिसॉर्ट, मुकुंदरा हिल्स वन्यजीव अभ्यारण्य, झालवाड़ में एयर स्ट्रिप,  रेलवे कनेक्टिविटी,  गौरव पथ,   टेक्निकल यूनिवर्सिटी, इंडस्ट्री और फैक्ट्रियां, पावर प्लांट, सड़कें, सौंदर्यीकरण समेत कई विकास के काम वसुंधरा राजे ने यहां करवाए। हजारों करोड़ का बजट वसुंधरा के कार्यकाल में झालावाड़ के विकास के लिए मिला। जिससे क्षेत्र की तकदीर और तस्वीर बदली। झालावाड़ की गिनती प्रदेश के शीर्ष जिलों में होने लगी। क्षेत्र में इसी विकास के कारण वसुंधरा राजे पर क्षेत्र के लोगों को पूरा विश्वास है और राजे की उन पर मजबूत पकड़ है।
 
सचिन पायलट की मां रमा पायलट और जसवंत सिंह के बेटे मानवेंद्र सिंह भी हारे 
2003 में कांग्रेस प्रत्याशी रमा पायलट झालरापाटन से वसुंधरा राजे से चुनाव हारी थीं। राजे ने उन्हें 27 हजार 375 मतों से हराया था। 2018 विधानसभा चुनाव में राजे ने कांग्रेस कैंडिडेट मानवेंद्र सिंह को 34980 वोटों के अंतर से हराया था। इसलिए झालरापाटन वसुंधरा राजे का अजेय गढ़ है। कांग्रेस यहां रमा पायलट, मीनाक्षी चंद्रावत, मानवेंद्र सिंह, दिवंगत हो चुके अबरार अहमद, भरत सिंह जैसे नेताओं को उतार चुकी है। लेकिन कोई यहां टिक नहीं सका। 1998 में झालरापाटन में कांग्रेस के मोहनलाल ने पार्टी की आखिरी जीत दर्ज करवाई थी। उसके बाद से कोई कांग्रेस कैंडिडेट वसुंधरा के आने के बाद जीत नहीं सका।
 
वसुंधरा राजे 2 बार सीएम, 5 बार विधायक, 5 बार की सांसद रहीं 
8 मार्च 1953 को जन्मी वसुंधरा राजे 70 साल से ऊपर की हो चुकी हैं। वसुंधरा राजे 5 बार की विधायक और दो बार सीएम रह चुकी हैं। 2003 से लगातार झालरापाटन से चुनाव जीतती आ रही हैं। राजे 2003 और 2013 के विधानसभा चुनाव में राजस्थान की सीएम बनीं। वसुंधरा राजे 5 बार लोकसभा सांसद भी रहीं। 9वीं से 13वीं लोकसभा तक राजे लगातार सांसद चुनी गईं। वसुंधरा राजे केंद्र सरकार में एक्सटर्नल अफेयर्स राज्यमंत्री और स्मॉल स्केल मंत्रालय की भी राज्य मंत्री रह चुकी हैं। झालरापाटन वसुंधरा राजे का गढ़ है। उनके पुत्र दुष्यंत सिंह झालावाड़-बारां सीट से लोकसभा के सांसद हैं। वैसे वसुंधरा राजे ने 1985 में राजस्थान के धौलपुर से विधायक का चुनाव जीतकर अपना राजनीतिक जीवन प्रदेश में शुरू किया था। राजे लगातार 5 बार झालावाड़ से सांसद भी रहीं। इससे पहले वसुंधरा राजे ने भाजपा से 1984 में मध्यप्रदेश की भिंड लोकसभा सीट से पहला चुनाव लड़ा था। तब इंदिरा गांधी की हत्या से उपजी सहानुभूति की लहर में वे चुनाव हार गईं थीं। तब भाजपा को पूरे देश में मात्र दो सीटें मिली थीं। लेकिन राजस्थान वसुंधरा राजे के लिए लकी रहा। यहां धौलपुर की बहू होने के कारण जनता का अपार समर्थन उन्हें मिला।
 
सीएम अशोक गहलोत का गढ़ जोधपुर का सरदारपुरा क्षेत्र
सीएम अशोक गहलोत राजस्थान में राजनीति के जादूगर कहे जाते हैं। गहलोत 1998, 2008 और 2018 में तीन बार सीएम बने। गहलोत ने 1977 में जोधपुर के सरदारपुरा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़कर अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत की। इस पहले चुनाव में गहलोत हार गए थे। लेकिन 1980 के मध्यावधि चुनाव में गहलोत को जोधपुर से लोकसभा प्रत्याशी घोषित किया गया। वे यहां से सांसद बनकर पहली बार सीधे राष्ट्रीय राजनीति में पहुंच गए। अशोक गहलोत इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और पीवी नरसिम्हा राव की केंद्र सरकार में पर्यटन, खेल और नागरिक उड्डयन मामलों के राज्य मंत्री रहे हैं। अशोक गहलोत को हालांकि 1989 के लोकसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। भाजपा नेता जसवंत सिंह ने गहलोत को तब हराया था। लेकिन इसके बाद लगातार 3 बार गहलोत जोधपुर के सांसद चुने गए।
 
मानसिंह देवड़ा ने गहलोत के लिए खाली की थी सरदारपुरा सीट
कांग्रेस हाईकमान के निर्देश पर 1998 में गहलोत पहली बार राजस्थान के मुख्यमंत्री बने। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि तब गहलोत विधायक नहीं थे, तो उनके लिए सरदारपुरा सीट से जीते मानसिंह देवड़ा ने इस्तीफा दे दिया था। फिर गहलोत ने उपचुनाव में जीत हासिल की और सीएम की कुर्सी पक्की कर ली। इसके बाद से वे सरदारपुर विधानसभा से चुनाव लड़ रहे हैं। यहां से वे लगातार 5 बार विधानसभा का चुनाव जीत चुके हैं। बड़ी बात यह है कि 2013 के चुनाव से पहले कांग्रेस सत्ता में थी, वह जब ऐतिहासिक हार के साथ केवल 21 सीटों पर सिमट गई, तब भी अशोक गहलोत सरदारपुरा से विधायकी का चुनाव जीत गए थे। तब गहलोत मंत्रिमंडल में मंत्री रहे ज्यादातर सभी नेता चुनाव हार गए थे।
 
गहलोत की सरदारपुरा सीट से 5 बार विधायक के रूप में जीत 
सरदारपुरा विधानसभा सीट से 1999 में गहलोत 49 हजार वोटों से जीते थे। 2003 विधानसभा चुनाव में गहलोत ने बीजेपी के महेंद्र झाबक को 24 हजार वोटों से हराया। 2008 के विधानसभा चुनाव में अशोक गहलोत ने बीजेपी के राजेंद्र गहलोत को 16 हजार वोट से हराया और दूसरी बार सीएम बने। फिर साल 2013 में गहलोत ने बीजेपी के शंभू सिंह खेतासर को 18 हजार वोटों से हराया, लेकिन प्रदेश में बीजेपी सरकार बनी। 2018 में अशोक गहलोत ने बीजेपी के शंभू सिंह खेतासर को 48 हजार वोटों से चुनाव हराया और तीसरी बार राजस्थान के सीएम बने।
 
5 बार लोकसभा चुनाव भी जोधपुर से जीते गहलोत 
अशोक गहलोत ने जोधपुर संसदीय क्षेत्र से 5 बार लोकसभा चुनाव भी जीता। गहलोत ने 1980, 1985, 1991, 1996 और 1998 के मध्यावर्ती चुनाव में लोकसभा सीट जीती। गहलोत 1990 में जसवंत सिंह से चुनाव हारे थे।


गहलोत की लोकप्रियता का कारण?
सीएम अशोक गहलोत सरदारपुरा और गृहजिले जोधपुर में सीएम बनने के बाद भी लगातार दौरे करते हैं। जोधपुर में AIIMS, आईआईटी,  नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, निफ्ट, एफडीडीआई, आयुर्वेद यूनिवर्सिटी जैसी संस्थाएं खुलवाने का श्रेय गहलोत को दिया जाता है। 600 करोड़ लागत की पहली डिजीटल यूनिवर्सिटी भी जोधपुर में खुलने जा रही है। फिर क्रिकेट स्टेडियम की बात करें या अस्पताल, बिजली,पानी, सड़कों और स्टेट हाईवेज के डवलपमेंट की। जोधपुर पुलिस कमिश्नरेट खोलने में भी गहलोत का हाथ रहा। जोधपुर में इंडस्ट्रियल डवलपमेंट, हैंडिक्राफ्ट, टूरिज्म, किसानों के लिए योजनाएं गहलोत ने खूब दी हैं। अशोक गहलोत सीएम रहने के बावजूद सरकारपुरा और जोधपुर को पूरा समय देते हैं। जयपुर में जोधपुर के लोगों के काम सीएमआर और सीएमओ में प्राथमिकता से होते है। जोधपुर के लोगों से मिलने के लिए गहलोत हमेशा तैयार रहते हैं। अपणायत और सहज सुलभ लोगों से मुलाकात और गांधीवादी सादगी के कारण गहलोत से सरदारपुरा का खासा लगाव है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed