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Exclusive: कर्ज तले BJP की नई सरकार, तोहफे में मिलेंगे 30000 करोड़ के पेंडिंग बिल, जानिए कैसे हैं आर्थिक हालात

Sat, 09 Dec 2023 07:43 PM IST
Sourabh Bhatt सौरभ भट्ट
Updated Sat, 09 Dec 2023 07:43 PM IST
सार

नई सरकार को राजस्थान की सत्ता संभालते ही एक जनवरी को फसल बीमा, ईपंचायत, सोशल सिक्यूरिटी पेंशन, एसआईपी, आरजीएचएस, चिरंजीवी, केंद्रीय परियोजनाओं के लिए केंद्र से मिले पैसे और ठेकेदारों के  भुगतान समेत कई अन्य योजनाओं को मिलाकर 30 हजार करोड़ के पेंडिंग बिलों का तोहफा मिलने वाला है। पढ़िए, पूरी रिपोर्ट...।  

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Rajasthan Buried Under Debt New BJP government pay bill of Rs 30 thousand crores
राजस्थान में सरकार चलाना आसान नहीं। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजस्थान की सत्ता भाजपा को संभालनी है। आने वाले तीन-चार दिन में राजस्थान के मुख्यमंत्री और मंत्रियों का शपथ ग्रहण समारोह होने वाला है। लेकिन, नई सरकार के लिए आगे का रास्ता मुश्किल नजर आ रहा है। ऐसा इसलिए है क्योंकि राज्य के आर्थिक हालात आईसीयू में है। वित्तीय कुप्रबंधन के चलते नई सरकार को  30 हजार करोड़ बकाया बिल तोहफे में मिलेगा। 

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राजस्थान को इस वित्तीय वर्ष में दिसंबर तक के लिए जो 45 हजार करोड़ रुपए की बोरोइंग लिमिट मिली थी। वह लिमिट लगभग पूरी हो चुकी है। अब एक जनवरी के पेंडिंग भुगतान के रूप में 30 हजार करोड़ के पेडिंग बिल ट्रेजरीज में पड़े हुए हैं। इसके अलावा गहलोत सरकार चुनावी वक्त में जिन बड़ी घोषणाओं के लिए वित्तीय स्वीकृति जारी कर गई उनके बिल अभी ट्रेजरी में पहुंचने बाकी हैं। यह राशि करीब 10 हजार करोड़ बताई जा रही है।
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चुनौती ये कि कहां से कर्ज चुकाएगी सरकार 
इन बकाया बिलों को चुकाने के लिए फिलहाल सरकार के पास न कर्ज लेने की लिमिट बाकी रही और न ही राज्य में राजस्व के स्रोत हैं। ऐसे में नई सरकार के लिए यह चुनौती सबसे बड़ी है कि सत्ता संभालने के बाद इन बकाया बिलों का बंदोबस्त कहां से और कैसे करेगी। इससे भी बड़ी चिंता की बात यह है कि गत सरकार के अंतिम महीनों में वित्त विभाग के अफसरों ने जमकर ऑफ बजट बोरोइंग भी कर डाली जिसका फिलहाल बजट में हिसाब नहीं जुड़ा है। यह राशि जुड़ जाए तो राजस्थान आर्थिक आपातकाल में निश्चित रूप से प्रवेश कर जाएगा। 
 
जानिए जो पैसा आया आखिर वह गया कहां?
राजस्थान सरकार ने 45 हजार करोड़ का जो कर्ज लिया था, उसमें 3500 करोड़ के फ्री मोबाइल बांट दिए। 500 करोड़ महंगाई राहत कैंपों की व्यवस्थाओं पर खर्च कर दिए गए। इसमें वित्त विभाग के शीर्ष अफसरों ने जमकर चांदी काटी।

सरकारी कर्मचारियों के लिए आरजीएचएस बंद 
पिछली गहलोत सरकार की हेल्थ स्कीम आरजीएचएस और चिरंजीवी लगभग बंद हो गई है। इसकी वजह आने वाली सरकार नहीं, बल्कि वित्त विभाग के अफसर हैं जिन्होंने दोनों बड़ी योजनाओं का पैसा ही नहीं चुकाया। आरजीएचएस के 300 करोड़ और चिरंजीवी योजना के 150 करोड़ से ज्यादा के बिल ट्रेजरी में पेंडिंग पड़े हैं। वहीं, निशुल्क दवा योजना का 300 करोड़ का बिल बकाया है, जिसके चलते अस्पतालों में फ्री दवाएं भी नहीं मिल रही।

जबाव देने से बचते रहे जिम्मेदार, जो दावे किए वे भी झूठे निकले 
भुगतान से जुड़े मामलों में वित्त बजट और कोष निदेशालय की सीधी भूमिका होती है। अमर उजाला ने बजट निदेशालय के निदेशक बृजेश किशोर शर्मा, संयुक्त सचिव पवन जैमन और निदेशक कोष भूपेश माथुर से संपर्क किया। इनमें बृजेश शर्मा के अलावा किसी ने भी सवालों का जवाब नहीं दिया। डायरेक्टर बजट, बृजेश किशोर शर्मा ने कहा- जिनका भी पेंडिंग है उन्हें क्यू में लगा रखा है। कुछ हजार करोड़ की पेंडेंसी तो चलती है।  30 से 35 दिन में भुगतान का नंबर आ रहा है। आप जैसा कह रहे हैं वैसा कुछ नहीं है। मामले को लेकर निदेशक कोष लेखा एवं पदेन संयुक्त सचिव भूपेश माथुर से संपर्क कर जब सरकार में पेंडिंग बिलों के संबंध में जानकारी चाही गई तो वे कोई जवाब नहीं दे पाए और बात करने से ही मना कर दिया।

दावों को धराशायी करती सच्चाई

  • वित्त विभाग का दावा 35 दिन की पेंडेंसी, लेकिन हकीकत में 2 से 6 महीने तक के बिल बकाया
  • क्रॉप इंश्योरेंस 700 करोड़ 2 महीने से नहीं हुआ। किसान वर्ग सीधा प्रभावित।
  • सोशल सिक्योरिटी पेंशन भुगतान 2 महीने से नहीं हुआ। 1700 करोड़ रुपए का भुगतान बाकी। 90 लाख लोग इससे सीधे जुड़े हैं।
  • ई पंचायत 650 करोड़ रुपए का भुगतान 6 महीनों से नहीं किया गया। ग्रामीण प्रभावित।
  • पेंशनर क्लेम सितंबर से बकाया।
  • वेतन के एरियर सितंबर से बकाया। 

 
नहीं हो पा रहे हैं काम
सरपंच संघ के अध्यक्ष बंशीधर गड़वाल ने कहा कि पंचायतों को केंद्रीय वित्त आयोग और राज्य वित्त आयोग की तरफ से जो ग्रांट मिलनी चाहिए थी वह नहीं मिली है। हर पंचायत को इस सहायता से 10 से 15 लाख रुपए आवंटित होते हैं जिससे सड़क, नाली, भवन मरम्मत और साफ-सफाई जैसे काम होते हैं। लेकिन, राशि नहीं मिलने से अब ये काम नहीं हो पा रहे हैं।

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