राजस्थान चुनाव 2018: राहुल के किसान कार्ड और वसुंधरा के महिला सशक्तीकरण के बीच है मुकाबला
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दिसंबर के महीने के शुरुआती दिनों में सुबह शाम होने वाली गुलाबी ठंड राजस्थान को अपने आगोश में ले चुकी है, लेकिन विधानसभा चुनावों की गरमी इस खुशगवार मौसम पर भारी पड़ रही है। छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश से फुर्सत पाकर कांग्रेस भाजपा के स्टार प्रचाकर अब देश के इस पश्चिमी प्रदेश में धूल और रेत फांकते हुए अपने अपने दलों को जिताने में जी जान एक किए हुए हैं।
हनुमान जी की जाति से लेकर चौकीदार के कुत्ते तक के जुमलों से भले ही स्टार प्रचारक मंचों से तालियां बटोर रहे हों और टीवी न्यूज चैनलों के पर्दे पर उन पर मारक बहसें हो रही हों, लेकिन जमीन पर आम लोगों के बीच इन मुद्दों का कोइ असर नहीं दिख रहा है। जमीन पर मुकाबला राहुल गांधी के किसान कार्ड और वसुंधरा राजे के महिला कार्ड के बीच है। किसानों की कर्ज माफी का कांग्रेस का वादा गावों और कस्बों में लोगों को छू रहा है तो भामाशाह कार्ड के जरिए महिलाओं के सशक्तीकरण की कोशिश से भाजपा को महिलाओं के समर्थन की उम्मीद है।
लेकिन आम लोगों के बीच बातचीत करने पर सरकार के कामकाज से असंतोष की झलक जरूर मिलती है। अब अगले तीन चार दिनों में भाजपा इससे कैसे निजात पाती है या कांग्रेस कैसे इसे अपने पक्ष में हवा के रूप में बदलती है, इस पर ही चुनाव नतीजों का सारा दारोमदार है।
अलवर, बहरोड़, शाहपुरा, कोटपूतली, जयपुर शहर कहीं भी लोगों से बात कीजिए तो ज्यादातर लोग राज्य सरकार के कामकाज को लेकर खुश नजर नही दिखते हैं। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और उनके मंत्रियों के व्यवहार से सिर्फ आम जनता ही नहीं भाजपा कार्यकर्ताओं तक को शिकायत है। शाहपुरा में एक दुकान पर बैठे लोगों से बात होती है।शुरुआती झिझक के बाद लोग स्थानीय सीट और समीकरण की चर्चा करते हैं।
कांग्रेस भाजपा से ज्यादा निर्दलीय उम्मीदवार का जोर है
होटल में काम करने वाले भवानी सिंह के मुताबिक यहां कांग्रेस भाजपा से ज्यादा निर्दलीय उम्मीदवार का जोर है। कहते हैं कि दोनों पार्टियों को आजमा कर देख लिया। लेकिन सोहनलाल कहते हैं कि भाजपा कांग्रेस में टक्कर है, लेकिन इस सीट पर भाजपा के मुकाबले कांग्रेस कुछ कमजोर है।
साथ ही सोहनलाल यह भी जोड़ते हैं कि यहां भले ही भाजपा भारी हो, लेकिन जयपुर और उसके आगे कांग्रस का जोर ज्यादा है। उनकी बात का समर्थन राजस्थानी जैकेट और एंटीक बेचने वाले बीरबल भी करते हैं। कहते हैं कि इस बार कांग्रेस की हवा ज्यादा दिख रही है।
कोटपूतली में भाजपा कार्यकर्ता रमेश कुमार से मुलाकात होती है। रमेश मानते हैं कि शुरुआती दौर में सरकार से नाराजगी और कार्यकर्ताओं की उपेक्षा से पार्टी पिछड़ रही थी, लेकिन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने दिन रात मेहनत करके मुकाबले को कड़ा बना दिया है। अब रूठे हुए पार्टी कार्यकर्ता भी सक्रिय हो गए हैं।
मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने हर परिवार में महिलाओं को मुखिया बना दिया
रमेश के मुताबिक भामाशाह कार्ड के जरिए मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने हर परिवार में महिलाओं को मुखिया बना दिया है। इससे महिला सशक्तिकरण तेज हुआ और महिलाओं के बीच मुख्यमंत्री की लोकप्रियता बढ़ी है और अगर महिलाएं भाजपा के साथ एकमुश्त आ गईं तो दोबारा सरकार बनने से कोई रोक नहीं सकता।
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वहीं जयपुर में कांग्रेस कार्यकर्ता सुनील शर्मा कहते हैं कि राजस्थान में सबसे बड़ा मुद्दा किसानों की बदहाली, बिजली का संकट, बेरोजगारी, व्यापार का चौपट होना और खराब जनसेवाएं हैं। कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में किसानों की कर्ज माफी का जो वादा किया है,उसने राज्य के किसानों में एक उम्मीद जगा दी है।
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सुनील का दावा है कि किसानों और युवाओं का एकमुश्त समर्थन कांग्रेस को मिल रहा है और सूबे में कांग्रेस सरकार बनना तय है। दावे प्रति दावे अपनी जगह हैं, लेकिन महिलाओं में वसुंधरा की अपील और किसानों में राहुल गांधी की कर्ज माफी का असर साफ तौर पर देखा जा सकता है। लोग जाति और धर्म की नहीं अपने क्षेत्र के पिछड़ेपन और दूसरे जरूरी मुद्दों पर ज्यादा बात करते हैं।
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