{"_id":"5bf003e8bdec2204de7417d5","slug":"rajasthan-assembly-elections-2018-amit-shah-vasundhara-strategy-win-polls","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"...तो कुछ इस तरह राजस्थान में अमित शाह और वसुंधरा ने बिछाया है सत्ता वापसी का शतरंज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
...तो कुछ इस तरह राजस्थान में अमित शाह और वसुंधरा ने बिछाया है सत्ता वापसी का शतरंज
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 17 Nov 2018 07:30 PM IST
विज्ञापन
अमित शाह, वसुंधरा राजे
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भाजपा और कांग्रेस दोनों अपने प्रत्याशियों की आखिरी सूची जारी करने के लिए मंंथन में व्यस्त हैं। 200 सदस्यीय सीट के लिए कांग्रेस 184 तो भाजपा ने दो बार में 170 उम्मीदवारों की सूची जारी कर चुकी है। कांग्रेस को भाजपा की 30 तो भाजपा को कांग्रेस के 16 उम्मीदवारों की सूची आने का इंतजार है। कांग्रेस जहां जीत का सपना देख रही है, वहीं भाजपा ने चुनाव में लगातार दोबारा विजय श्री पाने के लिए सभी घोड़े खोल दिए हैं ।मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के चेहरे को आगे करके भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने सत्ता में वापसी का शतरंज सजा दिया है।
-162 उम्मीदवारों में पार्टी ने एक भी मुसलमान उम्मीदवार नहीं उतारा है। अपने सांसद हबीबुर्र रहमान का टिकट काट लिया तो वह कांग्रेस का दामन थाम चुके हैं। वसुंधरा सरकार के अच्छा काम करने वाले मंत्री यूनुस खान भी टिकट से वंचित रह गए। दूसरी सूची में भी उन्हें जगह नहीं मिली है। हालांकि उनकी सीट नागौर से भाजपा ने अभी प्रत्याशी भी घोषित नहीं किया है। ऐसा करके पूरे राजस्थान में हिन्दुत्व का छिपा संदेश देने की कोशिश की है।
विज्ञापन
-वसुंधरा सरकार या फिर वर्तमान जन प्रतिनिधियों से जनता की नाराजगी को देखते हुए खराब परफॉरमेंस वाले लोगों के टिकट कटे और 162 में से 32 नये चेहरों को जगह दी है।
-भाजपा ने पांच मंत्री सहित 43 वर्तमान विधायकों के टिकट काटकर और 93 वर्तमान विधायकों पर भरोसा जताया है। यदि मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का हठ न चला होता है तो यह संख्या 93 से भी काफी कम होती। हालांकि वसुंधरा अपने चहेते विधायकों को टिकट दिलाने में सफल रहीं, लेकिन मंत्री यूनुस खान को चाहकर भी टिकट नहीं दिला पाई। उनके टिकट पर संशय बरकरार है।
-पार्टी ने 24 से अधिक अनुसूचित जाति और 22 अनुसूचित जनजाति के लोगों को मैदान में उतारा है। 15 महिला प्रत्याशी को भी अवसर दिया है। 35 से अधिक युवाओं को मौका मिला है।
विज्ञापन
शाह चल रहे हैं हर दांव
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का मानना है कि सत्ता में न रहने पर होमगार्ड भी सैल्यूट नहीं मारता। यह सीख उन्होंने राजस्थान भाजपा कार्यकर्ताओं को एकजुट होने और आपसी नाराजगी दूर करके पार्टी को सत्ता में लाने के लिए दिया था। वह खुद पर भी इसे अजमा रहे हैं और हर दांव चल रहे हैं।
विज्ञापन
-162 उम्मीदवारों में पार्टी ने एक भी मुसलमान उम्मीदवार नहीं उतारा है। अपने सांसद हबीबुर्र रहमान का टिकट काट लिया तो वह कांग्रेस का दामन थाम चुके हैं। वसुंधरा सरकार के अच्छा काम करने वाले मंत्री यूनुस खान भी टिकट से वंचित रह गए। दूसरी सूची में भी उन्हें जगह नहीं मिली है। हालांकि उनकी सीट नागौर से भाजपा ने अभी प्रत्याशी भी घोषित नहीं किया है। ऐसा करके पूरे राजस्थान में हिन्दुत्व का छिपा संदेश देने की कोशिश की है।
विज्ञापन
-वसुंधरा सरकार या फिर वर्तमान जन प्रतिनिधियों से जनता की नाराजगी को देखते हुए खराब परफॉरमेंस वाले लोगों के टिकट कटे और 162 में से 32 नये चेहरों को जगह दी है।
-भाजपा ने पांच मंत्री सहित 43 वर्तमान विधायकों के टिकट काटकर और 93 वर्तमान विधायकों पर भरोसा जताया है। यदि मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का हठ न चला होता है तो यह संख्या 93 से भी काफी कम होती। हालांकि वसुंधरा अपने चहेते विधायकों को टिकट दिलाने में सफल रहीं, लेकिन मंत्री यूनुस खान को चाहकर भी टिकट नहीं दिला पाई। उनके टिकट पर संशय बरकरार है।
-पार्टी ने 24 से अधिक अनुसूचित जाति और 22 अनुसूचित जनजाति के लोगों को मैदान में उतारा है। 15 महिला प्रत्याशी को भी अवसर दिया है। 35 से अधिक युवाओं को मौका मिला है।
वंशवाद का भी लिया सहारा
राजस्थान, परंपरा और अनूठी संस्कृति का राज्य है। यहां भाजपा ने भी वंशवाद का सहारा लिया है। वसुंधरा से नाराज होकर पूर्व केन्द्रीय मंत्री जसवंत सिंह के बेटे मानवेंद्र सिंह को बागी बनकर कांग्रेस में शामिल होने दिया। वहीं पूर्व मंत्री दिगंबर सिंह, स्व. सांवर लाल जाट, धर्मपाल चौधरी, सुंदर लाल, कुंजी लाल मीणा के बेटों तथा देवी सिंह भाटी की बहू को चुनाव मैदान में उतारा है।दल बदलुओं का किया आदर
अमित शाह, वसुंधरा राजे