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राजस्थान चुनाव : क्या पानी की किल्लत इस बार वसुंधरा के इरादों पर फेर देगी पानी?
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, बाड़मेर
Updated Thu, 06 Dec 2018 01:34 PM IST
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वसुंधरा राजे (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : Amar Ujala Graphic
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रेहाना खान की दिली ख्वाहिश है - "पानी चाहिए।" राजस्थान के बाड़मेर शहर से 145 किलोमीटर दूर पाकिस्तान से सटी सीमा पर भारत का आखिरी गांव हैं बणी की बस्ती। रेहाना अपने परिवार के साथ इसी गांव में रहती हैं। कुछ दिनों पहले उनकी दो गायों ने प्यास से तड़प कर दम तोड़ दिया। उनका परिवार पानी खरीद कर पीता है। हफ्ते में एक बार उनके गांव में आने वाला पानी का टैंकर उन्हें 10 हजार लीटर पानी देने के बदले में चार हजार रुपये वसूलता है। राज्य की विधानसभा में 53 विधायकों को चुन कर भेजने वाले पश्चिमी राजस्थान में महिलाओं को क्या संघर्ष करना पड़ता है, रेहाना का परिवार इसका उदाहरण है।
विधानसभा के लिए 7 दिसंबर को होनेवाले मतदान के लिए प्रदेश के चार करोड़ 30 लाख मतदाताओं में खासकर दो करोड़ 20 लाख महिला वोटरों के लिए पानी एक बड़ा चुनावी मुद्दा है। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक बीते गर्मी में पानी के लिए हिंसक विरोध प्रदर्शन झेल चुके शहरी क्षेत्र उदयपुर और जोधपुर साथ ही धौलपुर और भीलवाड़ा जैसे ग्रामीण इलाकों में भी पानी के लिए भीषण किल्लत है।
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रेहाना खान के गांव से 340 किलोमीटर दूर स्थित गांव किरानी की ढाणी में रोहिणी देवी रहती हैं। रोहिणी अपने परिवार के 10 एकड़ सूखी जमीन की ओर देखते हुए कहती हैं, "मेरा आधा दिन तो परिवार और कुछ बचे-खुचे जानवरों के लिए पानी भरने और ढोने में ही गुजर जाता है।"
मेघवाल, खान और देवी जैसी कई महिलाएं वसुंधरा राजे से नाखुश हैं और उनकी नाराजगी की वजहों में से एक मुख्य मुद्दा पानी की किल्लत है।
राजस्थान के पश्चिमी क्षेत्र में पिछले चार सालों से लगातार सूखा पड़ रहा है। इनमें सबसे ज्यादा सूखा साल 2018 में पड़ा जब सिर्फ 128 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।
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विधानसभा के लिए 7 दिसंबर को होनेवाले मतदान के लिए प्रदेश के चार करोड़ 30 लाख मतदाताओं में खासकर दो करोड़ 20 लाख महिला वोटरों के लिए पानी एक बड़ा चुनावी मुद्दा है। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक बीते गर्मी में पानी के लिए हिंसक विरोध प्रदर्शन झेल चुके शहरी क्षेत्र उदयपुर और जोधपुर साथ ही धौलपुर और भीलवाड़ा जैसे ग्रामीण इलाकों में भी पानी के लिए भीषण किल्लत है।
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2013 में पानी के लिए किया वोट
माना जाता है कि साल 2013 में महिलाओं ने वसुंधरा राजे का समर्थन किया था। तब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने विधानसभा चुनाव में 200 सीटों में से 162 सीटें जीती थी। इस बार उनका दावा है कि एक महिला मुख्यमंत्री ने भी उनकी जिंदगी को बेहतर नहीं बनाया। रेहाना कहती हैं कि सूखे के बावजूद इस साल पानी के लिए कोई इंतजाम नहीं किए गए।
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रेहाना खान के गांव से 340 किलोमीटर दूर स्थित गांव किरानी की ढाणी में रोहिणी देवी रहती हैं। रोहिणी अपने परिवार के 10 एकड़ सूखी जमीन की ओर देखते हुए कहती हैं, "मेरा आधा दिन तो परिवार और कुछ बचे-खुचे जानवरों के लिए पानी भरने और ढोने में ही गुजर जाता है।"
'मैं नहीं चाहती मेरी पोती भी पानी भरने में जिंदगी बर्बाद करे'
बाड़मेर के एक गांव चांदी का पार की निवासी मेघी मेघवाल कहती हैं, "हम उन्हें एक मौका दें वो हमारी जिंदगी को बेहतर बना देंगी, उनकी (वसुंधरा की) इस अपील ने हमारे दिलों को छू लिया था।" मेघी आगे कहती हैं, "मैं नहीं चाहती हूं कि मेरी तरह मेरी पोतियों की भी जिंदगी पानी भरने में बर्बाद हो जाए।"मेघवाल, खान और देवी जैसी कई महिलाएं वसुंधरा राजे से नाखुश हैं और उनकी नाराजगी की वजहों में से एक मुख्य मुद्दा पानी की किल्लत है।
राजस्थान के पश्चिमी क्षेत्र में पिछले चार सालों से लगातार सूखा पड़ रहा है। इनमें सबसे ज्यादा सूखा साल 2018 में पड़ा जब सिर्फ 128 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।
सीएजी की रिपोर्ट राजस्थान के हालात बयां करती है
प्रतीकात्मक चित्र