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राजस्थान: महिला मुख्यमंत्री के बावजूद विधानसभा में आधी आबादी की कम भागीदारी
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 07 Nov 2018 11:41 AM IST
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प्रदेश की मुख्य राजनीतिक पार्टियां भाजपा और कांग्रेस भले ही महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की बात कहे मगर असल तस्वीर कुछ और ही नजर आती है। बीते तीन विधानसभा चुनावों की बात करें तो भाजपा ने लगभग 13 फीसदी जबकि कांग्रेस ने 11 फीसदी महिलाओं को टिकट दिया।
राजस्थान में कुल मतदाताओं की संख्या 4.74 करोड़ है जिनमें महिला मतदाताओं की संख्या 2.27 करोड़ है।
दावे के उलट है हकीकत
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गाँधी अक्सर अपनी चुनावी सभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की बात करते हैं। हाल ही में डूंगरपुर जिले के सागवाड़ा में हुई अपनी जनसभा में उन्होंने कहा कि उम्मीदवारों की सूची को वो तब तक अनुमति नहीं देंगे जबतक इसमें महिला प्रत्याशियों की उचित संख्या न हो।
कांग्रेस की 400 ब्लॉक इकाइयों में से केवल 6 ब्लॉक में महिलाएं ब्लॉक प्रमुख की भूमिका में हैं। इसके अलावा 39 जिला इकाइयों में से केवल कोटा ग्रामीण में सरोज मीणा और सिरोही में गंगाबेन गरासिया जिला प्रमुख है।
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इस मुद्दे पर सत्ताधारी पार्टी भाजपा के प्रवक्ता मुकेश पारिख ने स्वीकार किया कि पार्टी के संविधान के मुताबिक महिलाओं का प्रतिनिधित्व 33 फीसदी नहीं है, मगर यह हर साल बढ़ रहा है।
पिछले चुनाव के आंकड़े है गवाह
2003 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 18 जबकि भाजपा ने 22 महिलाओं को टिकट दिया था। भाजपा सरकार बनने के बाद वसुंधरा राजे को मुख्यमंत्री और उषा पुनिया को राज्य मंत्री बनाया गया।
2008 में भाजपा ने 32 और कांग्रेस ने 23 महिला प्रत्याशियों को मौका दिया। कांग्रेस की सरकार बनने पर चार महिलाओं को कैबिनेट में शामिल किया गया।
पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा से 26 और कांग्रेस से 24 महिलाओं ने चुनावी मैदान में ताल ठोकी। चुनावों के बाद एक बार फिर सरकार बदल गई और भाजपा राज्य की सत्ता पर काबिज हुई। भाजपा ने किरण महेश्वरी को मंत्री बनाया। इसके अलावा भाजपा ने चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंची चार महिला विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल किया।
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राजस्थान में कुल मतदाताओं की संख्या 4.74 करोड़ है जिनमें महिला मतदाताओं की संख्या 2.27 करोड़ है।
दावे के उलट है हकीकत
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गाँधी अक्सर अपनी चुनावी सभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की बात करते हैं। हाल ही में डूंगरपुर जिले के सागवाड़ा में हुई अपनी जनसभा में उन्होंने कहा कि उम्मीदवारों की सूची को वो तब तक अनुमति नहीं देंगे जबतक इसमें महिला प्रत्याशियों की उचित संख्या न हो।
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कांग्रेस की 400 ब्लॉक इकाइयों में से केवल 6 ब्लॉक में महिलाएं ब्लॉक प्रमुख की भूमिका में हैं। इसके अलावा 39 जिला इकाइयों में से केवल कोटा ग्रामीण में सरोज मीणा और सिरोही में गंगाबेन गरासिया जिला प्रमुख है।
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इस मुद्दे पर सत्ताधारी पार्टी भाजपा के प्रवक्ता मुकेश पारिख ने स्वीकार किया कि पार्टी के संविधान के मुताबिक महिलाओं का प्रतिनिधित्व 33 फीसदी नहीं है, मगर यह हर साल बढ़ रहा है।
पिछले चुनाव के आंकड़े है गवाह
2003 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 18 जबकि भाजपा ने 22 महिलाओं को टिकट दिया था। भाजपा सरकार बनने के बाद वसुंधरा राजे को मुख्यमंत्री और उषा पुनिया को राज्य मंत्री बनाया गया।
2008 में भाजपा ने 32 और कांग्रेस ने 23 महिला प्रत्याशियों को मौका दिया। कांग्रेस की सरकार बनने पर चार महिलाओं को कैबिनेट में शामिल किया गया।
पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा से 26 और कांग्रेस से 24 महिलाओं ने चुनावी मैदान में ताल ठोकी। चुनावों के बाद एक बार फिर सरकार बदल गई और भाजपा राज्य की सत्ता पर काबिज हुई। भाजपा ने किरण महेश्वरी को मंत्री बनाया। इसके अलावा भाजपा ने चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंची चार महिला विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल किया।