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राजस्थान चुनाव 2018: कांग्रेस की चुप्पी से आहत मुस्लिम कहते हैं- क्या करें भाई, आगे कुआं है पीछे खाई
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Updated Sun, 02 Dec 2018 05:43 PM IST
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पुष्कर के ब्रह्मा मंदिर में राहुल गांधी
- फोटो : Twitter Congress @INCIndia
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राजस्थान विधानसभा चुनाव के लिए 7 दिसंबर को होने वाले मतदान से पहले सियासी घमासान मचा हु्आ है। धर्म, जाति, समुदाय सबके विकास की बात की जा रही है। लेकिन प्रदेश का अल्पसंख्यक समुदाय इस बहस से बाहर है। प्रदेश का मुसलमान मानता है कि सरकार किसी भी बने उनके सामने एक तरफ कुआं और दूसरी तरफ खाई वाली परिस्थिति है। मुस्लिम वर्ग को लगता है कि प्रदेश में पहले सांप्रदायिक सौहार्द था लेकिन अब उनके साथ 'भेदभाव' होने लगा है।
राजस्थान में पिछले साल अप्रैल में अलवर में पहलू खान की "गाय तस्करी" का आरोप लगाकर लोगों की एक भीड़ ने हत्या कर दी थी, जिसके बाद देशभर में बहस खड़ी हो गई थी। और इसके बाद पुलिस जांच में उन छह लोगों को क्लिनचिट दे दी गई जिसे मरने से पहले दिए अपने बयान में पहलू खान ने अपने हमलावरों के रूप में नामित किया था। और प्रदेश में कई लोग इसी अपराध के शिकार हुए, लेकिन बार-बार यही सुनते हैं- राजस्थान में सांप्रदायिक समस्या नहीं है, वे कहते हैं, हिंदुओं और मुस्लिमों के बीच सबकुछ ठीक है।
लेकिन जैसे ही आप मुस्लिम मोहल्लों में पहुंचेंगे सांप्रदायिक ध्रुवीकरण बढ़ने की घटनाओं का जिक्र होने लगेगा।
इंडियन एक्सप्रेस अखबार ने मुताबिक राजस्थान के एक छोटे से शहर झुंझुनूं बीचे-बीच स्थित एक मोहल्ले चोपदरन में मुस्लिम युवा वर्ग का एक समूह "भेदभाव" और असहिष्णुता बढ़ने की बात करता है। एक विक्रेता मोहम्मद अली कहते हैं कि अब बातचीत बदल गई है। "इससे पहले, जब हम अपने हिंदू मित्रों के साथ मिलते थे, तो हम व्यापार और अन्य चीजों के बारे में बात करत थे। अब ऑनलाइन फैलाए जा रहे घृणा संदेश हमारी बातचीत का हिस्सा बन गई हैं।"
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वे इन व्हाट्सएप संदेशों को बारे में बताते हुए कहते हैं कि ये एक झटके की तरह हैं। जैसे कि एक संदेश में खून से सनी हुई गौ मांस की तस्वीरों के साथ हिंदुओं को बताया जाता है कि ईद में मुस्लिम घरों में खाने नहीं खाएं।
लगभग छह महीने पहले बचपन के दो दोस्तों के बीच शराब पीने के बाद झगड़ा हो गया। जिसमें से एक हिंदू और दूसरा मुसलमान था। झगड़ा बहुत बड़ा हो गया और जुलूस तक निकाला गया। वे याद करते हुए कहते हैं कि इसमें भड़काऊ नारे लगाए गए थे, "हिंदुस्तान में रहना है तो..."
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राजस्थान में पिछले साल अप्रैल में अलवर में पहलू खान की "गाय तस्करी" का आरोप लगाकर लोगों की एक भीड़ ने हत्या कर दी थी, जिसके बाद देशभर में बहस खड़ी हो गई थी। और इसके बाद पुलिस जांच में उन छह लोगों को क्लिनचिट दे दी गई जिसे मरने से पहले दिए अपने बयान में पहलू खान ने अपने हमलावरों के रूप में नामित किया था। और प्रदेश में कई लोग इसी अपराध के शिकार हुए, लेकिन बार-बार यही सुनते हैं- राजस्थान में सांप्रदायिक समस्या नहीं है, वे कहते हैं, हिंदुओं और मुस्लिमों के बीच सबकुछ ठीक है।
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लेकिन जैसे ही आप मुस्लिम मोहल्लों में पहुंचेंगे सांप्रदायिक ध्रुवीकरण बढ़ने की घटनाओं का जिक्र होने लगेगा।
इंडियन एक्सप्रेस अखबार ने मुताबिक राजस्थान के एक छोटे से शहर झुंझुनूं बीचे-बीच स्थित एक मोहल्ले चोपदरन में मुस्लिम युवा वर्ग का एक समूह "भेदभाव" और असहिष्णुता बढ़ने की बात करता है। एक विक्रेता मोहम्मद अली कहते हैं कि अब बातचीत बदल गई है। "इससे पहले, जब हम अपने हिंदू मित्रों के साथ मिलते थे, तो हम व्यापार और अन्य चीजों के बारे में बात करत थे। अब ऑनलाइन फैलाए जा रहे घृणा संदेश हमारी बातचीत का हिस्सा बन गई हैं।"
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वे इन व्हाट्सएप संदेशों को बारे में बताते हुए कहते हैं कि ये एक झटके की तरह हैं। जैसे कि एक संदेश में खून से सनी हुई गौ मांस की तस्वीरों के साथ हिंदुओं को बताया जाता है कि ईद में मुस्लिम घरों में खाने नहीं खाएं।
लगभग छह महीने पहले बचपन के दो दोस्तों के बीच शराब पीने के बाद झगड़ा हो गया। जिसमें से एक हिंदू और दूसरा मुसलमान था। झगड़ा बहुत बड़ा हो गया और जुलूस तक निकाला गया। वे याद करते हुए कहते हैं कि इसमें भड़काऊ नारे लगाए गए थे, "हिंदुस्तान में रहना है तो..."
कांग्रेस कट्टर हिंदुत्व और नरम हिंदुत्व के बीच फंस गई
अशोक गहलोत, राहुल गांधी, सचिन पायलट
- फोटो : Twitter Congress @INCIndia
मोहम्मद असलम ने बताया कि पहले वे झुंझुनूं से बछड़े खरीदकर दिल्ली ले जाते थे और गाजीपुर में बेचा करते थे। यह उनका खानदानी धंधा था। लेकिन अब उन्हें यह डर सताता है कि गोतस्करी के आरोप में वे भीड़ हिंसा का शिकार हो सकते हैं। वे कहते हैं कि पुलिस भी इस दौरान बीच बचाव नहीं करती है। असलम बताते हैं कि दो साल पहले उनके भाई के साथ मारपीट की गई जिसके बाद अब वे मजदूरी करते हैं।
प्रदेश के मुसलमानों का कहना है कि बजरंग दल, शिवसेना जैसे भाजपा के सहयोगी दल ज्यादा उग्र हो गए हैं। आरएसएस के लोग पहले नहीं दिखते थे। लेकिन अब वे लाठियों के साथ दिखाई देते हैं और गौरक्षक दल सभी जगह मौजूद है।
लेकिन बढ़ती मुस्लिम असुरक्षा की जिम्मेदारी कांग्रेस की भी है। कांग्रेस कट्टर हिंदुत्व और नरम हिंदुत्व के बीच फंस गई है जिससे मुस्लिम समुदाय की चिंता बढ़ गई है। मोहम्मद अली कहते हैं, ऐसा लगता है कि हाईकमान ने कांग्रेस को निर्देश दिया है कि वे मुसलमानों के बारे में बात न करें।"
वे कहते हैं, "मेरा सवाल कांग्रेस से है। आप तथाकथित संवेदनशील मुद्दों के बारे में बात नहीं करते हैं, ठीक है, लेकिन यह क्यों है कि आप हमारे लिए बिजली-सड़क-पानी जैसे मुद्दों पर भी बात नहीं करते?" आखिरकार, मुस्लिम मोहल्ला हिंदू पड़ोस से ज्यादा वंचित है। "यहां तो पार्षद की पत्नी तक को भी हैंडपंप से पानी भरना पड़ता है।"
प्रदेश के मुसलमानों का कहना है कि बजरंग दल, शिवसेना जैसे भाजपा के सहयोगी दल ज्यादा उग्र हो गए हैं। आरएसएस के लोग पहले नहीं दिखते थे। लेकिन अब वे लाठियों के साथ दिखाई देते हैं और गौरक्षक दल सभी जगह मौजूद है।
लेकिन बढ़ती मुस्लिम असुरक्षा की जिम्मेदारी कांग्रेस की भी है। कांग्रेस कट्टर हिंदुत्व और नरम हिंदुत्व के बीच फंस गई है जिससे मुस्लिम समुदाय की चिंता बढ़ गई है। मोहम्मद अली कहते हैं, ऐसा लगता है कि हाईकमान ने कांग्रेस को निर्देश दिया है कि वे मुसलमानों के बारे में बात न करें।"
वे कहते हैं, "मेरा सवाल कांग्रेस से है। आप तथाकथित संवेदनशील मुद्दों के बारे में बात नहीं करते हैं, ठीक है, लेकिन यह क्यों है कि आप हमारे लिए बिजली-सड़क-पानी जैसे मुद्दों पर भी बात नहीं करते?" आखिरकार, मुस्लिम मोहल्ला हिंदू पड़ोस से ज्यादा वंचित है। "यहां तो पार्षद की पत्नी तक को भी हैंडपंप से पानी भरना पड़ता है।"