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राजस्थान: नरेश मीणा की तबीयत बिगड़ी, आमरण अनशन का नौवां दिन; किसानों की मांगों पर अड़े नेता
Sat, 10 Oct 2026 07:08 PM IST
प्रतीक पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बारां
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बारां
Published by: प्रतीक पांडेय
Updated Sat, 10 Oct 2026 07:08 PM IST
सार
राजस्थान के बारां में किसान नेता नरेश मीणा की तबीयत आमरण अनशन के नौवें दिन बिगड़ गई है। शर्करा स्तर कम होने और लगातार उल्टियां होने से उनके समर्थक चिंतित हैं।
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किसान नेता नरेश मीणा की तबीयत बिगड़ी
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
किसान नेता नरेश मीणा की तबीयत आमरण अनशन के नौवें दिन गंभीर रूप से बिगड़ गई है। अनशन स्थल पर उनका शर्करा स्तर कम हो गया है और उन्हें लगातार पानी की उल्टियां हो रही हैं। शारीरिक कमजोरी और वजन घटने से उनके स्वजन, ग्रामीण और समर्थक बेहद चिंतित हैं। इसके बावजूद वह मांगों पर अड़े हुए हैं और उन्होंने समर्थकों से अनशन खत्म कराने का दबाव न बनाने का अनुरोध किया है।
सेहत बिगड़ी, लेकिन संघर्ष जारी
सोशल मीडिया के जरिये किसान नेता ने स्पष्ट किया है कि जब तक किसानों और आम जनता की मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक यह आंदोलन रुकने वाला नहीं है। उन्होंने इस अनशन को केवल अपनी निजी लड़ाई न मानकर किसान समाज और आमजन के हक का संघर्ष बताया है। दूसरी तरफ, स्थिति पर नजर रख रहे पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौके पर मौजूद हैं और अनशन समाप्त कराने के लिए उनसे वार्ता का प्रयास कर रहे हैं।
जयपुर पदयात्रा और अनशन का क्रम
किसानों से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए नरेश मीणा ने 2 अक्तूबर को बारां में आमरण अनशन की शुरुआत की थी। वार्ता विफल रहने के बाद वह समर्थकों संग जयपुर की तरफ पैदल यात्रा पर निकले थे। पदयात्रियों को 7 अक्तूबर को शिवदासपुरा टोल प्लाजा पर रोक दिया गया था। अधिकारियों की ओर से आश्वासन मिलने के बाद वह गांव लौटे और अनशन दोबारा शुरू कर दिया।
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मुख्य राज्य स्तरीय मांगें
अनशनकारी नेता ने राज्य स्तर पर किसानों की कई मुख्य मांगें उठाई हैं। इसमें डीएपी व यूरिया की पर्याप्त आपूर्ति, खाद की अटैचमेंट और कालाबाजारी पर रोक तथा चंबल व बीसलपुर नहरों के अंतिम छोर तक पानी पहुंचाना शामिल है। साथ ही खेती के लिए दिन में 10 घंटे बिजली देने, लंबित कृषि बिजली कनेक्शन जारी करने, फसल खराबे का सर्वेक्षण कराकर मुआवजा देने, कृषि यंत्रों पर सब्सिडी और फसलों का उचित मूल्य देने की मांग की है। निशुल्क बजरी उपलब्ध कराने, दर्ज मुकदमे वापस लेने, हादसों के पीड़ितों को मदद देने और जेलों में बेहतर व्यवस्था के साथ पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने की बात भी कही है।
स्थानीय स्तर के मुद्दे
बारां जिला प्रशासन के समक्ष उन्होंने नाहरगढ़-जलबाड़ा क्षेत्र में वन विभाग की मनमानी रोकने, कवाई-चौकी संयंत्र में स्थानीय निवासियों को रोजगार व उचित वेतन देने, गणेशगंज लिफ्ट नहर की मोटरें सुधारकर जलापूर्ति चालू करने, अवैध शराब का कारोबार व शाखाएं बंद कराने तथा दुग्ध उत्पादकों के बकाया पैसों का भुगतान कराने की मांग रखी है।
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सेहत बिगड़ी, लेकिन संघर्ष जारी
सोशल मीडिया के जरिये किसान नेता ने स्पष्ट किया है कि जब तक किसानों और आम जनता की मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक यह आंदोलन रुकने वाला नहीं है। उन्होंने इस अनशन को केवल अपनी निजी लड़ाई न मानकर किसान समाज और आमजन के हक का संघर्ष बताया है। दूसरी तरफ, स्थिति पर नजर रख रहे पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौके पर मौजूद हैं और अनशन समाप्त कराने के लिए उनसे वार्ता का प्रयास कर रहे हैं।
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जयपुर पदयात्रा और अनशन का क्रम
किसानों से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए नरेश मीणा ने 2 अक्तूबर को बारां में आमरण अनशन की शुरुआत की थी। वार्ता विफल रहने के बाद वह समर्थकों संग जयपुर की तरफ पैदल यात्रा पर निकले थे। पदयात्रियों को 7 अक्तूबर को शिवदासपुरा टोल प्लाजा पर रोक दिया गया था। अधिकारियों की ओर से आश्वासन मिलने के बाद वह गांव लौटे और अनशन दोबारा शुरू कर दिया।
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मुख्य राज्य स्तरीय मांगें
अनशनकारी नेता ने राज्य स्तर पर किसानों की कई मुख्य मांगें उठाई हैं। इसमें डीएपी व यूरिया की पर्याप्त आपूर्ति, खाद की अटैचमेंट और कालाबाजारी पर रोक तथा चंबल व बीसलपुर नहरों के अंतिम छोर तक पानी पहुंचाना शामिल है। साथ ही खेती के लिए दिन में 10 घंटे बिजली देने, लंबित कृषि बिजली कनेक्शन जारी करने, फसल खराबे का सर्वेक्षण कराकर मुआवजा देने, कृषि यंत्रों पर सब्सिडी और फसलों का उचित मूल्य देने की मांग की है। निशुल्क बजरी उपलब्ध कराने, दर्ज मुकदमे वापस लेने, हादसों के पीड़ितों को मदद देने और जेलों में बेहतर व्यवस्था के साथ पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने की बात भी कही है।
स्थानीय स्तर के मुद्दे
बारां जिला प्रशासन के समक्ष उन्होंने नाहरगढ़-जलबाड़ा क्षेत्र में वन विभाग की मनमानी रोकने, कवाई-चौकी संयंत्र में स्थानीय निवासियों को रोजगार व उचित वेतन देने, गणेशगंज लिफ्ट नहर की मोटरें सुधारकर जलापूर्ति चालू करने, अवैध शराब का कारोबार व शाखाएं बंद कराने तथा दुग्ध उत्पादकों के बकाया पैसों का भुगतान कराने की मांग रखी है।