Kidney Racket: राजस्थान के किडनी गैंग में काम किया, फिर खोल लिया अपना गिरोह, खुद को मानता है गॉड गिफ्टेड सर्जन
किडनी रैकेट का मुख्य आरोपी राजस्थान के किडनी निकालने वाले गैंग के साथ काम करता था। उसने राजस्थान के कई लोगों की किडनी निकालकर बेच दी थी।
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साउथ दिल्ली की हौज खास थाना पुलिस ने किडनी रैकेट मामले का भंडाफोड़ किया। इस मामले में अब तक 11 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। जिसमें तीन डॉक्टर शामिल है। किडनी रैकेट का तार अब राजस्थान से जुड़ गया है। रैकेट का सरगना कुलदीप राय उर्फ केडी राजस्थान के किडनी रैकेट में भी शामिल था।
राजस्थान में मरीजों की किडनी निकाली
मीडिया रिपोर्टस के अनुसार कुलदीप 20 साल से ओटी तकनीशियन का काम कर रहा था। लगभग तीन-चार साल पहले वह राजस्थान के एक गिरोह के संपर्क में आया। उस गैंग के साथ मिलकर कुलदीप ने कई मरीजों की किडनी निकाल कर अवैध रूप से बेच दी। बाद में उसे लगा कि वह अपना गिरोह शुरू करके और अधिक पैसा कमा सकता है।
खुद को मानता था 'गिफ्टेड सर्जन'
पुलिस ने बताया कि कुलदीप बॉलीवुड फिल्म 'थ्री इडियट्स' से प्रेरित था। वह अपने आपको 'गिफ्टेड सर्जन' मानता था। उसने सोनीपत के गोहाना के एक बिल्डिंग में ऑपरेशन थियेटर बनाया रखा था। यह बिल्डिंग गैंग के एक सदस्य सोनी रोहिल्ला की थी। यहां कुलदीप उर्फ केडी ही किडनी निकालने और लगाने दोनों का काम करता था। पुलिस ने बताया कि कुलदीप ने दिल्ली और उसके आसपास से उपकरण और दवाएं भी मंगलवाता था। मूलरूप से लखनऊ के पास का रहने वाला केडी यहां उत्तम नगर में रहता था। परिवार में पत्नी के अलावा दो बेटे हैं। 15 साल के बड़े बेटे को यह डॉक्टर बनाना चाहता है।
एक और डॉक्टर राजस्थान गिरोह में था शामिल
पुलिस सूत्रों का कहना है कि गिरफ्तार एनेस्थेसियोलॉजिस्ट डॉक्टर सौरभ मित्तल (37) भी कथित तौर पर राजस्थान गिरोह के लिए काम किया था। बाद में उसे कुलदीप के गिरोह में काम करने का ऑफर दिया गया। गोहाना में मरीजों को एनेस्थीसिया देने और मेडिकल रिपोर्ट की जांच करने के लिए डॉक्टर को 1.5-2.5 लाख रुपये दिया जा रहा था।
छह महीने में 14 किडनी की ट्रांसप्लांट
पुलिस के अनुसार, यह गिरोह करीब एक साल से सक्रिय है। पिछले छह महीनों में कथित तौर पर 14 किडनी ट्रांसप्लांट कर चुका है। इस गिरोह ने प्रति माह कम से कम दो सर्जरी की है। आमतौर पर रात में सर्जरी की जाती था और दिन में अस्पताल को बंद रखा जाता था।
एजेंट्स नौजवानों को बनाते थे शिकार
इस गिरोह के प्रत्येक सदस्य को काम बांट दिया गया था। एजेंट 20 साल तक के उम्र के नौजवानों को फंसाकर लैब लाते थे। एक लैब टेक्नीशियन मोहम्मद लातिफ मेडिकल टेस्ट में मदद करता था। वहीं दूसरे एजेंटस मरीज को गोहाना भेजते थे, जहां डॉक्टर और मेडिकल वर्कर ऑपरेशन करते थे।
पेट दर्द के इलाज के बहाने निकालने वाले थे किडनी
दिल्ली डीसीपी (दक्षिण) अनुसार, 26 मई को उन्हें एक मुखबिर से एम्स अस्पताल के पास अवैध गतिविधियों के बारे में जानकारी मिली थी। इसके बाद पुलिस ने गिरोह के एक सदस्य सर्वजीत जैलवाल को गिरफ्तार किया, जो एक मरीज पिंटू यादव के साथ लैब में था। यादव को पेट दर्द का इलाज करने का झांसा देकर लैब लाया गया, जहां सर्वजीत पिंटू पर किडनी देने के लिए दवाब बनाया।
राजस्थान में रैकेट चलाने वालों की तलाश
पुलिस ने कहा कि पीड़ित यादव उन्हें पश्चिम विहार के एक डीडीए फ्लैट में ले गया, जहां रैकेट में शामिल एक अन्य सहयोगी शैलेश पटेल (23) को गिरफ्तार किया गया और तीन पीड़ित पाए गए। पुलिस ने आगे छापेमारी की और दो और आरोपियों विकास (24) और रंजीत गुप्ता को गिरफ्तार किया। वहीं दिल्ली पुलिस अब राजस्थान में किडनी बेचने वाले सिंडिकेट चलाने वालों की तलाश कर रही है।