Rajasthan: लेफ्टिनेंट जनरल ढिल्लों की 'कितने गाजी आए कितने गाजी गए' पुस्तक का विमोचन, ये है खास
लेफ्टिनेंट जनरल ढिल्लो ने बताया कि सैन्य जीवन और विशेष रूप से कश्मीर में आतंकवादियों के विरुद्ध की गई कार्रवाई के परिप्रेक्ष्य में पुस्तक "कितने गाजी आए कितने गाजी गए" की रचना की गई है। पुस्तक लेखन का प्रारम्भिक मुख्य उद्देश्य युवाओं को सैन्य जीवन के बारे में परिचय देना था।
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राजस्थान पुलिस अकादमी ऑडिटोरियम में शनिवार शाम को लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस टाइनी ढिल्लों की पुस्तक "कितने गाजी आए कितने गाजी गए" का विमोचन किया गया। लेफ्टिनेंट जनरल एएस भिंडर और महानिदेशक पुलिस उमेश मिश्रा ने पुस्तक का विमोचन किया।
मिश्रा ने जनरल टाइनी के लेखन की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनकी पुस्तक में देश के प्रति प्रेम और विभिन्न सुरक्षा बलों के बीच आपसी समन्वय को बताया गया है। उन्होंने पुस्तक में पुलिस अधिकारियों द्वारा किए गए बेहतरीन कार्यों को भी रेखांकित किया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अस्मिता को संजोए रखने के लिए विभिन्न सुरक्षा बलों के मध्य सामंजस्य और एक दूसरे के प्रति समझ आवश्यक है। ये पुस्तक युवाओं को सैन्य बलों अैर राष्ट्रीयता के प्रति प्रेरित करेगी।
लेफ्टिनेंट जनरल ढिल्लो ने बताया कि सैन्य जीवन और विशेष रूप से कश्मीर में आतंकवादियों के विरुद्ध की गई कार्रवाई के परिप्रेक्ष्य में पुस्तक "कितने गाजी आए कितने गाजी गए" की रचना की गई है। पुस्तक लेखन का प्रारम्भिक मुख्य उद्देश्य युवाओं को सैन्य जीवन के बारे में परिचय देना था। उन्होंने बताया कि जल्द ही इस पुस्तक का हिंदी अनुवाद प्रकाशित होगा।
उन्होंने कहा कि कश्मीर में आतंकवाद है, लेकिन सारे कश्मीरी आतंकवादी नहीं है। सामान्य कश्मीरी भले औरअच्छे मेहमान नवाज है। आर्टिकल 370 कश्मीर के भारत में विलय के समय 1947 में नहीं बल्कि 1949 में अस्तित्व में आया था। आर्टिकल 370 और 35 ए का संबंध किसी धर्म विशेष से नहीं है। सैन्य और पुलिस अधिकारियों के पीछे उनकी पत्नियों के त्याग को भी पुस्कत में रेखांकित किया।
रजत बुक कॉर्नर के मोहित बत्रा ने बताया कि प्रकाशन के एक सप्ताह बाद ही ये देश में सर्वाधिक बिकने वाली पुस्तक बन गई है। समारोह में अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस एस सेंगत्थिर व प्रशाखा माथुर, सेवानिवृत्त डीजीपी बेंस सहित पुलिस सेवा तथा भारतीय सेना के अधिकारी गण मौजूद रहे।