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फैसला: हत्या की दोषी युवती समेत तीन को आजीवन कारावास, साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने तय की सजा

Tue, 21 Dec 2021 11:21 AM IST
प्रशांत कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालौर 
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालौर  Published by: प्रशांत कुमार झा Updated Tue, 21 Dec 2021 11:21 AM IST
सार

जालौर एसपी हर्षवर्धन अग्रवाला ने बताया कि मामला साल 2011 का है। 2 मई 2011 को थाना नोसरा पुलिस को क्षेत्र के निम्बला गांव में एक वृद्धा व एक युवती की हत्या हुई थी। इसी मामले में जिला एवं सेशन न्यायालय द्वारा तीनों आरोपियों को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाया। 

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Life imprisonment for three including a girl convicted of murder case in jalore in rajasthan
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : amar ujala

विस्तार

हत्या के एक मामले में कोर्ट ने दोषी मानते हुए दो युवक व एक युवती को आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया है। दोषी पाए गए युवक लखविंद्र सिंह उर्फ लकी पुत्र करतार सिंह (28) व मेहर सिंह (33) सगे भाई है और स्वर्णदीप कॉम्प्लेक्स रातानाडा जोधपुर के रहने वाले है, जबकि युवती गरिमा व्यास पुत्री अविनाश (21) झालामण्ड हाउस हाईकोर्ट कॉलोनी जोधपुर की है।
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जालौर एसपी हर्षवर्धन अग्रवाला ने बताया कि मामला साल 2011 का है। 2 मई 2011 को थाना नोसरा पुलिस को क्षेत्र के निम्बला गांव से एक किलोमीटर दूर आहोर की तरफ मारुति स्विफ्ट कार में एक वृद्धा व एक युवती की लाश मिली थी। किसी ने चाकू से वार कर दोनों महिलाओं की हत्या कर दी थी। घटना पर नौसरा थाने पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाकर अनुसन्धान के बाद आरोपी लखविंद्र सिंह, उसके भाई मेहर सिंह व युवती गरिमा व्यास को गिरफ्तार किया गया।
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सबूतों के आधार पर कोर्ट ने सुनाया फैसला
तत्कालीन थानाधिकारी राजेंद्र सिंह द्वारा 28 जून 2011 को आरोपियों के विरुद्ध चार्जशीट अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जालौर में पेश की गई जो कमिट होकर जिला एवं सेशन न्यायालय जालौर में पेश हुई। गंभीर प्रकृति का अपराध होने से 11 जुलाई 2011 को इस मामले को केस ऑफिसर स्कीम में चयनित किया गया, जिसमें केस ऑफिसर रामनारायण, निरमा विश्नोई, आसु सिंह महेंद्र सिंह व शिवराज सिंह थानाधिकारी नोसरा द्वारा महत्वपूर्ण गवाहों के बयान करवाए गए। अंतिम गवाह तत्कालीन थानाधिकारी राजेंद्र सिंह के बयान लेख हुए। तमाम गवाहों एवं भौतिक साक्ष्यों के आधार पर जिला एवं सेशन न्यायालय द्वारा तीनों आरोपियों को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास के दंड से दंडित किया गया है।
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